कैदी वोटिंग नियम : चुनाव आयोग (ECI) ने तमिलनाडु हाईकोर्ट को बताया है कि अब जेल में बंद कैदी SIR फॉर्म (स्पेशल इंटीमेशन रजिस्ट्रेशन फॉर्म) अपने रिश्तेदारों के माध्यम से भी जमा करा सकते हैं। यह फैसला उन कैदियों के लिए राहत लेकर आया है, जिन्हें वोट देने का अधिकार है लेकिन जेल में होने के कारण वे खुद चुनाव कार्यालय नहीं जा पाते। इस खबर से तमिलनाडु की जेलों में बंद हजारों कैदियों को वोट देने का रास्ता आसान हो गया है।
मामला क्या है?
तमिलनाडु हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई थी, जिसमें मांग की गई थी कि जेल में बंद कैदियों को वोटर लिस्ट में शामिल करने और SIR फॉर्म भरने की सुविधा दी जाए। याचिकाकर्ता ने बताया कि जेलों में बंद कई कैदी ऐसे हैं

चुनाव आयोग ने हाईकोर्ट को लिखित हलफनामा दाखिल कर बताया:
- जेल में बंद कैदियों को SIR फॉर्म भरने और जमा करने की पूरी छूट है।
- अगर कैदी खुद फॉर्म नहीं भर पाता, तो उसके रिश्तेदार या अधिकृत व्यक्ति जेल प्रशासन की मदद से फॉर्म जमा कर सकते हैं।
- जेल प्रशासन को कैदियों के नाम, पता और अन्य डिटेल्स चुनाव आयोग को उपलब्ध कराने होंगे।
- ECI ने कहा कि यह व्यवस्था 2025 के लोकसभा चुनावों से पहले लागू हो जाएगी।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने ECI के इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत हर वयस्क नागरिक को वोट देने का अधिकार सुनिश्चित करता है। कोर्ट ने कहा कि जेल में होने का मतलब वोट का अधिकार छिनना नहीं है। अब तमिलनाडु में लगभग 20,000 अंडरट्रायल और कुछ दोषी कैदी (जिन्हें वोट का अधिकार है) इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।
कैदियों के वोटिंग अधिकार का कानूनी आधार
- भारत में केवल दोषसिद्ध कैदियों (जिनकी सजा 2 साल से ज्यादा हो) को वोट देने का अधिकार नहीं है।
- अंडरट्रायल कैदियों, सजा काट रहे कैदियों (2 साल से कम सजा) और 2 साल की सजा काट चुके कैदियों को वोट का पूरा अधिकार है।
- लेकिन पहले जेल में रहने के कारण ये लोग SIR फॉर्म नहीं भर पाते थे। नया नियम इस समस्या का समाधान है।
अन्य राज्यों में भी शुरू हो सकती है व्यवस्था
- तमिलनाडु हाईकोर्ट का यह फैसला अन्य राज्यों के लिए भी मिसाल बन सकता है।
- कई राज्य जैसे दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और बिहार में भी कैदियों के वोटिंग अधिकार पर याचिकाएं लंबित हैं।
- चुनाव आयोग ने कहा है कि वह पूरे देश में एक समान नीति लागू करने पर विचार कर रहा है।
कैदियों के लिए यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण?
- यह लोकतंत्र की मजबूती का संकेत है।
- जेल में बंद लोग भी देश की नीतियों और सरकार चुनने में भागीदारी कर सकेंगे।
- यह मानवाधिकार और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करता है।
तमिलनाडु में कैदियों की संख्या (2025 तक)
- कुल कैदी: लगभग 45,000
- अंडरट्रायल: 35,000 से ज्यादा
- वोट देने के योग्य: करीब 25,000-30,000
अब ये सभी कैदी अपने रिश्तेदारों के जरिए SIR फॉर्म भरकर वोटर लिस्ट में नाम जुड़वा सकेंगे।
चुनाव आयोग का यह फैसला एक ऐतिहासिक कदम है। इससे जेल में बंद हजारों नागरिकों को लोकतंत्र में अपनी आवाज उठाने का मौका मिलेगा। तमिलनाडु हाईकोर्ट ने भी इस व्यवस्था को लागू करने के लिए ECI को समयसीमा तय करने को कहा है। अब उम्मीद है कि आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में कैदियों के वोट भी गिने जाएंगे।