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बकरीद 2026 से पहले पशु बाजारों में महंगाई का तांडव बकरियां 5 लाख, बैल 12 लाख तक!

On: May 25, 2026 10:39 AM
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बकरीद 2026 : बकरीद (ईद-उल-अजहा) की तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन इस बार पशु बाजारों में कीमतों ने आम लोगों की कमर तोड़ दी है। जहां सामान्य बकरियां 5 लाख रुपये तक और कुर्बानी वाले बैल 12 लाख रुपये तक पहुंच गए हैं। महंगाई, चारे की बढ़ती कीमत और परिवहन खर्च ने मिलकर पशुधन व्यापार को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।

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बकरीद 2026 कब है?

इस साल बकरीद 27 या 28 मई 2026 को मनाई जाएगी। चांद के दीदार पर निर्भर करते हुए भारत में 28 मई को ईद-उल-अजहा का त्योहार होगा। हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में मनाए जाने वाले इस पवित्र त्योहार पर लाखों मुसलमान पशु कुर्बानी करते हैं और मांस गरीबों में बांटते हैं।

पशु बाजारों में रिकॉर्ड महंगाई

देश के प्रमुख पशु बाजारों में इस बार कीमतें आसमान छू रही हैं:

  • दिल्ली: जामा मस्जिद, ओखला, जाफराबाद और शाहदरा के बाजारों में छोटी बकरियां 25,000 से 2 लाख रुपये तक बिक रही हैं। राजस्थान की सोजत और जमुनापारी नस्ल की प्रीमियम बकरियां 3 लाख से 5 लाख रुपये तक पहुंच गई हैं। बैलों की कीमत 1 लाख से शुरू होकर 8 लाख रुपये तक जा पहुंची है।
  • मुंबई (देवनार बाजार): देश का सबसे बड़ा पशु बाजार। यहां सामान्य बकरियां 30,000 से 80,000 रुपये में हैं, जबकि बेहतरीन बकरियां 7 लाख से 10 लाख रुपये तक बिक रही हैं। भारी बैल 2 लाख से 12 लाख रुपये के बीच उपलब्ध हैं।
  • लखनऊ, कानपुर, हैदराबाद, जयपुर: सिरोही, बारबरी और कमोरी नस्ल की
  • बकरियों की भारी डिमांड है। बड़े कद-काठी वाले पशुओं को प्राथमिकता दी जा रही है।

कीमतें क्यों बढ़ गईं? मुख्य कारण

व्यापारियों के अनुसार इस साल कीमतों में 20% से 40% तक की बढ़ोतरी हुई है। मुख्य वजहें हैं:

  1. चारे की भारी महंगाई – पशु आहार और फीड की कीमतें आसमान छू रही हैं।
  2. परिवहन खर्च – डीजल-पेट्रोल महंगा होने से राजस्थान, UP, MP से पशु लाने का खर्च दोगुना हो गया।
  3. मुद्रास्फीति – कुल परिचालन लागत बढ़ने से व्यापारी मुनाफा बचाने के लिए कीमतें बढ़ा रहे हैं।
  4. आपूर्ति पर दबाव – पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव से कुछ आयातित सामग्री भी प्रभावित हुई।
  5. बढ़ती मांग – बकरीद से पहले पशुओं की मांग में भारी उछाल।

आम लोगों पर क्या असर?

ऊंची कीमतों के कारण कई लोग साझा कुर्बानी (शेयरिंग) का विकल्प चुन रहे हैं। एक पशु को 7-10 लोग मिलकर खरीद रहे हैं ताकि खर्च बंट जाए। मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए अच्छी नस्ल का पशु खरीदना अब चुनौती बन गया है।

पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी हालत खराब

  • केवल भारत ही नहीं, पड़ोसी देशों में भी महंगाई का असर दिख रहा है।
  • पाकिस्तान में बकरियां 27,000 से 38,000 रुपये (भारतीय) तक बिक रही हैं।
  • बांग्लादेश में भी 15-25% कीमतें बढ़ी हैं।

बकरीद का धार्मिक महत्व और उत्साह भले ही कम न हो, लेकिन महंगाई ने इस बार कुर्बानी को महंगा बना दिया है। सरकार और पशुपालन विभाग को चारे की उपलब्धता बढ़ाने, परिवहन सब्सिडी देने और बाजार को नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए।

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