कौन हैं IFS : पीएम मोदी के नॉर्वे दौरे के दौरान एक भारतीय राजनयिक ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। जब नॉर्वे की एक पत्रकार ने भारत के लोकतंत्र, मानवाधिकार और प्रेस फ्रीडम पर सवाल उठाए, तो IFS अधिकारी सिबी जॉर्ज ने उन्हें ऐसा जवाब दिया कि सोशल मीडिया पर उनकी तारीफ हो रही है। लोग उन्हें “दूसरा एस. जयशंकर” कह रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18-19 मई 2026 को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में हैं। इस दौरान विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग ने भारत पर तीखे सवाल दागे। उन्होंने प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में नॉर्वे को नंबर-1 और भारत को नीचे बताते हुए सवाल किया कि दुनिया भारत पर भरोसा क्यों करे।

कौन हैं IFS नॉर्वे में क्या हुआ पूरा मामला?
इस पर विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि भारत 5000 साल पुरानी सभ्यता है और पत्रकार को भारत की विविधता व जटिलता का अंदाजा नहीं है।
सिबी जॉर्ज ने जोर देकर कहा:
- भारत में सैकड़ों भाषाओं में सैकड़ों न्यूज चैनल चलते हैं।
- संवैधानिक उपाय हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा करते हैं।
- भारत ने आजादी के समय ही महिलाओं को वोट का अधिकार दे दिया था, जबकि कई पश्चिमी देशों में यह बहुत बाद में हुआ।
- “आप सवाल पूछिए, यह मत बताइए कि जवाब कैसे देना है।”
उनका यह आक्रामक लेकिन तथ्यपूर्ण अंदाज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
कौन हैं सिबी जॉर्ज? (Sibi George Biography)
सिबी जॉर्ज 1993 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी हैं। वर्तमान में वे विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) के पद पर तैनात हैं और यूरोप तथा पश्चिम एशिया से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को संभाल रहे हैं।
उनका राजनयिक सफर:
- राजनयिक करियर की शुरुआत काहिरा (मिस्र) से की।
- भारत के राजदूत के रूप में सेवा: जापान, स्विट्जरलैंड, कुवैत, होली सी (वेटिकन), लिकटेंस्टीन और मार्शल आइलैंड्स।
- डिप्टी चीफ ऑफ मिशन: तेहरान (ईरान) और रियाद (सऊदी अरब)।
- अन्य पोस्टिंग: दोहा, इस्लामाबाद, वॉशिंगटन डीसी।
- नई दिल्ली में: ईस्ट एशिया डिवीजन और इंडिया-अफ्रीका फोरम समिट।
शिक्षा और उपलब्धियां!
केरल के कोट्टायम जिले के रहने वाले सिबी जॉर्ज ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन दोनों में गोल्ड मेडलिस्ट रहे हैं। उन्होंने अमेरिकन यूनिवर्सिटी काहिरा, IIM अहमदाबाद और Indian School of Business से ट्रेनिंग ली है।
पुरस्कार:
- 2014 में विदेश मंत्रालय का प्रतिष्ठित S.K. Singh Award मिला।
क्यों हो रही है तारीफ?
- नीदरलैंड्स के बाद नॉर्वे में भी सिबी जॉर्ज का बेबाक रुख भारत की कूटनीति में
- नई ऊर्जा का प्रतीक बन गया है। आज के दौर में जहां विदेशी मीडिया अक्सर भारत
- पर एकतरफा आरोप लगाता है, वहां सिबी जॉर्ज जैसे अधिकारी तथ्यों के साथ पलटवार कर रहे हैं।
सोशल मीडिया यूजर्स उन्हें “Bold Indian Diplomat” और “New Age S Jaishankar” कह रहे हैं। यह घटना भारत की बढ़ती वैश्विक छवि और “वोकल फॉर लोकल” से आगे “वोकल फॉर इंडिया” की दिशा को दर्शाती है।
भारतीय कूटनीति का नया चेहरा
सिबी जॉर्ज की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारत अब चुप रहकर आलोचना सहने वाला देश नहीं रहा। सही तथ्यों और आत्मविश्वास के साथ जवाब देना आधुनिक भारतीय राजनयिकों की नई पहचान बनती जा रही है।
IFS सिबी जॉर्ज का मुंहतोड़ जवाब न सिर्फ नॉर्वे प्रेस को, बल्कि उन सभी को जवाब है जो भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर बिना पूरी जानकारी के सवाल उठाते हैं। केरल के इस गोल्ड मेडलिस्ट राजनयिक ने एक बार फिर साबित किया कि भारत के पास तथ्य और इतिहास दोनों हैं।
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