नेताजी सुभाष चंद्र बोस : 23 जनवरी को पूरे देश में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती मनाई गई। इस अवसर पर उनकी इकलौती बेटी अनीता बोस फाफ (Anita Bose Pfaff) ने एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने जापान के रेनकोजी मंदिर (Renkoji Temple) में रखी गई अस्थियों को भारत वापस लाने की मांग की है। अनीता ने कहा कि नेताजी की मौत के 80 साल और भारत की आजादी के 78 साल बाद भी उनके अवशेष मातृभूमि से बाहर हैं, जो बेहद दुखद है। आइए जानते हैं पूरी कहानी नेताजी की मौत कैसे हुई, अस्थियां कहां हैं, बेटी ने क्या राज खोला और परिवार की मांग क्या है।
नेताजी की मौत कैसे हुई? – आधिकारिक और परिवार का दावा
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत 18 अगस्त 1945 को ताइपे (ताइवान) में एक विमान दुर्घटना में हुई थी। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान के आत्मसमर्पण के बाद, नेताजी सिंगापुर से टोक्यो जा रहे थे। विमान क्रैश होने पर वे गंभीर रूप से झुलस गए, लेकिन उसी दिन उनकी मृत्यु हो गई।

इसकी पुष्टि कई प्रत्यक्षदर्शियों ने की है, खासकर आजाद हिंद फौज के कर्नल हबीबुर रहमान ने विभिन्न जांच आयोगों में गवाही दी कि नेताजी दुर्घटना में मारे गए। परिवार, जिसमें अनीता बोस फाफ शामिल हैं, इस बात को मानते हैं कि मौत विमान हादसे में हुई। अनीता ने कई बार कहा है कि जब तक कोई ठोस सबूत न आए, वे विमान क्रैश को ही सबसे संभावित कारण मानती हैं।
- हालांकि, भारत में नेताजी की मौत को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है। कुछ लोग मानते हैं
- कि वे रूस में गुलाग में मरे या गुमनामी में भारत लौटे (जैसे गुमनामी बाबा थ्योरी)।
- लेकिन परिवार और अधिकांश आधिकारिक जांच इन थ्योरी को खारिज करती हैं।
अस्थियां कहां रखी हैं? – रेनकोजी मंदिर का रहस्य
नेताजी के पार्थिव अवशेषों को जला कर अस्थियां टोक्यो के रेनकोजी मंदिर में सुरक्षित रखी गई हैं। जापान के मुख्य पुजारी इनकी देखभाल करते हैं। 1945 में क्रैश के बाद अस्थियां टोक्यो लाई गईं और भारतीय स्वतंत्रता लीग ने इन्हें मंदिर सौंप दिया। तब से पिछले 80 साल से ये अस्थियां वहीं हैं।
- अनीता बोस फाफ और परिवार के अन्य सदस्य (जैसे भतीजे, भतीजी माधुरी बोस)
- इन अस्थियों को नेताजी का ही मानते हैं। उन्होंने 2016 और 2019 में भी डीएनए टेस्ट की मांग की थी
- ताकि 100% पुष्टि हो सके। जापान सरकार और मंदिर पुजारी डीएनए जांच के लिए तैयार हैं
- लेकिन अभी तक भारत सरकार की ओर से कोई निर्णायक कदम नहीं उठा।
बेटी अनीता बोस फाफ का बयान – क्या कहा राज?
23 जनवरी 2026 को जयंती पर अनीता ने UNI को दिए बयान में कहा: “मैं नेताजी का सम्मान करने वाले भारतीयों को आमंत्रित करती हूं कि वे उनके अवशेषों को अंतिम और उचित संस्कार के लिए भारत लाए जाने का समर्थन करें।” उन्होंने दुख जताया कि आजादी के लिए जीवन समर्पित करने वाले महान नेता के अवशेष अभी भी “निर्वासन” में हैं।
परिवार की मांग है:
- अस्थियों को भारत लाकर सम्मानजनक अंतिम संस्कार करना।
- डीएनए टेस्ट कर विवाद खत्म करना।
- लाखों श्रद्धालुओं को शांति मिलेगी।
अनीता ने नेताजी के संघर्ष को याद किया – कैसे उन्होंने जेल से निकलकर विदेश जाकर आजाद हिंद फौज बनाई, प्रोविजनल गवर्नमेंट ऑफ फ्री इंडिया स्थापित किया और देश की आजादी के लिए सब कुछ न्योछावर किया।
नेताजी की विरासत और आज की मांग
- नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारत के सबसे प्रेरणादायक स्वतंत्रता सेनानियों में से एक हैं।
- “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” का नारा आज भी गूंजता है।
- उनकी बेटी अनीता जर्मनी में रहती हैं और बार-बार सरकार से अपील करती रही हैं।
अगर अस्थियां भारत लाई जाती हैं, तो यह न सिर्फ परिवार के लिए, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए भावनात्मक क्षण होगा। क्या भारत सरकार अब इस मांग पर अमल करेगी? समय बताएगा।
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