भीमा कोरेगांव मामला देश के चर्चित भीमा कोरेगांव मामले में एक बार फिर महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस श्री चंद्रशेखर ने अधिवक्ता सुरेंद्र गडलिंग की जमानत याचिका की सुनवाई से स्वयं को अलग (Recuse) कर लिया। इसके बाद यह मामला एक नई पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा। खास बात यह है कि इस मामले में अब तक कई न्यायाधीश सुनवाई से स्वयं को अलग कर चुके हैं।

कौन हैं जस्टिस श्री चंद्रशेखर?
जस्टिस श्री चंद्रशेखर भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश हैं। सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति से पहले उन्होंने उच्च न्यायालय में न्यायाधीश और मुख्य न्यायाधीश के रूप में भी सेवाएं दीं। वे संवैधानिक, दीवानी और आपराधिक मामलों की सुनवाई का व्यापक अनुभव रखते हैं।
- हाल के वर्षों में वे कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई करने वाली पीठों का हिस्सा रहे हैं
- और न्यायपालिका में उनकी निष्पक्ष कार्यशैली के लिए उन्हें जाना जाता है।
क्या है भीमा कोरेगांव मामला?
भीमा कोरेगांव मामला वर्ष 2018 की घटनाओं से जुड़ा एक चर्चित प्रकरण है। इस मामले में कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, वकीलों और अन्य व्यक्तियों पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) सहित विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।
अधिवक्ता सुरेंद्र गडलिंग भी इस मामले के आरोपियों में शामिल हैं। वे लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं और अपनी जमानत याचिका पर सुनवाई की मांग कर रहे हैं।
जस्टिस श्री चंद्रशेखर ने सुनवाई से खुद को क्यों अलग किया?
- सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा ने अदालत में कहा कि उनके साथ बैठने
- वाले न्यायाधीश को इस मामले की सुनवाई में “कुछ कठिनाई” है। इसलिए यह मामला दूसरी पीठ के समक्ष भेजा जाएगा।
- हालांकि, अदालत की ओर से रिक्यूजल (Recusal) का विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किया गया।
- भारतीय न्यायपालिका में कई बार न्यायाधीश व्यक्तिगत, पेशेवर या नैतिक कारणों
- से किसी मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लेते हैं ताकि न्यायिक निष्पक्षता पर कोई प्रश्न न उठे।
रिक्यूजल (Recusal) क्या होता है?
रिक्यूजल का अर्थ है कि कोई न्यायाधीश किसी विशेष मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर ले।
इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं—
- हितों का संभावित टकराव।
- किसी पक्ष से पूर्व संबंध।
- निष्पक्षता बनाए रखने की आवश्यकता।
- अन्य व्यक्तिगत या न्यायिक कारण।
अक्सर न्यायाधीश अपने रिक्यूजल का विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं करते।
भीमा कोरेगांव मामला इस मामले में यह कितनी बार हुआ?
सुरेंद्र गडलिंग की जमानत याचिका में यह पहली बार नहीं है जब कोई न्यायाधीश अलग हुआ हो। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जस्टिस श्री चंद्रशेखर इस मामले से अलग होने वाले तीसरे न्यायाधीश हैं। इससे पहले भी दो न्यायाधीश सुनवाई से स्वयं को अलग कर चुके हैं।
आगे क्या होगा?
- अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट की किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा।
- नई बेंच तय होने के बाद सुरेंद्र गडलिंग की जमानत याचिका पर आगे की सुनवाई होगी।
- मामले की अगली सुनवाई की तारीख न्यायालय के प्रशासनिक आदेश के अनुसार तय की जाएगी।
क्यों चर्चा में है यह मामला?
- भीमा कोरेगांव मामला कई वर्षों से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
- इसमें कई आरोपियों की जमानत याचिकाएं, जांच एजेंसियों की कार्रवाई और अदालत की सुनवाई
- लगातार सुर्खियों में रही हैं। हालिया रिक्यूजल ने एक बार फिर इस मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
जस्टिस श्री चंद्रशेखर द्वारा भीमा कोरेगांव मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग करना न्यायिक प्रक्रिया का एक हिस्सा है। इसका अर्थ किसी पक्ष के पक्ष या विपक्ष में फैसला नहीं होता, बल्कि न्यायिक निष्पक्षता बनाए रखने की प्रक्रिया माना जाता है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि नई पीठ कब गठित होती है और जमानत याचिका पर आगे क्या फैसला आता है।
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