पूर्व रेल मंत्री : 23 फरवरी 2026 को भारतीय राजनीति को एक बड़ा झटका लगा जब पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय का निधन हो गया। 71 वर्षीय मुकुल रॉय ने कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित अपोलो अस्पताल में रात करीब 1:30 बजे अंतिम सांस ली। उनके बेटे शुभ्रांशु रॉय ने इसकी पुष्टि की और बताया कि वे लंबे समय से कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। अंतिम कारण कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) बताया जा रहा है। पिछले दो वर्षों से उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही थी, जिसमें डिमेंशिया, पार्किंसंस बीमारी और अन्य समस्याएं शामिल थीं। 2023 में ब्रेन सर्जरी और 2024 में सिर की चोट के बाद उनकी हालत और खराब हो गई थी।
मुकुल रॉय का राजनीतिक सफर: यूथ कांग्रेस से टीएमसी के चाणक्य तक
मुकुल रॉय का जन्म 17 अप्रैल 1954 को हुआ था। उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा यूथ कांग्रेस से शुरू की। बाद में ममता बनर्जी के साथ मिलकर उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे टीएमसी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और लंबे समय तक ममता बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगी और पार्टी के रणनीतिकार माने जाते थे। उन्हें बंगाल की राजनीति का ‘चाणक्य’ कहा जाता था क्योंकि वे दल-बदल और संगठन मजबूत करने में माहिर थे।

टीएमसी में प्रमुख भूमिका: 2006 में राज्यसभा सदस्य चुने गए। 2009 से 2012 तक राज्यसभा में टीएमसी के नेता रहे। 2011 में टीएमसी सत्ता में आने के बाद उन्होंने पार्टी को मजबूत करने में अहम योगदान दिया। कई सीपीएम और कांग्रेस नेताओं को टीएमसी में लाने का श्रेय उन्हें जाता है।
केंद्रीय मंत्री: यूपीए सरकार में जहाजरानी राज्यमंत्री और फिर 2012 में रेल मंत्री बने।
टीएमसी से भाजपा में शामिल होना: नवंबर 2017 में टीएमसी छोड़कर भाजपा ज्वाइन की। 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा की बंगाल में 18 सीटें जीतने में उनकी रणनीति महत्वपूर्ण रही। 2021 विधानसभा चुनाव में कृष्णनगर उत्तर सीट से भाजपा के टिकट पर जीते।
- टीएमसी में वापसी: जून 2021 में भाजपा छोड़कर टीएमसी में लौट आए।
- हालांकि, नवंबर 2025 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने दल-बदल कानून के तहत उन्हें विधायक पद से अयोग्य घोषित कर दिया।
- मुकुल रॉय का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा, लेकिन उन्होंने हमेशा
- अपनी रणनीतिक सूझबूझ से चर्चा बटोरी। टीएमसी में वे ममता बनर्जी के बाद नंबर-2 माने जाते थे।
निधन पर श्रद्धांजलि और प्रभाव
- मुकुल रॉय के निधन से बंगाल की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है।
- उनके बेटे शुभ्रांशु रॉय ने कहा, “वह कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे।
- अंतिम संस्कार कोलकाता में ही होगा, जहां उनका पार्थिव शरीर उनके निवास पर ले जाया जाएगा।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ममता बनर्जी समेत कई नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।
- ममता बनर्जी के लिए यह व्यक्तिगत नुकसान भी है, क्योंकि रॉय उनके सबसे भरोसेमंद सहयोगी रहे।
- भाजपा में भी उनकी रणनीति ने पार्टी को बंगाल में मजबूती दी।
विरासत: बंगाल की राजनीति पर छाप
मुकुल रॉय ने बंगाल की राजनीति को नई दिशा दी। दल-बदल, संगठन विस्तार और चुनावी रणनीति में उनकी भूमिका याद की जाएगी। उनका निधन न केवल टीएमसी बल्कि पूरे भारतीय राजनीतिक परिदृश्य के लिए क्षति है। 71 वर्ष की उम्र में उनका जाना राजनीतिक परिवारों के लिए सबक है कि स्वास्थ्य कितना महत्वपूर्ण है।
Read More : Back Support Belt कमर दर्द से राहत और सही पोश्चर के लिए पूरी गाइड!