सोनम वांगचुक दिल्ली पुलिस प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे उनके अनशन के दौरान शुक्रवार देर रात ऐसा घटनाक्रम हुआ, जिसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी।
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि दिल्ली पुलिस ने पहले “मॉक ड्रिल” का हवाला दिया और फिर महज 30 सेकंड के भीतर सोनम वांगचुक को वहां से हटाकर अस्पताल पहुंचा दिया। इस कार्रवाई का वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?
सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। उनका आंदोलन परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं और जवाबदेही की मांग से जुड़ा हुआ था। लगातार अनशन के कारण उनकी स्वास्थ्य स्थिति कमजोर होती जा रही थी।
शुक्रवार रात प्रदर्शनकारियों के अनुसार पुलिस ने पहले क्षेत्र में मॉक ड्रिल होने की बात कही और कुछ ही क्षणों बाद वांगचुक को एंबुलेंस तक ले जाकर अस्पताल पहुंचा दिया। पूरे घटनाक्रम को लगभग 30 सेकंड में अंजाम दिए जाने का दावा किया गया।
सोनम वांगचुक दिल्ली पुलिस ने क्या कहा?
- दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को अलग तरीके से पेश किया है।
- पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए की गई।
- नई दिल्ली जिला पुलिस के अनुसार सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ रही थी।
- मेडिकल विशेषज्ञों की सलाह और अदालत के निर्देशों के मद्देनजर उन्हें
- तत्काल अस्पताल ले जाना आवश्यक था। पुलिस ने यह भी कहा कि कार्रवाई के
- दौरान न तो लाठीचार्ज किया गया और न ही किसी प्रकार का बल प्रयोग किया गया।
अस्पताल क्यों ले जाया गया?
अधिकारियों के मुताबिक लंबे समय तक भूख हड़ताल जारी रहने के कारण उनकी शारीरिक स्थिति गंभीर होती जा रही थी। स्वास्थ्य संबंधी जोखिम को देखते हुए उन्हें VMMC एवं सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया ताकि समय रहते चिकित्सा उपलब्ध कराई जा सके।
प्रदर्शनकारियों का आरोप
- दूसरी ओर आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि यदि स्वास्थ्य ही चिंता का विषय था
- तो पहले बातचीत की जा सकती थी।
- कुछ प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि पुलिस ने अचानक कार्रवाई की
- जिससे वहां मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
- आंदोलन से जुड़े नेताओं ने इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन में प्रशासनिक हस्तक्षेप बताया।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
घटना के बाद सोशल मीडिया पर #SonamWangchuk और #JantarMantar जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कई लोगों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि कुछ लोगों का कहना था कि यदि किसी अनशनकारी की जान को खतरा हो तो प्रशासन का हस्तक्षेप आवश्यक हो जाता है।
इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं।
आगे क्या हो सकता है?
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद भी आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। उनके समर्थकों ने संकेत दिया है कि आंदोलन जारी रहेगा और सरकार से अपनी मांगों पर स्पष्ट जवाब मिलने तक विरोध जारी रखा जाएगा।
- उधर प्रशासन का कहना है कि प्राथमिकता वांगचुक की जान बचाना और उन्हें
- आवश्यक चिकित्सा उपलब्ध कराना था। आने वाले दिनों में यह मामला
- राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना रह सकता है।
सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर प्रदर्शनकारी इसे अचानक और अनुचित कार्रवाई बता रहे हैं, वहीं दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह कदम केवल स्वास्थ्य सुरक्षा और चिकित्सा आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर उठाया गया।
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