विकास कुमार : उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के गणकोट गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। 24 वर्षीय लांस नायक विकास कुमार सिक्किम में ड्यूटी के दौरान हिमस्खलन की चपेट में आकर शहीद हो गए। उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा आज अपने पैतृक गांव पहुंच रहा है—ठीक बेटे पृथ्विक के पहले जन्मदिन से पहले। एक तरफ जहां पूरा देश वीर सैनिक को श्रद्धांजलि दे रहा है, वहीं परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
विकास कुमार कौन थे?
#विकास कुमार पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय से मात्र 5 किलोमीटर दूर गणकोट गांव के निवासी थे। वे 19 कुमाऊं रेजिमेंट में लांस नायक के पद पर तैनात थे। वर्ष 2017-18 में भारतीय सेना में भर्ती हुए विकास 2023 में प्रीति से विवाहित हुए। उनकी शादी के कुछ समय बाद ही छोटे से परिवार में खुशी का पल आया जब उनका बेटा पृथ्विक का जन्म हुआ।

पृथ्विक अभी दस महीने का भी नहीं हुआ है। उसका पहला जन्मदिन 4 जून 2026 को है। विकास अपने बेटे के इस खास मौके पर घर आना चाहते थे। उन्होंने परिवार को बताया था कि अप्रैल के आखिरी सप्ताह में छुट्टी लेकर घर लौटेंगे और पूरे परिवार के साथ पृथ्विक का पहला जन्मदिन धूमधाम से मनाएंगे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
विकास कुमार सिक्किम हिमस्खलन में कैसे हुई शहादत?
- 29 मार्च 2026 को लांस नायक विकास कुमार अपने दो साथियों के साथ सिक्किम के सीमा
- क्षेत्र में नियमित गश्त पर थे। अचानक भारी बर्फीला तूफान आया और हिमस्खलन
- (avalanche) ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। विकास कुमार वीरगति को प्राप्त हो गए।
- बताया जाता है कि उनका पार्थिव शरीर दो दिन तक बर्फ में दबा रहा।
- बाद में सेना की टीम ने इसे निकाला और सैन्य सम्मान के साथ वापस भेजा।
मंगलवार शाम को सेना की ओर से शहादत की सूचना परिवार को दी गई, लेकिन माता-पिता और पत्नी को शुरुआत में पूरी जानकारी नहीं दी गई। बुधवार को जब असली खबर पहुंची तो पूरे परिवार में मातम छा गया। विकास की मां मंजू देवी स्थानीय स्कूल में भोजन माता के रूप में कार्यरत हैं। उनका चचेरे भाई नीरज कुमार दिल्ली में होटल क्षेत्र में काम करते हैं और शहादत की खबर सुनते ही घर लौट आए हैं।
परिवार की पीड़ा और बेटे पृथ्विक की मासूमियत
- घर के आंगन में पृथ्विक अभी तोतली भाषा में “पापा” कहने की कोशिश कर रहा है।
- उसे अभी यह नहीं पता कि उसके पिता अब कभी वापस नहीं आएंगे।
- विकास कुमार बेटे के पहले जन्मदिन पर घर आने का सपना देख रहे थे
- लेकिन अब पृथ्विक को अपना हर जन्मदिन पिता के बिना ही मनाना होगा।
चचेरे भाई नीरज कुमार ने बताया, “विकास बेटे के जन्मदिन पर घर आने की बात कर रहे थे। हम सब मिलकर खुशियां मनाने वाले थे, लेकिन…” उनकी बात अधूरी रह जाती है और आंखें नम हो जाती हैं।
पूरे गणकोट गांव और आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर है। लोग एक-दूसरे को सांत्वना दे रहे हैं और वीर सैनिक की शहादत को याद कर गर्व महसूस कर रहे हैं।
पूर्व सैनिकों का शोक संदेश
- स्थानीय पूर्व सैनिक संगठन ने भी विकास कुमार के बलिदान पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
- उन्होंने कहा कि विकास ने सर्वोच्च बलिदान देकर पूरे क्षेत्र का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
- भारतीय सेना के ऐसे जवान ही देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं
- और हमेशा तैयार रहते हैं कि जरूरत पड़ने पर अपना सर्वस्व न्योछावर कर दें।
राष्ट्र को नमन
- लांस नायक विकास कुमार की शहादत देश के लिए एक बड़ी क्षति है
- लेकिन उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। पूरा देश उनके परिवार के साथ खड़ा है।
- हम सभी को इन वीर सपूतों का सम्मान करना चाहिए
- जो चुपचाप सीमा पर तैनात रहकर हमारी नींद की रक्षा करते हैं।