निशिकांत दुबे विवादित बयान : झारखंड के भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के एक बयान ने ओडिशा की राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है। 27 मार्च 2026 को मीडिया से बातचीत के दौरान दुबे ने 1962 के भारत-चीन युद्ध के संदर्भ में ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक को नेहरू, अमेरिकी सरकार और सीआईए के बीच “कड़ी” बताया। इस बयान से ओडिशा में भारी आक्रोश फैल गया। बिजू जनता दल (BJD), कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसे बीजू बाबू का अपमान करार दिया। आखिरकार भारी विरोध के बाद निशिकांत दुबे को X (ट्विटर) पर बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी।
निशिकांत दुबे विवादित बयान ने क्या कहा था?
#निशिकांत दुबे ने कहा था: “अमेरिका ने तिब्बत पर चीन के कब्जे के डर से वहां अपनी सेना और सीआईए एजेंट भेजे थे। दलाई लामा और उनके भाई अमेरिकी सरकार के लगातार संपर्क में थे। नेहरू ने चीन से 1962 का पूरा युद्ध अमेरिकी धन और सीआईए एजेंटों के सहयोग से लड़ा था। ओडिशा के तत्कालीन मुख्यमंत्री बीजू पटनायक अमेरिकी सरकार, सीआईए और नेहरू के बीच कड़ी का काम करते थे।”

उन्होंने आगे दावा किया कि ओडिशा के चारबटिया एयरपोर्ट को अमेरिकी U2 विमानों के लिए बेस बनाया गया था और 1963 से 1979 तक वहां अमेरिकी बल तैनात थे।
यह बयान नेहरू-गांधी परिवार की नीतियों पर सवाल उठाने के क्रम में दिया गया था, लेकिन ओडिशा में इसे बीजू पटनायक की छवि खराब करने के रूप में देखा गया।
बीजू पटनायक कौन थे? उनकी विरासत
- बीजू पटनायक ओडिशा के दो बार मुख्यमंत्री रह चुके थे। वे स्वतंत्रता सेनानी, प्रसिद्ध उद्योगपति
- और भारत के प्रमुख राजनेताओं में शुमार थे। ओडिशा की राजनीति में वे “बीजू बाबू” के नाम से लोकप्रिय हैं।
- उनकी विरासत आज भी ओडिया अस्मिता का प्रतीक है। नवीन पटनायक उनके पुत्र हैं
- और BJD के संस्थापक। चारबटिया एयरपोर्ट के विकास में बीजू पटनायक की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
- ओडिशा के लोग उन्हें राष्ट्रवादी और दूरदर्शी नेता मानते हैं।
विवाद क्यों भड़का? राजनीतिक प्रतिक्रियाएं!
दुबे के बयान के बाद ओडिशा में तीखी प्रतिक्रियाएं आईं:
- BJD का विरोध: BJD सांसदों ने राज्यसभा में हंगामा किया। ओडिशा विधानसभा में 1 अप्रैल 2026 को BJD, कांग्रेस और CPI(M) के सदस्यों ने सदन में नारे लगाए और बीजेपी सरकार से दुबे की निंदा करने की मांग की। सदन स्थगित करना पड़ा।
- नवीन पटनायक की प्रतिक्रिया: BJD अध्यक्ष नवीन पटनायक ने बयान को “outrageous” बताया और कहा कि दुबे को “मेंटल डॉक्टर” की जरूरत है। उन्होंने इसे ओडिशा की भावनाओं पर हमला करार दिया।
- सड़कों पर प्रदर्शन: युवा और छात्रों ने दुबे का पुतला फूंका। बालेश्वर समेत कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए।
- भाजपा में भी असंतोष: ओडिशा के भाजपा नेता बैजयंत पांडा सहित कई स्थानीय नेताओं ने बयान पर नाराजगी जताई।
- यह विवाद ओडिशा की क्षेत्रीय भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला माना गया
- क्योंकि बीजू पटनायक राज्य की राजनीति और गौरव का बड़ा हिस्सा हैं।
निशिकांत दुबे की माफी
- भारी विरोध के बाद निशिकांत दुबे ने X पर बिना शर्त माफी मांगी। उन्होंने लिखा:
- “पिछले हफ्ते मीडिया से बात करते हुए मैंने नेहरू गांधी परिवार के कारनामों के क्रम में पूर्व मुख्यमंत्री
- भारत के अग्रणी नेताओं में स्थान रखने वाले आदरणीय बीजू पटनायक जी के संदर्भ में मेरी
- बातों से गलत अर्थ निकाला गया। पहले तो यह वक्तव्य मेरा व्यक्तिगत है।
- नेहरू जी के ऊपर मेरे विचार को बीजू बाबू के ऊपर समझा गया। बीजू बाबू हमारे लिए हमेशा
- ऊंचे कद के स्टेट्समैन रहे हैं और रहेंगे। मेरे वक्तव्य से यदि भावनाएं
- आहत हुई हैं तो मैं बिना शर्त क्षमा चाहता हूं।”
दुबे ने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य नेहरू-गांधी परिवार की नीतियों पर सवाल उठाना था, न कि बीजू पटनायक का अपमान करना। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस ने बीजू बाबू के साथ अन्याय किया था, तब जनसंघ और भाजपा ने उनका साथ दिया था।
राजनीतिक निहितार्थ
- यह घटना ओडिशा में भाजपा और BJD के बीच मौजूदा तनाव को और बढ़ा सकती है।
- ओडिशा विधानसभा में विपक्ष ने बीजेपी सरकार पर सवाल उठाए कि वह दुबे के बयान पर चुप क्यों है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे विवाद क्षेत्रीय दलों को मजबूत कर सकते हैं
- और भाजपा की छवि पर असर डाल सकते हैं।
बीजू पटनायक जैसे नेताओं की विरासत पर किसी भी तरह की टिप्पणी ओडिशा की जनता के लिए संवेदनशील मुद्दा है। इतिहास की व्याख्या में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन सार्वजनिक जीवन में सम्मानजनक भाषा का इस्तेमाल जरूरी है।
निशिकांत दुबे का बयान और उसके बाद माफी का मामला दिखाता है कि राजनीतिक बहस में संवेदनशील मुद्दों को कैसे संभालना चाहिए। बीजू पटनायक ओडिशा के गौरव हैं और उनकी स्मृति का सम्मान हर राजनीतिक दल को करना चाहिए।
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