भारत UNSC पाकिस्तान निंदा : में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की अफगानिस्तान पर हुई महत्वपूर्ण बैठक में भारत ने एक बार फिर अफगानिस्तान के समर्थन में मजबूत आवाज उठाई। भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वथानेनी ने पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में किए गए हवाई हमलों की कड़ी निंदा की। साथ ही, शरणार्थियों की जबरन वापसी, नागरिक मौतों और व्यापारिक बाधाओं को ‘व्यापार और पारगमन आतंकवाद’ करार दिया। वहीं, अमेरिका ने तालिबान शासन को ‘अनुचित हिरासत का राज्य प्रायोजक’ घोषित कर दिया, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया।
पाकिस्तान के एयरस्ट्राइक्स: रमजान में नागरिक मौतें
पाकिस्तान ने फरवरी 2026 में अफगानिस्तान के पूर्वी इलाकों में कई हवाई हमले किए, जिनमें बड़ी संख्या में निर्दोष नागरिक मारे गए। भारत ने UNSC में इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून, UN चार्टर और राज्य संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताया। राजदूत पर्वथानेनी ने कहा, “रमजान के पवित्र महीने में बेरहमी से हमले करना पूरी तरह पाखंड है।” आंकड़ों के अनुसार, 6 मार्च 2026 तक इन हमलों में 185 नागरिक मारे गए, जिनमें लगभग 55% महिलाएं और बच्चे शामिल थे। भारत ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा करार दिया और पाकिस्तान पर तीखा प्रहार किया।

अफगानिस्तान के प्रति भारत का मजबूत समर्थन
भारत ने अफगानिस्तान के साथ अपने ऐतिहासिक और गहरे संबंधों को दोहराया। राजदूत ने बताया कि भारत ने अफगानिस्तान के सभी 34 प्रांतों में 500 से अधिक विकास परियोजनाएं चलाई हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, खाद्य सुरक्षा और खेल जैसे क्षेत्रों में भारत UN एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। खासकर अफगान युवाओं में क्रिकेट के प्रति बढ़ते जुनून की सराहना की गई। उन्होंने कहा, “अफगानिस्तान की क्रिकेट टीम जहां भी खेल रही है, दिल जीत रही है। भारत को उनकी इस यात्रा का हिस्सा बनने पर गर्व है।”
शरणार्थियों की जबरन वापसी और मानवीय संकट
- भारत ने शरणार्थियों की जबरन वापसी पर गहरी चिंता जताई। UN महासचिव की रिपोर्ट का हवाला देते हुए
- कहा कि वापसी स्वैच्छिक, सुरक्षित और सम्मानजनक होनी चाहिए। साथ ही, समुदायों
- में पुनर्वास के लिए निरंतर सहायता जरूरी है। अफगानिस्तान में मानवीय संकट गंभीर है
- 1.7 करोड़ से ज्यादा लोग भोजन की कमी झेल रहे हैं, जिसमें 47 लाख भुखमरी के कगार पर हैं।
‘व्यापार और पारगमन आतंकवाद’ का विरोध
- भारत ने अफगानिस्तान जैसे लैंडलॉक्ड देश के व्यापार मार्गों पर लगाए गए प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना की।
- राजदूत ने इसे “व्यापार और पारगमन आतंकवाद” कहा और चेतावनी दी कि पहले से
- आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे देश की कमजोरियों को हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए।
- WTO मानदंडों का उल्लंघन बताते हुए कहा कि व्यापार रोकना निंदनीय है।
अमेरिका का बड़ा ऐलान: अफगानिस्तान ‘State Sponsor of Wrongful Detention’
- अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अफगानिस्तान को ‘अनुचित हिरासत का राज्य प्रायोजक’ घोषित किया।
- तालिबान से अमेरिकी नागरिकों डेनिस कोयल और महमूद हबीबी समेत सभी को तुरंत रिहा करने की मांग की।
- कोयल को जनवरी 2025 में हिरासत में लिया गया, जबकि हबीबी अगस्त 2022 से लापता हैं।
- अमेरिका ने तालिबान की ‘बंधक कूटनीति’ को आतंकवादी हथकंडा बताया और क्षेत्र में यात्रा को असुरक्षित घोषित किया।
- UNSC में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने UNAMA मिशन के फंड पर सवाल उठाए
- क्योंकि तालिबान महिलाओं को अधिकारों से वंचित रख रहा है।
क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एकजुटता जरूरी
UNSC बैठक में भारत ने अफगानिस्तान की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और आतंकवाद से मुकाबले के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर दिया। पाकिस्तान के हमलों और व्यापारिक प्रतिबंधों ने मानवीय संकट को और गहरा कर दिया है। ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच यह स्थिति दक्षिण एशिया के लिए चुनौतीपूर्ण है। भारत का मजबूत रुख अफगान लोगों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता दिखाता है, जबकि अमेरिका का फैसला तालिबान पर दबाव बढ़ाएगा। दुनिया को अब शांति और सहयोग की जरूरत है, वरना मानवीय आपदा और बढ़ सकती है।
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