जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा : दिल्ली हाईकोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा इन दिनों आम आदमी पार्टी (AAP) के निशाने पर हैं। अरविंद केजरीवाल की याचिका खारिज होने के बाद AAP नेता जस्टिस शर्मा पर पक्षपात के आरोप लगा रहे हैं। लेकिन एक AAP नेता ने इतना बड़ा झूठ फैलाया कि उनकी ही शेयर की गई वीडियो से पोल खुल गई। यह मामला न्यायपालिका की निष्पक्षता और सोशल मीडिया पर फेक न्यूज के खतरे को उजागर करता है।
अरविंद केजरीवाल की दिल्ली शराब नीति मामले में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा द्वारा रिक्यूसल याचिका खारिज करने के बाद AAP के पूर्व विधायक विनय मिश्रा ने जस्टिस शर्मा की तस्वीरों के साथ पोस्ट किया कि उन्होंने राज्यसभा की सीट पक्की कर ली है।

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा AAP नेताओं ने क्या दावा किया?
वे यहीं नहीं रुके। विनय मिश्रा ने एक पुराना वीडियो शेयर करते हुए दावा किया कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा खुद कह रही हैं – “जब-जब वह RSS के कार्यक्रम में जाती हैं, उनका प्रमोशन हो जाता है”।
- AAP के रोहिणी जिला प्रमुख और आईटी सेल सदस्य देवेश विश्वकर्मा ने भी इसी तरह का दावा किया।
- उन्होंने लिखा, “जस्टिस स्वर्णकांता जी स्वयं स्वीकार कर रही हैं
- कि जब-जब वो RSS-भाजपा के कार्यक्रमों में जाती हैं, उनका प्रमोशन हो जाता है। फिर भी मैडम जी निष्पक्ष हैं।”
- यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, लेकिन बाद में विनय मिश्रा ने इसे डिलीट कर दिया।
- फिर भी कई AAP सपोर्टर इसे अभी भी शेयर कर रहे हैं।
वीडियो की असली सच्चाई क्या है?
AAP नेताओं द्वारा शेयर किया गया वीडियो 19 मई 2024 का है। यह महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कार्यक्रम का है, जहां जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा चीफ गेस्ट के रूप में शामिल हुई थीं। कार्यक्रम का विषय था – “रेलिवेंस ऑफ न्यू क्रिमिनल लॉ इन चेंजिंग इंडिया”।
- वीडियो में जस्टिस शर्मा कहती हैं: “जब आपने उसके अगले साल मुझे आमंत्रित किया
- तो मैं एक स्टेप आगे फैमिली कोर्ट में डिस्ट्रिक्ट जज थी। उसके अगले साल जब आपने मुझे आमंत्रित किया
- तो मैं डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज थी। और जब आज आपने मुझे आमंत्रित किया तो आपने मुझे
- बाबा (काशी विश्वनाथ) ने मुझे हाई कोर्ट का जज बना दिया। धन्यवाद
- बाबा मुझे कुछ-कुछ बनाते रहें। प्रभु मेरी अर्जी है, मैं वो हो जाऊं जो तेरी मर्जी है।”
जस्टिस शर्मा ने प्रमोशन का जिक्र किया, लेकिन इसे आरएसएस या भाजपा कार्यक्रम से नहीं जोड़ा। उन्होंने इसे काशी विद्यापीठ के कार्यक्रम और भगवान काशी विश्वनाथ की कृपा से जोड़ा। AAP नेताओं ने वीडियो को तोड़-मरोड़कर पेश किया और RSS का नाम जोड़ दिया।
यह क्लिप देखने के बाद कई यूजर्स ने विनय मिश्रा को गलत बताया। फर्क साफ था – मूल वीडियो में RSS का कोई जिक्र नहीं था।
पृष्ठभूमि: केजरीवाल की रिक्यूसल याचिका
- यह विवाद तब शुरू हुआ जब अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा
- से शराब घोटाला मामले की सुनवाई से हटने की मांग की। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि जज पक्षपाती हैं।
- जस्टिस शर्मा ने इस याचिका को विस्तार से खारिज किया। उन्होंने कहा
- कि महज आशंका या मनगढ़ंत आरोपों के आधार पर कोई जज खुद को केस से अलग नहीं कर सकता।
- जस्टिस शर्मा ने केजरीवाल की कोशिश को “शर्मनाक” बताया और कहा कि यह न्यायपालिका पर हमला है।
AAP नेता अब जस्टिस शर्मा पर हमला बोल रहे हैं, जबकि अदालत ने साफ किया है कि फैसला सबूतों और कानून के आधार पर होता है, न कि राजनीतिक दबाव पर।
सोशल मीडिया पर फेक क्लेम का खतरा
- यह घटना दिखाती है कि राजनीतिक विवाद में सोशल मीडिया कितना खतरनाक हो सकता है।
- एक पुराना वीडियो काट-छांटकर या गलत कैप्शन देकर वायरल करना आसान है।
- इससे जजों की गरिमा प्रभावित होती है और जनता में अदालतों के प्रति अविश्वास पैदा होता है।
- जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा एक अनुभवी जज हैं। उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों में फैसले दिए हैं।
- उनके खिलाफ ऐसे झूठे आरोप न केवल व्यक्तिगत हमला हैं
- बल्कि पूरी न्याय व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश भी।
सच्चाई सामने आने पर पोल खुली
AAP नेता विनय मिश्रा और देवेश विश्वकर्मा द्वारा फैलाया गया दावा पूरी तरह गलत साबित हुआ। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने RSS कार्यक्रम का जिक्र नहीं किया। उन्होंने केवल काशी विद्यापीठ के आयोजन और भगवान की कृपा की बात कही।
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