अंतरिक्ष में बिहू का जलवा : असम की पारंपरिक संस्कृति अब पृथ्वी से आगे अंतरिक्ष तक पहुंच गई है। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर अमेरिकी NASA अंतरिक्ष यात्री माइक फिंके ने शानदार बिहू नृत्य किया। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें फिंके गले में पारंपरिक गमोसा पहने जीरो ग्रेविटी में बिहू के स्टेप्स पर थिरकते नजर आ रहे हैं। बैकग्राउंड में असमिया बिहू गीत बज रहा है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस वीडियो को अपने आधिकारिक X (ट्विटर) अकाउंट पर शेयर करते हुए लिखा, “अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में बिहू नृत्य। असम की संस्कृति के प्रति इस विशेष सम्मान के लिए अंतरिक्ष यात्री माइक फिंके की सराहना करता हूं। बिहू पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष ध्यान के बाद लोगों को इसे वैश्विक स्तर पर मनाते देखना अद्भुत है।”
यह घटना रोंगाली बिहू (असमिया नववर्ष) के मौके पर और भी खास हो गई है। असम की संस्कृति को वैश्विक पटल पर ले जाने का यह एक अनोखा उदाहरण है।

कौन हैं माइक फिंके?
माइक फिंके NASA के अनुभवी अंतरिक्ष यात्री हैं, जिन्होंने चार अंतरिक्ष उड़ानें पूरी की हैं। उनकी पत्नी रेनिता सैकिया असम की निवासी हैं, जिस वजह से फिंके असमिया संस्कृति से गहरा जुड़ाव रखते हैं।
- वीडियो में फिंके जीरो ग्रेविटी के कारण तैरते हुए बिहू नृत्य के पारंपरिक स्टेप्स कर रहे हैं।
- गले में लाल-सफेद गमोसा पहने वे बिहू गीत की धुन पर पूरी ऊर्जा के साथ नाचते दिख रहे हैं।
- यह वीडियो पुराना है (संभवतः 2004 का), लेकिन रोंगाली बिहू 2026 के दौरान फिर से वायरल हो गया है।
- फिंके इससे पहले भी ISS पर बिहू परफॉर्म कर चुके हैं।
हिमंत बिस्वा सरमा की प्रतिक्रिया!
सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने वीडियो शेयर करते हुए असम की संस्कृति को ग्लोबल बताते हुए खुशी जताई। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी जिक्र किया, जिन्होंने अप्रैल 2023 में गुवाहाटी में बिहू बिनंदिया कार्यक्रम देखा था। उस कार्यक्रम में करीब 10,000 लोगों ने सामूहिक रूप से बिहू नृत्य किया था।
- सरमा का कहना है कि मोदी जी के प्रयासों से बिहू अब सिर्फ असम तक सीमित नहीं रहा
- बल्कि वैश्विक स्तर पर पहचान बना रहा है। अंतरिक्ष में बिहू देखना असमवासियों के लिए गर्व की बात है।
अंतरिक्ष में बिहू का जलवा बिहू क्या है? असम की सांस्कृतिक पहचान
- बिहू असम का सबसे प्रमुख त्योहार है, जो तीन रूपों में मनाया जाता है
- रोंगाली बिहू (वसंत ऋतु और नववर्ष), भोगाली बिहू (फसल कटाई) और कांगाली बिहू
- (दुख का त्योहार)। रोंगाली बिहू असमिया नववर्ष का प्रतीक है, जिसमें नृत्य, गीत
- पकवान और सामुदायिक उत्सव शामिल होते हैं।
- बिहू नृत्य में हाथ-पैरों की तेज गतिविधियां, कमर की मूवमेंट और पारंपरिक वेशभूषा
- (गमोसा, मेखला-चादर) मुख्य होती हैं। गमोसा असमिया संस्कृति का महत्वपूर्ण प्रतीक है
- जिसे सम्मान और स्वागत के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
- असम में बिहू सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि असमिया पहचान, एकता और खुशी का प्रतीक है।
- अब यह अंतरिक्ष जैसे अनोखे मंच पर पहुंचकर पूरी दुनिया को आकर्षित कर रहा है।
असम की संस्कृति का वैश्विक प्रसार
- यह वीडियो असम की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाई दे रहा है।
- माइक फिंके जैसी अंतरराष्ट्रीय हस्ती का बिहू परफॉर्म करना दिखाता है
- कि असमिया संस्कृति भाषा, सीमा और यहां तक कि गुरुत्वाकर्षण की सीमाओं को पार कर रही है।
- प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर भारत की संस्कृतियों को बढ़ावा मिल रहा है।
- बिहू बिनंदिया जैसे कार्यक्रम और अब अंतरिक्ष में बिहू – ये सभी कदम असम को
- ग्लोबल मैप पर मजबूती से स्थापित कर रहे हैं।
सोशल मीडिया यूजर्स इस वीडियो पर खूब प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कई लोग इसे “असम का गर्व” और “संस्कृति का नया अध्याय” बता रहे हैं। रोंगाली बिहू के दौरान यह वीडियो असमवासियों के उत्साह को और बढ़ा रहा है।
आगे का महत्व
- ऐसी घटनाएं युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ती हैं और दुनिया भर में असम की
- सांस्कृतिक छवि को मजबूत करती हैं। असम सरकार भी बिहू को पर्यटन और
- सांस्कृतिक राजदूत के रूप में प्रचारित कर रही है।
माइक फिंके की पत्नी रेनिता सैकिया असम की बेटी होने के नाते इस कनेक्शन को और खास बनाती हैं। यह दिखाता है कि व्यक्तिगत संबंध भी संस्कृति के प्रसार में कितना बड़ा रोल निभा सकते हैं।
NASA अंतरिक्ष यात्री माइक फिंके द्वारा ISS पर किया गया बिहू नृत्य असम की संस्कृति के लिए एक यादगार पल है। हिमंत बिस्वा सरमा ने इसे सही मायने में “बिहू ग्लोबल हो रहा है” कहा। जीरो ग्रेविटी में गमोसा पहने बिहू स्टेप्स करना न सिर्फ रोमांचक है, बल्कि असम की समृद्ध विरासत को पूरी मानवता तक पहुंचाने का प्रतीक भी है।
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