सुप्रीम कोर्ट का फैसला : देश भर के लाखों कार्यरत शिक्षकों के लिए आज बड़ी खबर आई है। सुप्रीम कोर्ट ने टीईटी (TET) पास करने की समय सीमा को एक साल बढ़ा दिया है। अब शिक्षकों को टीईटी क्लियर करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय मिल गया है। पहले यह डेडलाइन 31 अगस्त 2027 थी।
हालांकि कोर्ट ने साफ कर दिया है कि टीईटी पास करना अनिवार्य है। बिना टीईटी के नौकरी बचाना मुश्किल होगा।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला – क्या कहा?
29 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने कई पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा:
- सभी कार्यरत शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी पास करना होगा।
- 2009 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से पूरी छूट देने की मांग को खारिज कर दिया गया।
- जिन शिक्षकों के पास रिटायरमेंट में 5 साल से कम समय बचा है, उन्हें कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन प्रमोशन के लिए टीईटी जरूरी रहेगा।
यह फैसला RTE Act 2009 की धारा 23 के तहत आया है, जिसमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की अनिवार्यता पर जोर दिया गया है।
पूरा मामला क्या है?
- साल 2009 में लागू शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) ने प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्तर
- पर शिक्षकों के लिए टीईटी/सीटीईटी को अनिवार्य कर दिया। लेकिन कई राज्यों
- (उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड आदि) में हजारों शिक्षक बिना टीईटी पास किए सालों से पढ़ा रहे थे।
सितंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में इन शिक्षकों को 2 साल का समय दिया गया था। अब उस समय सीमा को बढ़ाकर 3 साल कर दिया गया है।
प्रभावित शिक्षक:
- उत्तर प्रदेश
- मध्य प्रदेश
- राजस्थान
- बिहार
- तमिलनाडु आदि
तमिलनाडु सरकार ने कोर्ट में कहा कि इस फैसले से उनके राज्य में करीब 4 लाख शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं।
कोर्ट की सख्ती क्यों?
सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता ने शिक्षकों से सख्त लहजे में कहा:
“केवल अपनी नौकरी की सुरक्षा के बारे में मत सोचिए। बच्चों के भविष्य और क्वालिटी एजुकेशन के बारे में भी सोचिए।”
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टीईटी का मकसद शिक्षकों की योग्यता सुनिश्चित करना है, ताकि बच्चे बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकें।
शिक्षकों पर क्या असर पड़ेगा?
- नौकरी का खतरा — अगर 31 अगस्त 2028 तक टीईटी नहीं पास किया तो नौकरी जा सकती है या अनिवार्य रिटायरमेंट हो सकता है।
- प्रमोशन रुकेगा — बिना टीईटी के प्रमोशन नहीं मिलेगा।
- राज्यों पर बोझ — कई राज्यों को बड़े पैमाने पर टीईटी परीक्षाएं आयोजित करनी पड़ेंगी।
- सीटीईटी वैकल्पिक — कुछ राज्यों में CTET भी मान्य हो सकता है।
शिक्षकों के लिए सलाह
- तुरंत तैयारी शुरू करें — TET/CTET की कोचिंग जॉइन करें या ऑनलाइन स्टडी मटेरियल का इस्तेमाल करें।
- आधिकारिक नोटिफिकेशन चेक करें — अपने राज्य शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर अपडेट देखें।
- समूह बनाएं — साथी शिक्षकों के साथ स्टडी ग्रुप बनाकर तैयारी करें।
- पिछले पेपर सॉल्व करें — पैटर्न समझने के लिए पिछले सालों के प्रश्नपत्र हल करें।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला शिक्षकों के लिए चुनौती भरा है, लेकिन बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए जरूरी भी है। एक साल का अतिरिक्त समय मिलने से लाखों शिक्षकों को तैयारी का मौका मिला है। अब समय बर्बाद किए बिना तैयारी पर फोकस करना चाहिए।