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सकट चौथ 2026 व्रत तिथि, पूजा विधि, शुभ कथा और महत्व!

On: January 6, 2026 5:22 AM
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सकट चौथ 2026 : सकट चौथ, जिसे संकष्टी चतुर्थी, तिल चौथ या माघी चतुर्थी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है। यह व्रत मुख्य रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और सभी संकटों से रक्षा के लिए रखती हैं। वर्ष 2026 में सकट चौथ का व्रत 6 जनवरी 2026, मंगलवार को रखा जाएगा। इस दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है, क्योंकि वे विघ्नहर्ता और संकट नाशक माने जाते हैं। इस व्रत से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और परिवार में खुशहाली आती है।

सकट चौथ 2026 की तिथि और मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 6 जनवरी 2026 को सुबह 8:01 बजे शुरू होकर 7 जनवरी को सुबह 6:52 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार व्रत 6 जनवरी को ही मनाया जाएगा। इस दिन चंद्रोदय का समय रात 8:54 बजे रहेगा। व्रत का पारण चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद किया जाता है। यह दिन मंगलवार को पड़ रहा है, इसलिए इसे अंगारकी चतुर्थी भी कहा जा रहा है, जो अत्यंत शुभ मानी जाती है।

सकट चौथ 2026
सकट चौथ 2026

सकट चौथ का महत्व

#सकट चौथ का व्रत भगवान गणेश को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन गणेश जी पर बड़ा संकट आया था, लेकिन वह टल गया, इसलिए इस तिथि को सकट चौथ कहा जाता है। माताएं इस व्रत से संतान की रक्षा, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करती हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि सकट चौथ का व्रत रखने से जीवन के सभी विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं, परिवार में सुख-शांति आती है और भगवान गणेश की कृपा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह व्रत निर्जला या फलाहार से रखा जाता है और चंद्र दर्शन के बाद समाप्त होता है।

सकट चौथ पूजा विधि

  • #सकट चौथ की पूजा शाम को चंद्रोदय से पहले या बाद में की जाती है।
  • पूजा की सरल विधि इस प्रकार है:
  1. सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें।
  2. लकड़ी की चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
  3. गणेश जी को रोली, चंदन, अक्षत, कुमकुम, फूल, दूर्वा (21 गांठ वाली), धूप-दीप अर्पित करें।
  4. तिल के लड्डू, गुड़, मोदक या अन्य भोग लगाएं। तिल का विशेष महत्व है।
  5. गणेश मंत्र “ॐ गं गणपतये नमः” का जाप करें और गणेश अथर्वशीर्ष या स्तोत्र का पाठ करें।
  6. सकट चौथ की शुभ कथा पढ़ें या सुनें।
  7. शाम को चंद्रोदय के समय चंद्रमा को दूध मिश्रित जल से अर्घ्य दें।
  8. आरती करें और प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोलें।

पूजा सामग्री: गणेश प्रतिमा, दूर्वा, तिल-गुड़ के लड्डू, फल, फूल, धूप, दीप, जनेऊ, सुपारी, पान का पत्ता, गंगाजल आदि।

सकट चौथ की शुभ कथा

सकट चौथ की मुख्य कथा भगवान गणेश से जुड़ी है। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता पार्वती स्नान करने जा रही थीं। उन्होंने बाल गणेश को द्वार पर पहरा देने को कहा कि कोई भी अंदर न आए। उसी समय भगवान शिव आए और गणेश जी ने उन्हें भी रोक दिया। क्रोधित होकर शिव जी ने त्रिशूल से गणेश जी का सिर काट दिया।

  • माता पार्वती यह देखकर व्याकुल हो गईं और शिव जी से प्रार्थना की। दुखी होकर शिव जी
  • ने एक हाथी के बच्चे का सिर लगाकर गणेश जी को जीवित किया। तभी से गणेश जी
  • हाथी मुख वाले देवता बने। इस घटना की स्मृति में सकट चौथ का व्रत रखा जाता है
  • ताकि संतान पर कोई संकट न आए।

एक अन्य लोकप्रिय कथा कुम्हार की है: प्राचीन समय में एक कुम्हार के बर्तन भट्टी में नहीं पकते थे। पुजारी ने सलाह दी कि बालक की बलि दें। कुम्हार ने कई बालकों की बलि दी, लेकिन एक वृद्धा का पुत्र सकट माता का भक्त था। उसने दूब और सुपारी लेकर भट्टी में प्रवेश किया और सकट माता की प्रार्थना की। माता की कृपा से वह सुरक्षित बच गया और अन्य बालक भी जीवित हो गए। तब से सकट चौथ का महत्व बढ़ गया।

एक और कथा साहूकारनी की है: एक साहूकारनी को संतान नहीं थी। पड़ोसन से सकट चौथ व्रत के बारे में पता चला। उसने व्रत रखा और पुत्र प्राप्ति हुई। इस व्रत से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

सकट चौथ के लाभ

इस व्रत से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और संतान को सभी संकटों से बचाते हैं। जीवन में बाधाएं दूर होती हैं, धन-समृद्धि आती है और परिवार सुखी रहता है। महिलाएं विशेष रूप से यह व्रत रखकर पुत्र की लंबी उम्र की कामना करती हैं।

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