भारत-यूरोपीय संघ FTA : भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे इंतजार के बाद 27 जनवरी 2026 को मुक्त व्यापार समझौता (FTA) पर मुहर लग गई है। यह समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था, खासकर वस्त्र और परिधान उद्योग के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित होने वाला है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” करार दिया है। इस FTA से भारत के वस्त्र निर्यात में भारी उछाल आने की उम्मीद है, साथ ही लाखों नई रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
वर्तमान स्थिति और चुनौतियां!
फिलहाल भारत EU को सालाना करीब 7 अरब डॉलर के वस्त्र और परिधान निर्यात करता है। लेकिन EU बाजार में भारतीय सामानों पर 12% तक का आयात शुल्क लगता है, जिससे हमारी प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ती है। वहीं, बांग्लादेश LDC (Least Developed Country) स्टेटस के कारण शून्य ड्यूटी का लाभ उठाता है। EU का कुल टेक्सटाइल बाजार 250 अरब डॉलर का है, जिसमें बांग्लादेश ने 30 अरब डॉलर का निर्यात कब्जा कर रखा है। भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 7 अरब डॉलर है।

इसके अलावा वियतनाम, तुर्की और चीन जैसे देश भी EU में मजबूत स्थिति में हैं। भारतीय निर्यातकों को उच्च टैरिफ के कारण ऑर्डर बांग्लादेश, वियतनाम और कंबोडिया की ओर शिफ्ट हो रहे थे। लेकिन अब India-EU FTA से सब बदलने वाला है!
FTA से मिलने वाले प्रमुख फायदे!
शुल्क मुक्त पहुंच: समझौते के तहत वस्त्र, परिधान, गृह सज्जा और फर्निशिंग जैसे क्षेत्रों को पहले दिन से ही शून्य ड्यूटी मिलेगी। इससे भारतीय सामान EU में सस्ता और आकर्षक बनेगा।
- निर्यात में भारी वृद्धि: पीयूष गोयल के अनुसार, वस्त्र निर्यात 7 अरब डॉलर से बढ़कर 30-40 अरब डॉलर
- तक पहुंच सकता है। उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि अपैरल निर्यात में 20-25% सालाना ग्रोथ हो सकती है
- जबकि वर्तमान ग्रोथ सिर्फ 3% के आसपास है।
- रोजगार सृजन: वस्त्र उद्योग भारत में कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगारदाता है
- जहां पहले से ही 4 करोड़ लोग कार्यरत हैं। FTA लागू होने पर 60-70 लाख (6-7 मिलियन)
- नई नौकरियां पैदा होने की संभावना है। यह खासकर ग्रामीण और महिलाओं के
- लिए बड़ा अवसर होगा, क्योंकि यह लेबर-इंटेंसिव सेक्टर है।
बांग्लादेश से बराबरी: अब भारत भी ड्यूटी के मामले में बांग्लादेश के बराबर हो जाएगा। इससे भारतीय निर्यातकों को समान प्रतिस्पर्धी मैदान मिलेगा। उद्योग संगठन जैसे AEPC और CITI का कहना है कि यह टेबल्स टर्न करेगा और भारत EU में बांग्लादेश को पीछे छोड़ सकता है।
चुनौतियां और समाधान
- FTA के बावजूद कुछ चुनौतियां हैं। EU का कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) कार्बन उत्सर्जन
- पर टैक्स लगाता है, जो सभी देशों पर लागू होता है। लेकिन समझौते में तकनीकी संवाद
- और सहयोग का प्रावधान है। भारतीय एजेंसियों को मान्यता मिलेगी, ताकि भारत में
- ही कार्बन सत्यापन हो सके। इससे निर्यातकों की लागत नियंत्रित रहेगी।
इसके अलावा, भारतीय उद्योग को क्वालिटी, सस्टेनेबिलिटी और तेज डिलीवरी पर फोकस करना होगा। लेकिन सरकार की ओर से RoDTEP, ड्यूटी ड्राबैक जैसे इंसेंटिव्स पहले से उपलब्ध हैं।
भारत के लिए सुनहरा अवसर
India-EU FTA वस्त्र उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। यह न सिर्फ निर्यात बढ़ाएगा, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करेगा। 2030 तक टेक्सटाइल निर्यात 100 अरब डॉलर का लक्ष्य हासिल करने में यह डील गेम-चेंजर साबित होगी। बांग्लादेश की ‘बादशाहत’ अब चुनौतीपूर्ण हो जाएगी, और भारतीय निर्यातक वैश्विक बाजार में मजबूत स्थिति हासिल करेंगे।