तालिबान पाकिस्तान विवाद तालिबान ने पाकिस्तान के खिलाफ बड़ा बयान दिया है, कहा—हमले भाड़े के सैनिक कर रहे हैं, न कि पाक सेना। इस्लामाबाद और तालिबान के रिश्तों में बढ़ी दरार।

तालिबान ने पाकिस्तान के खिलाफ एक तीखा बयान जारी किया है, जिसमें इसे “भाड़े के सैनिकों का युद्ध” करार दिया गया। यह बयान अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच आया है, जहां तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) की गतिविधियों ने दोनों देशों के रिश्तों को तनावपूर्ण बना दिया है। तालिबान नेतृत्व ने साफ कहा कि पाकिस्तान की सेना विदेशी ताकतों के इशारे पर काम कर रही है।
बयान का पूरा संदर्भ
यह बयान अफगानिस्तान के कंधार प्रांत से जारी हुआ, जहां तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “ये पाकिस्तान का आधिकारिक युद्ध नहीं है, बल्कि भाड़े के सैनिकों का।” उन्होंने पाकिस्तान को अमेरिका, भारत और अन्य देशों का एजेंट बताया, जो अफगानिस्तान में अस्थिरता फैलाना चाहते हैं। यह बयान TTP के हमलों के जवाब में आया, जिनमें पाकिस्तानी सेना को निशाना बनाया गया। हाल के हफ्तों में कुर्रम एजेंसी और दक्षिण वजीरिस्तान में भारी झड़पें हुईं, जिसमें दर्जनों सैनिक मारे गए।
तालिबान ने दावा किया कि TTP अफगानिस्तान से पाकिस्तान पर हमले नहीं कर रहे, बल्कि यह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI की साजिश है। उन्होंने पाकिस्तान से मांग की कि वह अफगान शरणार्थियों को निशाना न बनाए और ड्रोन हमलों को रोके। यह बयान 2026 की शुरुआत में आया, जब दोनों देशों के बीच डिपोर्टेशन और बॉर्डर क्लोजर का विवाद चरम पर है।
तालिबान पाकिस्तान विवाद : तालिबान-पाकिस्तान संबंधों का इतिहास
- पाकिस्तान ने ऐतिहासिक रूप से तालिबान को समर्थन दिया था,
- खासकर 1990 के दशक में। क्वेटा शुफा ने तालिबान नेताओं को शरण दी।
- लेकिन 2021 में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद रिश्ते बिगड़ गए।
- TTP, जो तालिबान से प्रेरित है, ने पाकिस्तान में 1000 से अधिक हमले किए।
- पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान TTP को पनाह दे रहा है।
2023-2025 के बीच पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से 15 लाख शरणार्थियों को भगाया, जिससे तालिबान भड़क गया। अब तालिबान खुले तौर पर पाकिस्तान को “काफिरों का साथी” कह रहा है। यह बयान TTP प्रमुख नूर वली मेहसूद के वीडियो के बाद आया, जिसमें उन्होंने पाकिस्तानी सेना को “गुलाम” कहा। क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान आंतरिक दबाव को कम करने की कोशिश है।
क्षेत्रीय प्रभाव और भू-राजनीति
यह बयान भारत के लिए फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं। अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर युद्ध बढ़ने से कन्ट्रैक्टर्स (भाड़े के सैनिक) जैसे ब्लैकवाटर के शामिल होने की अफवाहें हैं। चीन की CPEC परियोजना प्रभावित हो रही है, जहां TTP ने चाइनीज वर्कर्स को निशाना बनाया। ईरान भी चिंतित है, क्योंकि सीमा पार आतंकवाद बढ़ सकता है।
| प्रमुख पक्ष | स्थिति | प्रभाव |
|---|---|---|
| तालिबान | TTP को समर्थन का खंडन | आंतरिक स्थिरता पर फोकस |
| पाकिस्तान | ड्रोन स्ट्राइक्स जारी | सेना पर दबाव बढ़ा |
| TTP | हमले तेज | 500+ सैनिक मारे गए 2025 में |
| भारत | निगरानी | क्षेत्रीय संतुलन का मौका |
| चीन | CPEC सुरक्षा | निवेश पर खतरा |
यह तालिका संघर्ष के आयाम दिखाती है। वैश्विक स्तर पर UN ने मध्यस्थता की पेशकश की है।
पाकिस्तान का संभावित जवाब
पाकिस्तान ने बयान को “प्रॉपगैंडा” करार दिया और अफगानिस्तान पर आतंकवाद निर्यात का आरोप लगाया। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ बैठक बुलाई। संभावना है कि पाकिस्तान अफगान सीमा पर फेंसिंग तेज करे और ISI सक्रिय हो। आर्थिक संकट में पाकिस्तान को IMF लोन के लिए दबाव है, इसलिए युद्ध लंबा नहीं खिंचेगा।
भविष्य की संभावनाएं
यह विवाद दक्षिण एशिया को अस्थिर कर सकता है। तालिबान को वैश्विक मान्यता न मिलने से आर्थिक दबाव है, जबकि पाकिस्तान आतंकी लिस्टिंग से जूझ रहा। शांति वार्ता की जरूरत है, लेकिन भरोसे की कमी बाधा। भारत को सतर्क रहना होगा, क्योंकि कश्मीर में इसका असर पड़ सकता। कुल मिलाकर, यह बयान क्षेत्रीय गठजोड़ बदल सकता है।