लोकसभा में 67 वोट कम : नारी शक्ति वंदन अधिनियम (Nari Shakti Vandan Adhiniyam) को जल्द लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने 16 से 18 अप्रैल 2026 तक तीन दिवसीय विशेष संसदीय सत्र बुलाया है। इस सत्र में महिला आरक्षण बिल के साथ लोकसभा सीटें बढ़ाने और परिसीमन बिल भी पेश किए जा रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि लोकसभा में 67 वोट की कमी और राज्यसभा में 21 वोट की जरूरत होने पर सरकार बिल पास कैसे करेगी?
सरकार का लक्ष्य है कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले ही महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण मिल जाए।

लोकसभा में 67 वोट कम संख्या का गणित: कितने वोट चाहिए?
#लोकसभा में: कुल सदस्य संख्या 543 है। संवैधानिक संशोधन बिल पास करने के लिए दो-तिहाई बहुमत (लगभग 360 वोट) जरूरी है। NDA के पास वर्तमान में 293 सीटें हैं, यानी सरकार को 67 वोट और चाहिए।
राज्यसभा में: दो-तिहाई बहुमत के लिए 163 वोट जरूरी हैं। NDA के पास करीब 142 सीटें हैं, यानी 21 वोट की कमी है।
- सरकार उम्मीद कर रही है कि महिला आरक्षण के सिद्धांत का कोई भी दल विरोध नहीं करेगा।
- इसलिए कुछ क्षेत्रीय दलों और सहयोगियों से समर्थन मिल सकता है।
- अगर विपक्ष वॉकआउट करता है तो वोटिंग सदस्यों की संख्या घट जाएगी
- और बहुमत का आंकड़ा भी कम हो सकता है।
विशेष सत्र में कौन-कौन से बिल आ रहे हैं?
सरकार तीन प्रमुख बिल ला रही है:
- संविधान (131वां संशोधन) बिल – नारी शक्ति वंदन अधिनियम में जरूरी संशोधन।
- लोकसभा सीट विस्तार बिल – लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव, जिसमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
- परिसीमन बिल – 2011 जनगणना के आधार पर सीटों का नया निर्धारण।
परिसीमन के बाद SC/ST आरक्षित सीटों में भी महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण मिलेगा। आरक्षण 15 साल के लिए होगा और रोटेशन सिस्टम पर आधारित रहेगा।
विपक्ष की आपत्ति क्या है?
- INDIA गठबंधन महिला आरक्षण का समर्थन कर रहा है, लेकिन परिसीमन और सीटें
- बढ़ाने का विरोध कर रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की बैठक में 19 विपक्षी
- दलों ने फैसला किया कि आरक्षण मौजूदा 543 सीटों में ही लागू होना चाहिए।
- विपक्ष का कहना है कि परिसीमन से दक्षिणी राज्यों की संसदीय शक्ति कम हो सकती है।
- राहुल गांधी ने इसे “राजनीतिक लाभ” का प्रयास बताया है।
- सरकार का जवाब है कि यह बिल सभी दलों के हित में है और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए जरूरी है।
सरकार की रणनीति
- सहयोगी दलों और क्षेत्रीय दलों से बातचीत
- तीन-लाइन व्हिप जारी करना
- विपक्ष को विश्वास में लेने का प्रयास
- जरूरत पड़ने पर वॉकआउट का फायदा उठाना
नारी शक्ति वंदन अधिनियम क्यों महत्वपूर्ण है?
- 2023 में पास हुआ यह बिल देश की आधी आबादी को राजनीतिक मुख्यधारा में
- लाने का सबसे बड़ा कदम है। पंचायती राज में महिलाओं की सफलता के बाद
- अब संसद और विधानसभाओं में भी महिला नेतृत्व बढ़ेगा। इससे नीतियां अधिक समावेशी और संतुलित होंगी।
16 से 18 अप्रैल 2026 का यह विशेष सत्र महिला सशक्तिकरण की दिशा में निर्णायक साबित हो सकता है। अगर बिल पास हो गया तो 2029 के चुनाव में महिलाएं बड़ी संख्या में लोकसभा पहुंचेंगी।