प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी : परीक्षा पे चर्चा 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों के साथ दोस्ताना अंदाज में बातचीत की। इस दौरान उन्होंने अपने 75वें जन्मदिन (17 सितंबर) का एक मजेदार किस्सा सुनाया, जो जीवन जीने के मंत्र से जुड़ा है। पीएम मोदी ने कहा, “एक नेता ने मुझे मेरे जन्मदिन पर फोन किया था। उन्होंने कहा कि आपके 75 हो गए हैं। मैंने जवाब दिया कि अभी तो 25 बाकी हैं। मैं बीते हुए को गिनता नहीं हूं, जो बचा है, उसकी गिनती करता हूं।” यह बयान छात्रों को प्रेरित करने के लिए था, ताकि वे पुरानी असफलताओं या बीते समय में फंसकर न रहें, बल्कि आगे बढ़ें।
जन्मदिन किस्से का पूरा विवरण
कार्यक्रम में पूर्वोत्तर (मणिपुर के सैनिक स्कूल) से आई एक छात्रा ने पीएम मोदी से कहा कि उनका जन्मदिन भी 17 सितंबर को है और वे बचपन से उनकी प्रेरणा हैं। इस पर माहौल हल्का हुआ। पीएम मोदी ने हंसते हुए अपना किस्सा शेयर किया। उन्होंने बताया कि 17 सितंबर 2025 को एक नेता (नाम नहीं बताया) ने फोन किया और मजाक में कहा, “आपके 75 हो गए हैं।” पीएम ने तुरंत जवाब दिया, “अभी 25 बाकी हैं।” उन्होंने जोर दिया कि जीवन में बीते सालों की गिनती करने से समय बर्बाद होता है। जो समय बचा है, उसी को जीने और बेहतर बनाने पर ध्यान दो।

यह संदेश परीक्षा पे चर्चा के मुख्य थीम से जुड़ा था – परीक्षा तनाव, पढ़ाई का पैटर्न और जीवन का संतुलन। पीएम मोदी ने छात्रों को सलाह दी कि परीक्षा जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं है, बल्कि जिंदगी को संवारने का माध्यम है।
परीक्षा की कठिनाई पर पीएम मोदी की राय
- पीएम मोदी ने कहा कि अक्सर अखबारों में छपता है कि “इस बार परीक्षा बहुत कठिन थी।
- ” लेकिन पेपर सिलेबस से बाहर नहीं होता। कारण क्या है? छात्रों की शॉर्टकट पढ़ाई की आदत।
- पहले स्योर सजेशन, फिर मॉडल पेपर, और अब पिछले 10 सालों के
- पेपर ही पढ़कर परीक्षा देते हैं। अगर कुछ अलग पूछा जाए, तो कठिन लगता है।
- उन्होंने कहा कि यह बीमारी पुरानी है। कुछ टीचर भी इसे बढ़ावा देते हैं, क्योंकि क्लास का
- रिपोर्ट कार्ड अच्छा रहे। लेकिन अच्छे अध्यापक सर्वांगीण विकास की बात करते हैं
- और पूरा सिलेबस पढ़ाते हैं। पीएम ने गेंदबाज का उदाहरण दिया – अगर गेंदबाज
- सिर्फ कंधा मजबूत करे, तो क्या पूरा खिलाड़ी बनेगा? नहीं।
- इसी तरह पढ़ाई के लिए पूरा शरीर, मन और जीवन मजबूत होना चाहिए।
छात्रों को जीवन का मंत्र
पीएम मोदी ने कहा, “पढ़ाई एक माध्यम है, उसके लिए जिंदगी नहीं। अंतिम लक्ष्य संपूर्ण जीवन बेहतर बनाना है।” उन्होंने छात्रों से अपील की कि 10 सालों के पेपर पढ़ने जैसी सीमित सोच छोड़ें। भविष्य पर फोकस करें, बीते समय में समय बर्बाद न करें। उनका 75-25 वाला किस्सा इसी सोच का प्रतीक है – उम्र बढ़ने पर भी ऊर्जा और उत्साह बरकरार रखना।
- यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। लोग इसे पीएम मोदी की युवा
- सोच और देश के लिए समर्पण से जोड़ रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि “25 साल बाकी हैं
- का मतलब विकसित भारत@2047 के लक्ष्य से जुड़ा है।
प्रेरणा का संदेश
परीक्षा पे चर्चा 2026 में पीएम मोदी ने न सिर्फ परीक्षा टिप्स दिए, बल्कि जीवन जीने का सकारात्मक नजरिया भी सिखाया। उनका “अभी 25 बाकी हैं” वाला जवाब हर उम्र के लोगों के लिए मोटिवेशन है – बीते हुए को छोड़ो, बचे हुए को जीयो। अगर आप छात्र हैं या जीवन में चुनौतियां झेल रहे हैं, तो यह संदेश अपनाएं। भविष्य उज्ज्वल बनाने के लिए आज से कदम उठाएं।