आयकर रिफंड में देरी : जनवरी 2026 में कई करदाता अभी भी आयकर रिफंड का इंतजार कर रहे हैं। FY 2024-25 (AY 2025-26) के लिए ITR फाइल करने के बाद भी रिफंड “प्रोसेसिंग” स्टेज पर अटका हुआ है। पिछले सालों की तुलना में इस बार रिफंड मिलने में ज्यादा समय लग रहा है, जिससे सैलरीड क्लास और रिटायर्ड लोगों में निराशा है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, टाइट वेरिफिकेशन, डेटा मिसमैच और ऑटोमेटेड “नुड्ज़” (nudges) के कारण यह समस्या बढ़ी है। आइए जानें मुख्य कारण, प्रभाव और समाधान।
रिफंड में देरी के प्रमुख कारण
इस साल आयकर विभाग ने सख्ती बढ़ाई है, जिससे रिफंड प्रोसेसिंग स्लो हो गई है:
एन्हांस्ड वेरिफिकेशन और क्रॉस-चेक: फॉर्म 26AS, AIS (Annual Information Statement) और TIS से डेटा मैच नहीं होने पर स्क्रूटनी बढ़ जाती है। छोटी-छोटी विसंगतियां भी अतिरिक्त जांच ट्रिगर करती हैं।

ऑटोमेटेड कम्प्लायंस अलर्ट्स (“नुड्ज़”): विभाग अब डिस्क्रेपेंसी मिलने पर पहले “नुड्ज़” भेजता है, जिसमें करदाता को रिटर्न रिव्यू या रिवाइज करने को कहा जाता है। इससे प्रोसेसिंग में देरी होती है, लेकिन गलत रिफंड रोकने का उद्देश्य है।
स्टैट्यूटरी टाइमलाइन: आयकर अधिनियम की धारा 143(1) के तहत विभाग को रिटर्न प्रोसेस करने के लिए वित्त वर्ष खत्म होने के बाद 9 महीने (31 दिसंबर 2026 तक) का समय मिलता है। इसलिए कानूनी रूप से देरी वैध है।
अन्य सामान्य कारण:
- ITR वेरिफिकेशन न करना (अनवेरिफाइड रिटर्न अमान्य माना जाता है)।
- बैंक अकाउंट डिटेल्स गलत या अनवेरिफाइड।
- पुराना टैक्स डिमांड या सेक्शन 245 के तहत एडजस्टमेंट।
- जटिल क्लेम्स (जैसे HRA, 80G डोनेशन, कैपिटल गेंस) पर एक्स्ट्रा स्क्रूटनी।
- पिछले सालों में रिफंड कुछ हफ्तों में मिल जाता था, लेकिन इस बार टाइट चेक्स के कारण
- कई रिटर्न्स महीनों से पेंडिंग हैं। सोशल मीडिया और ग्रिवेंस पोर्टल पर शिकायतें ट्रेंड कर रही हैं।
करदाताओं पर प्रभाव
- सैलरीड और रिटायर्ड लोग सबसे ज्यादा प्रभावित, क्योंकि रिफंड से प्लान्ड खर्चे या सेविंग्स प्रभावित होती हैं।
- फाइनेंशियल अनिश्चितता बढ़ती है, खासकर उन लोगों में जो रिफंड पर निर्भर हैं।
- कई मामलों में नोटिस या इंटिमेशन ईमेल मिलते हैं, जिससे घबराहट होती है।
क्या करें अगर रिफंड नहीं मिल रहा?
- ITR स्टेटस चेक करें: incometax.gov.in पर लॉगिन करके “e-File > Income Tax Returns > View Filed Returns” में देखें। “प्रोसेसिंग” या “Pending for Action” दिखे तो डिटेल्स चेक करें।
- नुड्ज़ या नोटिस का जवाब दें: अगर ईमेल/SMS आया है, तो तुरंत रिस्पॉन्स दें। डिस्क्रेपेंसी सुधारें या रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करें (अगर डेडलाइन बाकी हो)।
- बैंक डिटेल्स वेरिफाई करें: प्री-वैलिडेटेड अकाउंट सुनिश्चित करें।
- ग्रिवेंस रजिस्टर करें: e-Nivaran पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
- ब्याज का हक: अगर देरी विभाग की वजह से है (करदाता की नहीं), तो आयकर अधिनियम
- के तहत इंटरेस्ट क्लेम कर सकते हैं। टैक्स एक्सपर्ट से सलाह लें।
- धैर्य रखें: ज्यादातर मामलों में रिफंड बैच में जारी होता है। अगर कोई बड़ी समस्या नहीं, तो ऑटोमेटिकली मिल जाएगा।
आयकर विभाग की सख्ती से गलत रिफंड और फ्यूचर डिस्प्यूट्स कम होंगे, लेकिन फिलहाल कई करदाताओं को इंतजार करना पड़ रहा है। अगर आपका रिटर्न क्लीन है और वेरिफाइड है, तो चिंता न करें – 31 दिसंबर 2026 तक प्रोसेसिंग हो जाएगी। नियमित चेक करें और नोटिस का तुरंत जवाब दें।