बुलेट ट्रेन लागत भारत का बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट 4 साल की देरी के बाद अब 2 लाख करोड़ रुपये के पास पहुंच गया है। जानिए क्यों बढ़ रही है लागत और कब पूरी होगी यह परियोजना।

मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर, जिसे भारत का पहला बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट कहा जाता है, अब वित्तीय और समय की भारी मार झेल रहा है। शुरूआती अनुमान से 4 साल की देरी और लागत 2 लाख करोड़ रुपये को पार कर गई है। यह प्रोजेक्ट, जो जापान के सहयोग से 2017 में शुरू हुआ, अब बजट और समयसीमा दोनों पर संकट में है।
प्रोजेक्ट का बैकग्राउंड
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर 508 किलोमीटर लंबा है, जो महाराष्ट्र और गुजरात को जोड़ेगा। 350 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से यात्रा समय 2 घंटे कर देगा। जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) ने 81% फंडिंग (लगभग 88,000 करोड़ रुपये) कम ब्याज दर पर दी है। शुरूआती लागत 1.08 लाख करोड़ रुपये थी, लेकिन भूमि अधिग्रहण, कानूनी विवादों और COVID-19 से देरी हुई।
2026 तक पूरा होने का लक्ष्य अब 2030 या उसके बाद खिसक गया है। सबसे प्रभावित मुंबई-ठाणे और सूरत-अहमदाबाद खंड हैं, जहां किसानों के विरोध ने काम रोका। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने 2025 में घोषणा की कि लागत 2.20 लाख करोड़ तक पहुंच सकती है।
बुलेट ट्रेन लागत: देरी के प्रमुख कारण
प्रोजेक्ट की देरी कई स्तरों पर हुई:
- भूमि अधिग्रहण विवाद: गुजरात में 1,000 एकड़ और महाराष्ट्र में 296 एकड़ भूमि पर किसान और स्थानीय विरोध। सुप्रीम कोर्ट में 200+ मामले लंबित।
- तकनीकी चुनौतियां: ऊंचे पुल, सुरंगें (जैसे ठाणे क्रीक के नीचे 21 किमी समुद्री सुरंग) और भूकंपप्रवण क्षेत्र।
- महामारी प्रभाव: 2020-22 में काम ठप, श्रमिकों की कमी।
- पर्यावरण मंजूरी: वन क्षेत्र और वन्यजीव कॉरिडोर पर देरी।
इनसे 4 साल की कुल देरी हुई, पहले चरण (508 किमी) अब 2030 के बाद। JICA ने फंडिंग जारी रखी, लेकिन ब्याज बढ़ा।
बढ़ती लागत का ब्रेकडाउन
| मद | शुरूआती अनुमान (2017) | वर्तमान अनुमान (2026) | वृद्धि |
|---|---|---|---|
| भूमि अधिग्रहण | 22,000 करोड़ | 45,000 करोड़ | 104% youtube |
| निर्माण कार्य | 58,000 करोड़ | 1,20,000 करोड़ | 107% |
| रोलिंग स्टॉक (ट्रेनें) | 28,000 करोड़ | 40,000 करोड़ | 43% |
| ब्याज और अन्य | – | 15,000 करोड़ | नया |
| कुल | 1.08 लाख करोड़ | 2.20 लाख करोड़ | 104% |
यह वृद्धि मुद्रास्फीति, डलर दर और अतिरिक्त लागत से है। प्रति किमी लागत अब 430 करोड़ रुपये हो गई।
सरकारी प्रतिक्रिया और चुनौतियां
रेल मंत्री ने संसद में कहा कि प्रोजेक्ट राष्ट्रीय गौरव है, लेकिन बजट पर दबाव। PM मोदी ने गुजरात में प्रगति दिखाई, लेकिन विपक्ष ने वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाए। JICA का लोन 0.1% ब्याज पर है, लेकिन देरी से चुकौती बढ़ी। भविष्य में दिल्ली-वाराणसी, अहमदाबाद-हैदराबाद कॉरिडोर प्लान हैं।
चुनौतियां बनी हुईं: जनता का विरोध, रखरखाव लागत (ट्रेनें जापान से आयात) और टिकट मूल्य (अनुमानित 3,000-5,000 रुपये)। सफलता मिले तो GDP को 1% बूस्ट, लेकिन असफलता से कर्ज बोझ।
भविष्य की संभावनाएं
प्रोजेक्ट 2030 तक पूरा होने पर 88,000 यात्री प्रतिदिन। रोजगार सृजन (55,000 नौकरियां) और पर्यटन बढ़ेगा। लेकिन पारदर्शिता और समय प्रबंधन जरूरी। हाई स्पीड रेल नीति से अन्य कॉरिडोर तेज होंगे। यह भारत की आधुनिकता की परीक्षा है।