मकर संक्रांति 2026 : (14 जनवरी 2026) पर सूर्य देव उत्तरायण में प्रवेश करेंगे, जो हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन सूर्य देव को अर्घ्य (जल चढ़ाना) देने से जीवन में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य, वंश वृद्धि और विशेष रूप से सामाजिक सम्मान व मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है। जागरण के अनुसार, सूर्य देव को जल चढ़ाते समय कुछ सिद्ध मंत्रों का जप करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है और समाज में यश, सम्मान तथा पद-प्रतिष्ठा बढ़ती है। आइए जानें इन शक्तिशाली मंत्रों की पूरी जानकारी, अर्थ और जप विधि।
सूर्य अर्घ्य क्यों महत्वपूर्ण है?
सूर्य देव ग्रहों के राजा हैं और जीवन ऊर्जा (प्राण) के स्रोत हैं। नियमित अर्घ्य से आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, स्वास्थ्य और सामाजिक स्थिति मजबूत होती है। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान, दान, पूजा और इन मंत्रों का जप विशेष फलदायी होता है। विधि: तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, चंदन, रोली मिलाकर सूर्योदय के समय पूर्व दिशा में खड़े होकर अर्घ्य दें और मंत्र जपें।

शक्तिशाली सूर्य मंत्र (Vedic Sun Mantras for Prestige & Respect)
यहां जागरण में उल्लिखित प्रमुख मंत्र दिए जा रहे हैं, जिन्हें अर्घ्य के समय जपने से समाज में मान-सम्मान बढ़ता है:
जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम ।तमोऽरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम् ॥ अर्थ: जपाकुसुम जैसे लाल रंग वाले, कश्यप पुत्र, महान तेज वाले, अंधकार के शत्रु, सभी पापों का नाश करने वाले दिवाकर को मैं प्रणाम करता हूं। (यह मंत्र पाप नाश और तेज वृद्धि के लिए सर्वोत्तम है।)
- ॐ आकृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यं च ।हिरण्ययेन सविता रथेन देवो याति भुवनानि
- पश्यन् ॥ अर्थ: काले रंग के साथ वर्तमान सविता अमृत और मृत्यु दोनों को नियंत्रित करते हुए
- सुनहरे रथ पर देवता भुवनों को देखते हुए जाते हैं। (यह ऋग्वेद से है, ऊर्जा और प्रकाश प्रदान करता है।)
ॐ आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्न: सूर्य: प्रचोदयात् ॥ अर्थ: हम आदित्य को जानें, दिवाकर पर ध्यान करें, सूर्य हमें प्रेरित करें। (सूर्य गायत्री मंत्र – बुद्धि, ज्ञान और सम्मान बढ़ाने वाला क्लासिक मंत्र।)
- ग्रहाणामादिरादित्यो लोक लक्षण कारक: ।विषम स्थान संभूतां पीड़ां दहतु मे रवि ॥
- अर्थ: ग्रहों का आदि आदित्य लोक के लक्षणों का कारक है, मेरी पीड़ाओं को रवि भस्म करें।
- (ग्रह दोष नाश और सामाजिक पीड़ा से मुक्ति।)
ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजो राशे जगत्पते,अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घ्य दिवाकर: ॥ अर्थ: हे हजार किरणों वाले सूर्य, तेज के राशि जगत के पति, भक्ति से मुझे दया करो और अर्घ्य ग्रहण करो। (अर्घ्य के लिए विशेष मंत्र।)
सूर्याष्टकम – पूर्ण स्तुति
सूर्याष्टकम का पाठ अर्घ्य के बाद करने से अतिरिक्त लाभ मिलता है। इसमें 8 श्लोक हैं, जैसे:
- आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर । दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते ॥
- (और आगे के श्लोक सूर्य की महिमा गाते हैं – महापापहर, जगत्कर्ता आदि।)
अतिरिक्त टिप्स सामाजिक सम्मान बढ़ाने के लिए
- रोज सुबह सूर्योदय पर 11, 21 या 108 बार इन मंत्रों का जप करें।
- लाल वस्त्र पहनें, लाल चंदन का तिलक लगाएं।
- मकर संक्रांति पर तिल, गुड़, खिचड़ी का दान करें।
- नियमित जप से पिता का आशीर्वाद, सरकारी कामों में सफलता और समाज में यश प्राप्त होता है।
- महिलाएं और पुरुष दोनों कर सकते हैं – विशेषकर करियर, बिजनेस या सोशल स्टेटस बढ़ाने के इच्छुक लोग।