गोल्ड बैंकिंग सिस्टम : भारत में सोना सिर्फ आभूषण नहीं, बल्कि भावनाओं, परंपरा और आर्थिक सुरक्षा का प्रतीक है। लेकिन बढ़ते सोने के आयात ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा दिया है। इसी समस्या का हल निकालने के लिए देश के प्रमुख ज्वेलर्स संगठन AIJGF (All India Jewellers & Goldsmiths Federation) ने केंद्र सरकार को ‘बुलियन बैंक’ यानी गोल्ड बैंकिंग सिस्टम शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। इस मॉडल से घरों, मंदिरों और ETFs में पड़े निष्क्रिय सोने को आर्थिक गतिविधियों में जोड़ा जा सकेगा, जिससे सोने के आयात में भारी कमी आएगी।

गोल्ड बैंकिंग सिस्टम क्यों जरूरी है बुलियन बैंक?
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोने के आयातक देशों में शामिल है। हर साल अरबों डॉलर का विदेशी मुद्रा सिर्फ सोना खरीदने में खर्च होता है। 2025-26 में सोने के आयात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में नागरिकों से अपील की है कि अनावश्यक सोने की खरीदारी कम करें ताकि विदेशी मुद्रा बचाई जा सके।
- AIJGF ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को प्रस्ताव भेजा है। संगठन का कहना है
- कि भारत में लाखों टन सोना घरों, मंदिरों, ट्रस्टों और गोल्ड ETFs में निष्क्रिय पड़ा है।
- इसे रेगुलेटेड तरीके से बाजार में लाकर ज्वेलर्स, रिफाइनर्स और निर्यातकों को उपलब्ध कराया जा सकता है। इ
- ससे नया सोना आयात करने की जरूरत कम होगी।
बुलियन बैंक मॉडल कैसे काम करेगा?
- सोना जमा करने वाले को फायदा: आम नागरिक, परिवार या मंदिर अपने सोने को बुलियन बैंक में जमा कर सकेंगे। बदले में उन्हें ब्याज या अन्य वित्तीय लाभ मिलेगा।
- उधार लेने वाले को आसानी: ज्वेलर्स और निर्यातक इस सोने को उधार लेकर अपनी जरूरत पूरी कर सकेंगे।
- देश को फायदा: सोने का आयात घटेगा, विदेशी मुद्रा भंडार बचेगा और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
- गोल्ड ETFs की भूमिका: प्रस्ताव में गोल्ड ETFs को भी अपने फिजिकल गोल्ड का हिस्सा नियंत्रित तरीके से उधार देने की अनुमति देने की बात कही गई है, जिससे बाजार में लिक्विडिटी बढ़ेगी।
यह मॉडल गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
ज्वेलरी इंडस्ट्री को कितना फायदा?
भारत की ज्वेलरी इंडस्ट्री विश्व स्तर पर बहुत बड़ी है। अगर घरेलू सोना आसानी से उपलब्ध हो जाए तो ज्वेलर्स की लागत कम होगी, सप्लाई चेन मजबूत बनेगी और पारदर्शिता बढ़ेगी। इससे अवैध तस्करी पर भी अंकुश लग सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बुलियन बैंक से पूरे गोल्ड इकोसिस्टम को नई ऊर्जा मिलेगी।
चुनौतियां भी कम नहीं
इस योजना को सफल बनाने में कई बाधाएं हैं:
- भारतीय परिवार सोना घर में रखना ही सुरक्षित मानते हैं। बैंकिंग सिस्टम पर भरोसा बनाना चुनौतीपूर्ण होगा।
- सोने की सुरक्षा, पारदर्शिता और रिस्क मैनेजमेंट के लिए मजबूत रेगुलेटरी फ्रेमवर्क जरूरी है।
- कर प्रणाली में बदलाव (जैसे जमा पर मिलने वाले ब्याज पर टैक्स राहत) की भी मांग की गई है।
सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन बढ़ते आयात बिल और रुपए पर दबाव को देखते हुए इस प्रस्ताव पर गंभीर विचार हो रहा है।
पहले भी हुए हैं प्रयास
भारत सरकार पहले भी सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम जैसी योजनाएं ला चुकी है। लेकिन इनमें सफलता सीमित रही क्योंकि जागरूकता और सुविधा की कमी रही। बुलियन बैंक मॉडल इन योजनाओं को नया रूप दे सकता है।
आगे क्या हो सकता है?
- सरकार द्वारा कंसल्टेशन पैनल का गठन
- पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुनिंदा बैंकों में शुरूआत
- ज्वेलर्स को गोल्ड मेटल लोन जैसी सुविधाएं आसान बनाना
- घरेलू सोने को रिफाइन करके लोकल मार्केट में सप्लाई
बुलियन बैंक मॉडल भारत की आर्थिक रणनीति में गेम चेंजर साबित हो सकता है। अगर इसे सही तरीके से लागू किया गया तो न सिर्फ सोने का आयात कम होगा, बल्कि देश के निष्क्रिय सोने को productive asset में बदला जा सकेगा। यह योजना आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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