विजया एकादशी 2026 : हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है, जो विजय, सफलता और शत्रुओं पर जीत का प्रतीक माना जाता है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाने वाली यह एकादशी भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम माध्यम है। पद्म पुराण और स्कंद पुराण में इसका विस्तृत वर्णन मिलता है। इस व्रत से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, पिछले जन्मों के पाप नष्ट होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो जीवन में असफलता, शत्रुता या चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
विजया एकादशी 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
2026 में विजया एकादशी 13 फरवरी, शुक्रवार को रखी जाएगी।
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 फरवरी 2026 को सुबह 11:32 बजे (या दोपहर 12:22 बजे विभिन्न पंचांगों के अनुसार)।
- एकादशी तिथि समाप्त: 13 फरवरी 2026 को दोपहर 1:30 बजे (या 2:25 बजे)।
- उदयातिथि के आधार पर व्रत: 13 फरवरी को।
- अभिजीत मुहूर्त (पूजा के लिए सबसे शुभ): दोपहर 12:13 से 12:58 बजे तक।
- पारण समय (व्रत तोड़ने का): 14 फरवरी 2026 को सुबह 7:00 से 9:14 बजे तक।
यह समय उत्तर भारत (वाराणसी सहित) के लिए लागू है। स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

विजया एकादशी की पूरी कथा – भगवान राम और लंका विजय
रामायण के अनुसार, भगवान श्रीराम वनवास के दौरान लंका पर चढ़ाई करने के लिए समुद्र तट पर पहुंचे। सामने विशाल समुद्र था, जिसमें खतरनाक जल जीव थे और पार करने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा था। श्रीराम चिंतित होकर लक्ष्मण से बोले कि समुद्र पार करने का उपाय नहीं सूझ रहा। लक्ष्मण ने सुझाव दिया कि पास ही मुनि बकदाल्भ्य का आश्रम है, जो ज्ञानी हैं। उनसे मार्गदर्शन लें।
श्रीराम मुनि के आश्रम पहुंचे और प्रणाम किया। मुनि ने श्रीराम को पहचानकर स्वागत किया। जब राम ने समस्या बताई, तो मुनि ने कहा – “फाल्गुन कृष्ण पक्ष की विजया एकादशी का व्रत रखें। भगवान विष्णु की पूजा से निश्चित रूप से विजय मिलेगी।” मुनि ने विधि बताई कि इस दिन विष्णु पूजा, जप और भोग से शत्रु पर जीत होती है।
श्रीराम ने आज्ञा मानी और व्रत रखा। व्रत के प्रभाव से वे वानर सेना के साथ समुद्र पार करने में सफल हुए (सेतु निर्माण), रावण का वध किया और माता सीता को मुक्त कराया। इस कथा से सिद्ध होता है कि विजया एकादशी का व्रत शत्रु विजय और सभी कार्यों में सफलता का सर्वश्रेष्ठ साधन है।
पूजा विधि और व्रत नियम
विजया एकादशी का व्रत सरल लेकिन विधिपूर्वक रखें:
- सुबह स्नान कर शुद्ध वस्त्र पहनें।
- घर में विष्णु जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- कलश में गंगाजल, अक्षत, चंदन, फूल रखें।
- पीले फूल, तुलसी दल, चने की दाल और मिठाई का भोग लगाएं।
- विष्णु सहस्रनाम, ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ या ‘ॐ नमो नारायणाय’ मंत्र का जप करें।
- शाम को दीपक जलाकर आरती करें और कथा सुनें।
- फलाहार या निर्जला व्रत रख सकते हैं (क्षमता अनुसार)।
- दूसरे दिन द्वादशी में पारण करें (फल, दूध आदि से)।
ध्यान रखें: नमक, अनाज, तेल आदि से परहेज करें। क्रोध, झूठ, निंदा से दूर रहें। दान-पुण्य करें।
व्रत के लाभ और महत्व
- शत्रुओं पर विजय और जीवन में सफलता।
- भय, बाधाओं और असफलता से मुक्ति।
- सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति।
- पिछले जन्मों के पाप नाश।
- भगवान विष्णु की विशेष कृपा।
यह व्रत उन लोगों के लिए विशेष है जो परीक्षा, नौकरी, मुकदमा या किसी चुनौती में जीत चाहते हैं।