मौसम क्रिकेट ऑपरेशन सिंदूर क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश विदेश राशिफल लाइफ - साइंस आध्यात्मिक अन्य
---Advertisement---

प्रोफेसर रामदास का निधन कन्नड़ साहित्य, रंगमंच और शिक्षा के महान स्तंभ खोया कर्नाटक ने!

On: December 24, 2025 5:43 AM
Follow Us:
---Advertisement---

प्रोफेसर रामदास का निधन : कर्नाटक के साहित्य और रंगमंच जगत को बड़ा झटका लगा है। उदुपी के प्रसिद्ध कन्नड़ प्रोफेसर, कवि, लेखक और रंगकर्मी प्रोफेसर रामदास का 23 दिसंबर 2025 को बीमारी से निधन हो गया। वे 86 वर्ष के थे। वे अपनी पत्नी और बेटी को पीछे छोड़ गए हैं। काउप तालुक के उच्छिला गांव के मूल निवासी प्रो. रामदास ने गरीबी के बावजूद शिक्षा और कला के क्षेत्र में ऊंचाइयां छुईं और कर्नाटक की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया।

गरीबी से संघर्ष कर बनाई ऊंची पहचान

प्रो. रामदास का जीवन प्रेरणादायक है। गरीबी के कारण उन्होंने सिर्फ एसएसएलसी तक पढ़ाई की, फिर मैसूरु के इंद्रभवन होटल में सप्लायर के रूप में काम शुरू किया। वहां काम करते हुए पार्ट-टाइम पढ़ाई की और 1964 में बीए फर्स्ट क्लास से पास किया। इसके बाद एमए में वाइस चांसलर गोल्ड मेडल जीता। 1966 में मुल्की के विजय कॉलेज में लेक्चरर बने और 1969 से रिटायरमेंट तक उदुपी के पूर्णप्रज्ञ कॉलेज में कन्नड़ प्रोफेसर रहे।

प्रोफेसर रामदास का निधन
प्रोफेसर रामदास का निधन

रंगमंच में अविस्मरणीय योगदान

बचपन से गांव के रंगमंच में रुचि रखने वाले रामदास ने कई यादगार भूमिकाएं निभाईं। गिरिश कर्नाड के ‘तुगलक’ में तुगलक, ‘ओडिपस’ में ओडिपस, ‘अंधायुग’ में अश्वत्थामा और गोविंदा पाई के ‘हेब्बेरालु’ में हिरण्यधनु जैसे रोल्स किए। ऑल इंडिया रेडियो के सैकड़ों नाटकों में हिस्सा लिया। समुहा और रंगभूमि जैसे ग्रुप्स से जुड़े। ‘कुमाररामा’, ‘बंजे’, ‘संक्रांति’, ‘हरकेया कुरी’ और ‘तलेदंडा’ में अभिनय किया। निर्देशन में ‘नायिकते’, ‘तलेदंडा’ और ‘जोकुमार स्वामी’ जैसे नाटक किए।

साहित्यिक योगदान: 40 से ज्यादा रचनाएं

प्रो. रामदास ने साहित्य में अमिट छाप छोड़ी। उनकी 7 कविता संग्रह जैसे ‘भस्मासुर’, ‘हाडु-पाडु’ और ‘ऋतगीता अमृत’; उपन्यास ‘इवलु’, ‘कार्तारना कम्माटा’ और ‘मुक्तप्रेम’; लघु कथा संग्रह ‘सेदु’ और ‘हट्टू कथेगलु’; 15 एकांकी नाटक जैसे ‘गुंडा भट्टना खांडी अंगड़ी’ और ‘कालालब्धि’। अनुवाद कार्यों में थॉमसना गॉस्पेल्स, जेके उपन्यासगलु, सखाराम बाइंडर, भगवद्गीता का कन्नड़ अनुवाद और कुमारव्यास भारत का ग्रामीण भाषा अनुवाद शामिल। आलोचना में ‘भूमिगीता काव्यप्रवेश’, ‘अध्ययन’, ‘रंग-अंतरंग’ और ‘चिंतना’। कुल 40 से ज्यादा किताबें लिखीं।

सम्मान और पुरस्कारों की झड़ी

  • उनके योगदान को कई सम्मानों से नवाजा गया। कर्नाटक साहित्य अकादमी अवॉर्ड,
  • कडेंगोडलु काव्य अवॉर्ड, मुद्दना काव्य अवॉर्ड, पेजावर मठ का रामवित्तुला अवॉर्ड, कर्नाटक नाटक
  • अकादमी अवॉर्ड, उदुपी रंगभूमि अवॉर्ड, उग्राण अवॉर्ड, पेरला काव्य अवॉर्ड और
  • कर्नाटक नाटक अकादमी फेलोशिप। वे उदुपी तालुक कन्नड़ साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष भी रहे।

श्रद्धांजलि और शोक

  • पूर्णप्रज्ञ कॉलेज के प्रबंधन, प्रिंसिपल, शिक्षक और स्टाफ ने गहरा शोक व्यक्त किया।
  • कर्नाटक ने एक बहुमुखी प्रतिभा खो दी है, जो शिक्षा, साहित्य और रंगमंच के लिए समर्पित रहे।
  • उनकी रचनाएं और प्रदर्शन आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

थाईलैंड में अनोखी शादी 37 साल की महिला ने एक ही समारोह में दो ऑस्ट्रियन पुरुषों से रचाई शादी, वायरल फोटोज़ में दुल्हन के साथ दो दूल्हे – सोशल मीडिया पर छाई बहस!

चंद्र ग्रहण 2026 देवघर बैद्यनाथ धाम में सूतक नहीं, ग्रहण काल में ही बंद होंगे पट – समय-सारणी, कारण और भक्तों के लिए अपडेट

एयर इंडिया की पहली उड़ान दुबई में फंसे 149 यात्रियों को लेकर दिल्ली पहुंची, मिडिल ईस्ट संकट के बीच राहत की खबर

सोने का भाव 2 मार्च 2026 दिल्ली, मुंबई, UP में कितना है 22 कैरेट और 24 कैरेट गोल्ड रेट? ईरान युद्ध से भारी उछाल!

जस्टिस सूर्यकांत न्यूज CJI सूर्यकांत ने क्रिकेट के उदाहरण से दी वकीलों को बड़ी सलाह जसप्रीत बुमराह से रन चेज की उम्मीद क्यों नहीं?

वायरल वीडियो पाकिस्तान पाकिस्तान में 70 साल के मौलाना ने 26 साल की युवती से की शादी रोमांटिक फोटोशूट और वीडियो वायरल सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस!

Leave a Comment