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यूनुस की विदाई का असर! बांग्लादेश-भारत रिश्तों में नई गर्माहट, तारिक सरकार का बड़ा दांव

On: February 20, 2026 12:21 PM
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Bangladesh India Relations

परिचय: एक नए युग की शुरुआत

बांग्लादेश की राजनीति में हालिया बदलाव ने पूरे दक्षिण एशिया का ध्यान खींचा है। नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस ने फरवरी 2026 में अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार पद से इस्तीफा दे दिया। यह इस्तीफा लगभग 18 महीने के कार्यकाल के बाद आया, जब शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद यूनुस ने देश की बागडोर संभाली थी। उनकी विदाई के साथ ही तारिक रहमान की अगुवाई वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की नई निर्वाचित सरकार ने सत्ता संभाल ली।

  • यूनुस के कार्यकाल में भारत-बांग्लादेश संबंधों में काफी तनाव देखा गया।
  • अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, सीमा मुद्दे और विदेश नीति में असहमति ने रिश्तों को ठंडा कर दिया था।
  • लेकिन यूनुस की विदाई के बाद स्थिति तेजी से बदल रही है।
  • नई सरकार के आने से दोनों देशों के बीच नई गर्माहट की उम्मीद जगी है।
  • तारिक रहमान की सरकार ने शुरुआती दिनों में ही ऐसे कदम उठाए हैं,
  • जो द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का संकेत दे रहे हैं।

यूनुस के कार्यकाल में भारत के साथ तनाव के कारण

यूनुस की अंतरिम सरकार के दौरान भारत के साथ संबंधों में गिरावट आई। कई बार यूनुस ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (सेवन सिस्टर्स) का जिक्र ऐसे तरीके से किया, जिसे भारत में उकसावे वाला माना गया। अपने विदाई भाषण में भी उन्होंने नेपाल, भूटान और भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र को एक साथ जोड़कर क्षेत्रीय सहयोग की बात की, लेकिन भारत का नाम लिए बिना। इससे भारत में चिंता बढ़ी कि बांग्लादेश अपनी विदेश नीति में चीन या अन्य ताकतों के साथ संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

  • इस दौरान अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमलों की घटनाओं पर भारत ने चिंता जताई।
  • वीजा सेवाएं प्रभावित हुईं, व्यापारिक सहयोग में कमी आई और कूटनीतिक स्तर पर ठंडक छा गई।
  • यूनुस की सरकार को भारत-विरोधी रुख अपनाने का आरोप लगा,
  • जिससे दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी बढ़ी।

तारिक रहमान की सरकार: नई शुरुआत और बड़ा दांव

Bangladesh India Relations #तारिक रहमान, जो बीएनपी के प्रमुख हैं और शेख हसीना के पतन के बाद सत्ता में आए, ने साफ संकेत दिए हैं कि वे भारत के साथ मजबूत और व्यावहारिक संबंध चाहते हैं। फरवरी 2026 में सत्ता संभालते ही उनकी सरकार ने कई सकारात्मक कदम उठाए। सबसे बड़ा दांव था वीजा सेवाओं की बहाली। यूनुस के समय रुकी भारतीय वीजा सेवाएं अब पूरी तरह बहाल हो गई हैं। भारतीय राजनयिकों ने इसे संबंधों में सुधार का संकेत बताया है।

  • तारिक सरकार ने “बांग्लादेश फर्स्ट” नीति अपनाई है,
  • लेकिन इसका मतलब भारत से दुश्मनी नहीं है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि बीएनपी की सरकार आर्थिक विकास,
  • व्यापार और कनेक्टिविटी पर फोकस करेगी।
  • भारत बांग्लादेश के लिए सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
  • नई सरकार ने क्रिकेट जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बहाल करने की बात की है।
  • तारिक रहमान ने भारत के साथ “आपसी सम्मान और राष्ट्र हित” पर आधारित रिश्ते बनाने की इच्छा जताई है।

यह बड़ा दांव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले 18 महीनों में यूनुस की नीतियों से जो नुकसान हुआ, उसे ठीक करना आसान नहीं। लेकिन तारिक सरकार की शुरुआती हरकतें—जैसे वीजा बहाली, कूटनीतिक बातचीत और क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर—दिखाती हैं कि वे पुराने तनाव को पीछे छोड़ना चाहते हैं।

संबंधों में नई गर्माहट के संकेत

  • वीजा और यात्रा सुविधाएं: भारत ने बांग्लादेश में सभी वीजा सेवाएं बहाल कर दीं, जो यूनुस काल में बंद थीं।
  • कूटनीतिक संपर्क: दोनों पक्षों से उच्च स्तर पर बातचीत शुरू हुई।
  • भारत ने तारिक रहमान को बधाई दी और सहयोग की इच्छा जताई।
  • आर्थिक सहयोग: व्यापार, ऊर्जा और कनेक्टिविटी परियोजनाओं को नई गति मिल सकती है। भारत का पूर्वोत्तर विकास बांग्लादेश के साथ जुड़ा है।
  • क्षेत्रीय स्थिरता: दोनों देश आतंकवाद, सीमा प्रबंधन और जल बंटवारे जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ा सकते हैं।

Bangladesh India Relations विश्लेषकों का कहना है कि यह रीसेट आसान नहीं होगा, लेकिन यूनुस की विदाई ने रास्ता साफ किया है। तारिक सरकार अगर पुरानी गलतियों से सबक ले और व्यावहारिक रुख अपनाए, तो दोनों देशों के रिश्ते पहले से मजबूत हो सकते हैं।

निष्कर्ष

मोहम्मद यूनुस की विदाई बांग्लादेश के लिए एक अध्याय का अंत थी, लेकिन भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए नई शुरुआत। तारिक रहमान की सरकार का बड़ा दांव—संबंधों को सामान्य करने और मजबूत बनाने का—क्षेत्रीय शांति और विकास के लिए सकारात्मक है। दोनों देशों को आपसी विश्वास, सम्मान और आर्थिक हितों पर फोकस करना होगा। अगर यह सिलसिला जारी रहा, तो दक्षिण एशिया में एक नई गर्माहट देखने को मिल सकती है। भविष्य में सहयोग बढ़ेगा, तनाव कम होगा और दोनों पड़ोसी मजबूत साझेदार बनेंगे।

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