कार्तिगाई दीपम 2025 तमिलनाडु : तमिलनाडु में कार्तिगाई दीपम त्योहार को लेकर विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। मद्रास हाई कोर्ट के मदुरै बेंच ने मुख्य सचिव और अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (कानून और व्यवस्था) को 17 दिसंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने के लिए तलब किया है। ये आदेश अवमानना याचिका पर आया, जहां कोर्ट ने पाया कि उसके आदेशों का बार-बार उल्लंघन हो रहा है। मद्रास हाई कोर्ट कार्तिगाई दीपम विवाद में जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन ने साफ कहा कि अधिकारी मौखिक निर्देशों का पालन न करें, बल्कि कानून लागू करें। इस ब्लॉग में हम विस्तार से जानेंगे कार्तिगाई दीपम row की पूरी कहानी, कोर्ट के आदेश, पृष्ठभूमि, शामिल पक्ष और भविष्य के प्रभाव। अगर आप कानूनी मामलों या तमिलनाडु की सांस्कृतिक खबरों में रुचि रखते हैं, तो ये SEO फ्रेंडली पोस्ट आपके लिए है!
कार्तिगाई दीपम क्या है? त्योहार की पृष्ठभूमि
कार्तिगाई दीपम तमिलनाडु का प्राचीन हिंदू त्योहार है, जो कार्तिक मास की पूर्णिमा पर मनाया जाता है। ये प्रकाश का प्रतीक है, जहां दीपक जलाकर अंधकार पर विजय का संदेश दिया जाता है। तिरुप्पारांकुंड्रम पहाड़ी पर दीपथून (प्राचीन पत्थर का स्तंभ) पर दीपम जलाना सदियों पुरानी परंपरा है, जो अरुलमिगु सुब्रमणिया स्वामी मंदिर से जुड़ी है। 2025 में ये विवाद तब शुरू हुआ जब कोर्ट ने 1 दिसंबर को याचिकाकर्ता राम रविकुमार (हिंदू तमिलर कटची के संस्थापक) की याचिका पर आदेश दिया कि दीपथून पर दीपम जलाया जाए। लेकिन 3 दिसंबर को पुलिस और प्रशासन ने इसे रोका, जिससे अवमानना याचिका दाखिल हुई।

विवाद का मूल: पहाड़ी पर दीपम जलाने की जगह को लेकर बहस। कोर्ट ने CISF को सुरक्षा देने का आदेश दिया, लेकिन पुलिस ने 200+ कर्मियों के साथ रोका। जस्टिस स्वामीनाथन ने कहा, “ये आदेश का जानबूझकर उल्लंघन है। अधिकारी कानून लागू करें, मौखिक आदेशों का नहीं।”
मद्रास हाई कोर्ट का आदेश: मुख्य सचिव और एडीजीपी को तलब
9 दिसंबर 2025 को मदुरै बेंच ने अवमानना याचिका पर सुनवाई की। जस्टिस स्वामीनाथन ने मुख्य सचिव और एडीजीपी (कानून और व्यवस्था) को 17 दिसंबर को 3 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश होने का आदेश दिया। उन्होंने यूनियन होम सेक्रेटरी को भी प्रतिवादी बनाया। कोर्ट ने CISF डिप्टी कमांडेंट की रिपोर्ट पर ध्यान दिया, जहां पुलिस ने कहा कि कोर्ट ऑर्डर पर जज के हस्ताक्षर नहीं थे और कलेक्टर का प्रतिबंधात्मक आदेश (सेक्शन 163 BNSS) था। लेकिन 3 दिसंबर को ये आदेश रद्द हो चुका था।
- कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर जे. लोगनाथन, कलेक्टर के.जे. प्रवीण कुमार और मंदिर कार्यकारी अधिकारी
- यज्ञ नारायण को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। जस्टिस ने कहा, “ये पैटर्न है
- जिला स्तर पर अधिकारी कोर्ट आदेशों की अवहेलना करते हैं। क्या ये उच्च निर्देशों से?”
- उन्होंने तंज कसा, “मैं यहां हाथ खड़े करके नहीं चिल्लाऊंगा कि ‘हे पिता, उन्हें माफ करो क्योंकि वे नहीं जानते क्या कर रहे हैं।’”
विवाद के अन्य उदाहरण: पैटर्न साफ
कोर्ट ने दो अन्य मामलों का जिक्र किया:
- कन्याकुमारी का मयिलदुम परै: पैनकुलम गांव में मुरुगन मूर्ति हटाई गई। कोर्ट ने पुनर्स्थापना
- का आदेश दिया, लेकिन प्रशासन ने नहीं किया।
- दिंडिगुल का पेरुमल कोविलपट्टी: यहां भी प्रतिबंधात्मक आदेश से दीपम रोका गया।
- ये दिखाता है कि जिला स्तर पर उल्लंघन का पैटर्न है, संभवतः उच्च अधिकारियों के
- मौखिक निर्देशों से। राज्य की SLP (स्पेशल लीव पिटीशन) सुप्रीम कोर्ट में दोषपूर्ण दाखिल हुई
- बिना अंतरिम आदेश के, इसलिए हाई कोर्ट का आदेश प्रभावी है।
शामिल पक्ष और राजनीतिक कोण
- याचिकाकर्ता: राम रविकुमार।
- प्रतिवादी: मुख्य सचिव, एडीजीपी (कानून और व्यवस्था), यूनियन होम सेक्रेटरी, पुलिस कमिश्नर लोगनाथन, डिप्टी कमिश्नर इनिगो दिव्यान, कलेक्टर प्रवीण कुमार, EO यज्ञ नारायण।
- राजनीतिक कोण: DMK सरकार पर हिंदू भावनाओं की अनदेखी का आरोप। BJP और विपक्ष ने इसे ‘एंटी-हिंदू’ बताया। 120+ विपक्षी सांसदों ने जस्टिस स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव दिया, लेकिन ये राजनीतिक दबाव लगता है। DMK ने कानून-व्यवस्था का हवाला दिया, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज किया।
प्रभाव और भविष्य: क्या होगा अगला?
- ये मामला तमिलनाडु में धार्मिक स्वतंत्रता और प्रशासनिक अनुशासन का बड़ा सवाल उठाता है।
- 17 दिसंबर की सुनवाई में उच्च अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
- अगर अवमानना साबित हुई, तो सजा हो सकती है। ये 2026 विधानसभा चुनावों में मुद्दा बन सकता है।
- हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन तेज किए हैं, मांग है कि परंपरा बहाल हो।
कोर्ट ने साफ किया कि वोटर समझदार हैं, लेकिन अधिकारी कानून का पालन करें। ये केस अन्य धार्मिक विवादों के लिए मिसाल बनेगा।
कार्तिगाई दीपम विवाद – न्याय की जीत या राजनीतिक खेल?
मद्रास हाई कोर्ट कार्तिगाई दीपम row ने प्रशासन की जवाबदेही पर रोशनी डाली। मुख्य सचिव और एडीजीपी की तलबी से मामला और गंभीर हो गया। क्या ये धार्मिक परंपरा की रक्षा है या राजनीतिक दांव-पेंच? फॉलो करें अपडेट्स और अपनी राय कमेंट्स में शेयर करें!