विदेश

Israel

स्पोर्ट्स

बॉलीवुड

जॉब - एजुकेशन

बिजनेस

लाइफस्टाइल

अन्य

---Advertisement---

शिवसेना विवाद बाल ठाकरे से उद्धव ठाकरे तक छह बार टूटी शिवसेना जानिए पार्टी के विभाजन का पूरा इतिहास!

On: June 18, 2026 4:22 AM
Follow Us:
---Advertisement---

शिवसेना विवाद महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक दल रही है। बालासाहेब ठाकरे द्वारा स्थापित इस पार्टी ने राज्य की राजनीति में दशकों तक प्रभाव बनाए रखा। हालांकि अपने लंबे राजनीतिक सफर में शिवसेना कई बार आंतरिक मतभेदों और नेतृत्व विवादों का सामना करती रही है। हाल के वर्षों में एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे के बीच हुए राजनीतिक संघर्ष ने पार्टी को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार शिवसेना के इतिहास में यह पहला अवसर नहीं है जब पार्टी में बड़ा विभाजन हुआ हो। बाल ठाकरे के समय से लेकर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व तक पार्टी कई बार टूट चुकी है और विभिन्न नेताओं ने अलग राह चुनी है।

शिवसेना विवाद
शिवसेना विवाद बाल ठाकरे से उद्धव ठाकरे तक शिवसेना में हुए विभाजनों ने महाराष्ट्र की राजनीति को कई बार नई दिशा दी।

शिवसेना की स्थापना और शुरुआती दौर

#शिवसेना की स्थापना 1966 में बालासाहेब ठाकरे ने की थी। शुरुआत में पार्टी ने मराठी अस्मिता और क्षेत्रीय मुद्दों को अपना मुख्य आधार बनाया। धीरे-धीरे पार्टी महाराष्ट्र की राजनीति में एक मजबूत शक्ति बनकर उभरी।

  • बाल ठाकरे के नेतृत्व में शिवसेना ने मुंबई और महाराष्ट्र के कई क्षेत्रों में मजबूत जनाधार तैयार किया।
  • हालांकि पार्टी के विस्तार के साथ-साथ आंतरिक मतभेद भी सामने आने लगे।

पहला बड़ा विभाजन

शिवसेना के शुरुआती वर्षों में ही कुछ वरिष्ठ नेताओं ने संगठनात्मक मतभेदों के चलते पार्टी से दूरी बना ली। राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और नेतृत्व शैली को लेकर कई बार असहमति देखने को मिली।

हालांकि बाल ठाकरे के करिश्माई नेतृत्व के कारण पार्टी पर इसका बहुत बड़ा असर नहीं पड़ा।

शिवसेना विवाद नारायण राणे का अलग होना

  • शिवसेना के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे Narayan Rane का पार्टी छोड़ना
  • भी एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना जाता है। नेतृत्व को लेकर मतभेदों के बाद उन्होंने शिवसेना से अलग रास्ता चुना।
  • राणे के जाने से पार्टी को कुछ क्षेत्रों में राजनीतिक नुकसान का सामना करना पड़ा, लेकिन संगठन ने खुद को संभाल लिया।

राज ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना

शिवसेना के इतिहास का सबसे चर्चित विभाजन तब हुआ जब Raj Thackeray ने पार्टी छोड़कर नई पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) का गठन किया।

राज ठाकरे को बाल ठाकरे का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता था, लेकिन बाद में पार्टी नेतृत्व उद्धव ठाकरे के हाथों में जाने लगा। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी बढ़ती गई और अंततः राज ठाकरे ने अलग पार्टी बना ली।

यह विभाजन शिवसेना के लिए बड़ा झटका माना गया क्योंकि बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक राज ठाकरे के साथ चले गए।

उद्धव ठाकरे का नेतृत्व

  • बाल ठाकरे के बाद पार्टी की कमान Uddhav Thackeray के हाथों में आई।
  • उनके नेतृत्व में शिवसेना ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ गठबंधन
  • और बाद में अलग राजनीतिक रणनीतियों को अपनाया।
  • 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी
  • के साथ मिलकर सरकार बनाई, जिसने पार्टी की पारंपरिक राजनीति में बड़ा बदलाव दिखाया।

एकनाथ शिंदे बगावत

  • शिवसेना के इतिहास का सबसे बड़ा और चर्चित विभाजन 2022 में सामने
  • आया जब Eknath Shinde के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायकों ने बगावत कर दी।
  • शिंदे गुट ने दावा किया कि वह बाल ठाकरे की मूल विचारधारा का प्रतिनिधित्व कर रहा है।
  • दूसरी ओर उद्धव ठाकरे गुट ने इसे पार्टी के खिलाफ विद्रोह बताया।
  • इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक और कानूनी लड़ाई शुरू हुई, जिसने महाराष्ट्र की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया।

छह बार टूट चुकी है शिवसेना

  • राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार शिवसेना अपने इतिहास में लगभग छह बार बड़े या छोटे
  • स्तर पर विभाजन का सामना कर चुकी है। हर बार कारण अलग-अलग रहे
  • लेकिन नेतृत्व और संगठनात्मक मतभेद प्रमुख वजहों में शामिल रहे।
  • इसके बावजूद पार्टी ने हर दौर में खुद को पुनर्गठित करने का प्रयास किया और राजनीतिक प्रभाव बनाए रखा।

महाराष्ट्र की राजनीति पर असर

  • शिवसेना में हुए विभाजनों का सीधा असर महाराष्ट्र की राजनीति पर पड़ा है।
  • हर बार नए राजनीतिक समीकरण बने और चुनावी रणनीतियां बदलीं।

आज भी महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के दोनों गुट, बीजेपी, कांग्रेस और एनसीपी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

बाल ठाकरे से लेकर उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे तक शिवसेना का इतिहास राजनीतिक उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। पार्टी कई बार विभाजित हुई, लेकिन हर बार उसने खुद को नए रूप में स्थापित करने की कोशिश की। वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में भी शिवसेना महाराष्ट्र की राजनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनी हुई है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी और उसके विभिन्न गुट किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।

Read More : दिल्ली सरकार का फैसला मेट्रो और बस से सफर करने वाले कर्मचारियों को मिलेगा प्रोत्साहन जानिए पूरी योजना!

Read More : आज का मौसम पंजाब, हरियाणा, यूपी, बिहार और बंगाल में कब होगी बारिश? IMD ने जारी किया बड़ा अपडेट

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment