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गंगा जल संधि 2026 बिहार बनाम बांग्लादेश विवाद क्या है? पूरा विश्लेषण!

On: August 7, 2026 11:11 AM
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गंगा जल संधि 2026 गंगा नदी भारत की जीवनरेखा मानी जाती है, लेकिन हाल ही में गंगा जल बंटवारे को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। बिहार के एक जेडीयू सांसद ने भारत-बांग्लादेश के बीच होने वाली गंगा जल संधि के नवीनीकरण का विरोध किया है और कहा है कि पहले बिहार के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह मुद्दा अब केवल एक राज्य का नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और जल प्रबंधन का बड़ा विषय बन चुका है।

गंगा जल संधि 2026 फरक्का बैराज विवाद
#गंगा जल संधि 2026 को लेकर बिहार का विरोध और भारत-बांग्लादेश के बीच जल समझौते पर बढ़ता विवाद।

गंगा जल संधि क्या है?

#गंगा जल संधि (Ganga Water Treaty) भारत और बांग्लादेश के बीच वर्ष 1996 में हुई थी। यह 30 साल की संधि है, जो फरक्का बैराज (Farakka Barrage) से गंगा के पानी के बंटवारे को नियंत्रित करती है। यह संधि दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है, इसलिए दोनों देशों के बीच इसे लेकर फिर से बातचीत चल रही है।

इस संधि के तहत सूखे मौसम (जनवरी से मई) में गंगा के पानी को तय फार्मूले के अनुसार बांटा जाता है, ताकि दोनों देशों की जरूरतें पूरी हो सकें।

बिहार क्यों कर रहा है विरोध?

  • हाल ही में बिहार के एक सांसद ने इस संधि के नवीनीकरण पर सवाल उठाते हुए
  • कहा कि मौजूदा व्यवस्था से बिहार को नुकसान हो रहा है। उनका कहना है
  • कि गंगा में पानी की कमी के कारण राज्य में कृषि और जल संकट बढ़ रहा है।
  • इसके अलावा यह भी कहा गया कि यदि बिना बदलाव के संधि को बढ़ाया गया
  • तो बिहार की समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।

बिहार सरकार और कई विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • गंगा में जल स्तर लगातार घट रहा है
  • खेती और सिंचाई पर असर पड़ रहा है
  • कई क्षेत्रों में सूखा और बाढ़ दोनों की समस्या देखी जा रही है

फरक्का बैराज की भूमिका

  • फरक्का बैराज पश्चिम बंगाल में स्थित एक महत्वपूर्ण परियोजना है
  • जिसका उद्देश्य हुगली नदी में जल प्रवाह बनाए रखना था। लेकिन समय के साथ इस पर कई सवाल उठे हैं।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि बैराज के कारण गंगा में सिल्ट (गाद) जमा होती है
  • जिससे बिहार में बाढ़ की समस्या बढ़ती है और कई बार सूखे जैसी स्थिति भी बनती है।
  • यही कारण है कि बिहार में इस परियोजना और संधि दोनों की समीक्षा की मांग उठ रही है।

भारत-बांग्लादेश संबंधों पर असर

  • गंगा जल संधि सिर्फ जल बंटवारे का मामला नहीं है, बल्कि यह भारत और बांग्लादेश के संबंधों की नींव भी है।
  • दोनों देशों के बीच हाल ही में कई तकनीकी बैठकें और निरीक्षण हुए हैं, ताकि नए समझौते के लिए डेटा इकट्ठा किया जा सके।
  • बांग्लादेश भी इस संधि को अपने लिए बेहद महत्वपूर्ण मानता है
  • क्योंकि वहां की कृषि और जल व्यवस्था काफी हद तक गंगा के पानी पर निर्भर है।

जलवायु परिवर्तन का असर

आज की स्थिति 1996 जैसी नहीं है। जलवायु परिवर्तन के कारण:

  • वर्षा के पैटर्न बदल गए हैं
  • सूखे और बाढ़ की घटनाएं बढ़ गई हैं
  • गंगा का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हुआ है

इस वजह से विशेषज्ञ मानते हैं कि नई संधि को पुराने डेटा के बजाय वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार बनाया जाना चाहिए।

आगे क्या होगा?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत सरकार इस संधि को बिना बदलाव के बढ़ाएगी या इसमें बिहार जैसे राज्यों की मांगों को शामिल करेगी?

संभावित विकल्प:

  1. नई शर्तों के साथ संधि का नवीनीकरण
  2. जल बंटवारे का नया फार्मूला
  3. राज्यों की भागीदारी बढ़ाना
  4. जल संरक्षण और प्रबंधन पर फोकस

गंगा जल संधि 2026 भारत के लिए एक बड़ा अवसर भी है और चुनौती भी। जहां एक तरफ अंतरराष्ट्रीय संबंधों को संतुलित रखना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ अपने राज्यों के हितों की रक्षा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

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