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रोशन आनंद सर ने भरत तिवारी का किया समर्थन बोले पुलिस बन गई शिकारी, सिस्टम से हार गए हम!

On: June 24, 2026 10:31 AM
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रोशन आनंद सर बिहार के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में अब सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षक रोशन आनंद सर की एंट्री ने विवाद को और गर्मा दिया है। रोशन आनंद ने भरत तिवारी के परिवार से मुलाकात कर उन्हें समर्थन दिया और पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस पुलिस का काम जनता की सुरक्षा करना है, वही अगर शिकारी बन जाए तो आम लोगों का सिस्टम पर भरोसा कमजोर हो जाता है।

रोशन आनंद सर
रोशन आनंद सर भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में रोशन आनंद सर ने परिवार से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच की मांग की।

क्या है भरत तिवारी एनकाउंटर मामला?

भोजपुर जिले के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की 17 जून को पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी। पुलिस का दावा है कि भरत तिवारी ने पुलिस पर फायरिंग की थी और जवाबी कार्रवाई में वह घायल हुआ। बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। दूसरी ओर परिवार और ग्रामीणों का आरोप है कि भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उसे गोली मारी गई। इसी विवाद के कारण मामले ने पूरे बिहार में राजनीतिक और सामाजिक बहस छेड़ दी है।

रोशन आनंद सर ने क्या कहा?

  • भरत तिवारी के समर्थन में सामने आए रोशन आनंद सर ने कहा कि यह केवल एक
  • व्यक्ति की मौत का मामला नहीं है, बल्कि न्याय और व्यवस्था पर उठते सवालों का मुद्दा है।
  • उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी व्यक्ति ने आत्मसमर्पण कर दिया था तो उसके बाद बल प्रयोग क्यों किया गया?
  • रोशन आनंद ने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि उस दिन वास्तव में क्या हुआ था।
  • उन्होंने स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि सच्चाई सामने आनी चाहिए
  • ताकि लोगों का कानून और संविधान पर विश्वास बना रहे।

“पुलिस बन गई शिकारी”

रोशन आनंद का सबसे चर्चित बयान तब सामने आया जब उन्होंने कहा कि “रक्षक ही भक्षक बन जाए तो समाज के लिए यह गंभीर चिंता का विषय है।” उनका कहना था कि पुलिस को कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई करनी चाहिए और किसी भी विवादित घटना की पारदर्शी जांच होनी चाहिए।

  • उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। कुछ लोगों ने उनके बयान
  • का समर्थन किया, जबकि कुछ लोगों ने पुलिस के पक्ष में तर्क दिए
  • कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने पड़ते हैं।

सिस्टम पर उठाए सवाल

  • रोशन आनंद ने कहा कि आम नागरिकों का विश्वास लोकतांत्रिक संस्थाओं पर बना रहना चाहिए।
  • उन्होंने कहा कि यदि किसी घटना को लेकर लोगों के मन में सवाल हैं
  • तो सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि उन सवालों का जवाब दिया जाए।
  • उन्होंने यह भी कहा कि न्यायिक जांच ही इस मामले की सच्चाई सामने ला सकती है।
  • उनके अनुसार जांच निष्पक्ष होगी तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि पुलिस कार्रवाई कानून के अनुसार हुई थी या नहीं।

बिहार सरकार ने दिए जांच के आदेश

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर बढ़ते विवाद के बाद बिहार सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। राज्य सरकार का कहना है कि घटना के हर पहलू की निष्पक्ष जांच की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने भी स्पष्ट किया है कि जांच का उद्देश्य सच्चाई को सामने लाना और जनता के विश्वास को बनाए रखना है। इसी कारण मामले की जांच एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में कराए जाने का निर्णय लिया गया है।

सोशल मीडिया पर बढ़ा समर्थन

  • भरत तिवारी की मौत के बाद सोशल मीडिया पर कई अभियान चलाए गए।
  • कुछ लोगों ने उन्हें सामाजिक मुद्दों को उठाने वाला युवा बताया, जबकि अन्य
  • लोगों ने उनके खिलाफ मौजूद पुलिस रिकॉर्ड और विवादित बयानों का हवाला दिया।
  • रोशन आनंद सर के समर्थन के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है।
  • कई युवाओं और छात्रों ने भी सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

राजनीतिक माहौल भी हुआ गर्म

इस मामले में कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। विपक्षी दलों ने इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए सरकार से जवाब मांगा है, जबकि प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

  • राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल कानून-व्यवस्था का नहीं
  • बल्कि जनविश्वास और जवाबदेही का भी मुद्दा बन चुका है।

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में रोशन आनंद सर का समर्थन सामने आने के बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई और सिस्टम पर गंभीर सवाल उठाए हैं तथा निष्पक्ष जांच की मांग की है।

अब सभी की नजर न्यायिक जांच पर टिकी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि उस दिन वास्तव में क्या हुआ था और किस पक्ष के दावों में कितनी सच्चाई है। तब तक यह मामला बिहार की राजनीति और सामाजिक बहस का महत्वपूर्ण विषय बना रहेगा।

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