40+ उम्र में AI : आज के कॉर्पोरेट जगत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन की वजह से छंटनियां आम हो गई हैं। लेकिन सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं 40+ उम्र के प्रोफेशनल्स, जिन्हें कभी करियर का सुनहरा दौर माना जाता था। लंबा अनुभव अच्छी सैलरी और परिवार की जिम्मेदारियां – सब कुछ एक झटके में उलट-पुलट हो जाता है। हाल ही में कई प्रोफेशनल्स ने अपनी कहानियां साझा की हैं, जो बताती हैं कि 40 की उम्र अब नई “रिटायरमेंट उम्र” बनती जा रही है। आइए जानते हैं इनकी आपबीती भावनात्मक प्रभाव, कारण और क्या सबक मिलता है।
AI छंटनी क्यों 40+ को टारगेट कर रही है?
कंपनियां लागत कम करने के लिए AI का सहारा ले रही हैं। एक मैनेजर की 1 लाख रुपये सैलरी के बदले 4 युवा 25-25 हजार में रख लिए जाते हैं – इसे “पे-रोल कोलेस्ट्रॉल” कहा जा रहा है। अनुभव अब संपत्ति नहीं, बोझ बन गया है। अक्टूबर 2025 तक 200+ कंपनियों में 1 लाख से ज्यादा टेक जॉब्स गईं। बड़ी कंपनियां जैसे माइक्रोसॉफ्ट, मेटा, अमेज़न, ओरेकल, सेल्सफोर्स, आईबीएम, एक्सेंचर आदि में यह ट्रेंड दिखा। भारत में भी आईटी, मीडिया, पीआर जैसे सेक्टर प्रभावित हैं।

प्रोफेशनल्स की असली कहानियां!
अभिषेक (42 वर्ष, आईटी इंजीनियर, डायरेक्टर लेवल) अभिषेक ने सोचा था कि सालों का अनुभव सुरक्षा कवच बनेगा। लेकिन कंपनी ने कहा, “रीशेप हो रही है।” प्रदर्शन खराब नहीं था, बस इकोनॉमिक्स। उन्होंने कहा, “42 की उम्र में लगा कि इंडस्ट्री में बिताए साल सुरक्षा देंगे। बाद में समझ आया कि यह निकालने का विनम्र तरीका है। छंटनी क्षमता से नहीं, इकोनॉमिक्स से हुई।
47 वर्षीय पीआर और कम्युनिकेशन मैनेजर पीआर में नैरेटिव की ताकत सिखाते थे, लेकिन उम्र का नैरेटिव क्रूर निकला। दशकों तक टीम, ब्रांड और संकट संभालने के बाद उन्हें “बदलाव विरोधी” कह दिया गया। “कंपनियां स्ट्रेटेजी में परिपक्वता चाहती हैं, कर्मचारियों में नहीं।”
श्रुति (बदला हुआ नाम, सीनियर असिस्टेंट एडिटर, दिल्ली-एनसीआर मीडिया हाउस) 15 साल का अनुभव, लेकिन दिवाली के बाद इस्तीफा देने को कहा गया। कंपनी युवा ग्रेजुएट्स में निवेश करना चाहती थी। “सीनियर कर्मचारी आइडिया आउटपुट नहीं दे पा रहे, सैलरी जायज नहीं ठहरा पा रहे।” सेवरेंस ऑफर हुआ, लेकिन उसी दिन इस्तीफा। “15 साल जिंदगी उसी नौकरी के इर्द-गिर्द बनी, बिना योजना के बाहर निकली। कई दिन लगता है 40+ अब नई रिटायरमेंट उम्र है।”
भावनात्मक और फाइनेंशियल प्रभाव
40+ में नौकरी जाना सिर्फ आमदनी का नुकसान नहीं:
- स्कूल फीस, होम लोन, मेडिकल, बुजुर्ग माता-पिता का खर्च – सब टालने लायक नहीं।
- करियर में प्रयोग या दिशा बदलने की आजादी खत्म।
- वफादारी रातोंरात खत्म, भ्रम टूटता है।
- बचत सूख रही, मेंटल हेल्थ पर असर।
क्या करें? सबक और सलाह
- स्किल अपग्रेड: AI, नई टेक्नोलॉजी सीखें – यह सहयोगी बन सकती है।
- फाइनेंशियल प्लानिंग: ज्यादा बचत, इमरजेंसी फंड।
- लचीलापन: एंटरप्रेन्योरशिप या फ्रीलांसिंग सोचें।
- मेंटल स्ट्रेंथ: नेटवर्किंग बढ़ाएं, नई शुरुआत की हिम्मत रखें।
AI क्रांति रुकने वाली नहीं, लेकिन तैयारी से इसे मौका बनाया जा सकता है। 40+ प्रोफेशनल्स की ये कहानियां चेतावनी हैं – अनुभव को अपडेट रखें, वरना बोझ बन सकता है।