लालो कृष्णा सदा सहायते : गुजराती सिनेमा ने 2025 में एक ऐसा चमत्कार रचा है जिसने पूरे देश को हैरान कर दिया। फिल्म लालो कृष्णा सदा सहायते (Laalo Krishna Sada Sahaayate) ने महज 50 लाख रुपये के बेहद कम बजट में विश्व स्तर पर 100 करोड़ से ज्यादा की कमाई की और गुजराती फिल्म इंडस्ट्री की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर बन गई। अब यह फिल्म हिंदी में रिलीज हो चुकी है (9 जनवरी 2026 से देशभर में) और इसका सोशल इम्पैक्ट इतना गहरा है कि डायरेक्टर अंकित सखिया ने दावा किया है कि इसने कम से कम 23 लोगों की जान बचाई, जो आत्महत्या करने वाले थे लेकिन फिल्म देखकर जीने की उम्मीद पा गए।
फिल्म की अनोखी सफलता की कहानी
10 अक्टूबर 2025 को गुजराती में रिलीज हुई यह फिल्म शुरुआत में फ्लॉप लग रही थी। पहले 21 दिनों में सिर्फ 98 लाख की कमाई हुई, लेकिन वर्ड-ऑफ-माउथ और दर्शकों की भावनात्मक कनेक्टिविटी ने इसे स्लीपर हिट से ब्लॉकबस्टर बना दिया। डायरेक्टर अंकित सखिया ने बताया कि फिल्म का बजट इतना कम रखा गया क्योंकि उन्होंने सिंगल कैमरा से शूटिंग की, लोकेशन और एक्टर्स दोस्तों से मांगे, और कोई बड़ा खर्च नहीं किया। उनका कहना है, “आइडिया था कम बजट में फिल्म बनाना, इसलिए जरूरत सिर्फ एक लोकेशन, एक एक्टर और आसपास की चीजों की थी।” लेकिन इस सादगी में ही फिल्म की ताकत थी।

फिल्म ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया, बल्कि दर्शकों के दिलों में जगह बनाई। कई दर्शकों ने डायरेक्टर को मैसेज भेजे कि वे डिप्रेशन में थे, आत्महत्या करने जा रहे थे, लेकिन फिल्म देखकर उन्हें जीवन में नई उम्मीद मिली। अंकित सखिया ने कहा, “23 लोगों ने बताया कि फिल्म ने उन्हें बचा लिया। वे रो रहे थे, अपने दुख बता रहे थे और हील हो रहे थे। इसलिए हमने सोचा कि इसे गुजराती तक सीमित नहीं रखना चाहिए, पूरे भारत को दिखाना चाहिए।” हिंदी वर्जन इसी सोशल इम्पैक्ट के कारण रिलीज किया गया।
- एक दिल छू लेने वाला किस्सा भी सामने आया। एक दर्शक ने डायरेक्टर को 5000 रुपये दिए
- और कहा, “ये 5000 रुपये रखो, तुम मुझे बहुत पसंद हो। मेरा नाम विष्णु है।
- अंकित के लिए यह सबसे खास रिएक्शन था।
कहानी क्या है?
- फिल्म एक गरीब रिक्शा चालक लालो की सच्ची और इमोशनल जर्नी है। लालो अपनी गर्लफ्रेंड तुलसी
- से घरवालों के खिलाफ जाकर शादी करता है, जिसके बाद परिवार उससे मुंह मोड़ लेता है।
- गरीबी, संघर्ष और पास्ट के डेमन्स से जूझते हुए एक दिन वह एक सुनसान फार्महाउस में फंस जाता है।
- वहां उसे भगवान श्रीकृष्ण के विजन दिखते हैं, जो उसे गाइड करते हैं, पास्ट को हील करने में मदद करते हैं
- और जीवन का नया अर्थ सिखाते हैं। फिल्म आस्था, कर्म, मेहनत और सेल्फ-डिस्कवरी पर आधारित है
- जो बिना ओवरड्रामा के दिल को छूती है।
- मुख्य कलाकारों में करण जोशी (लालो), रीवा रच (तुलसी), श्रुहद गोस्वामी (श्रीकृष्ण) और अन्य शामिल हैं।
- श्रुहद गोस्वामी ने कहा कि कृष्ण का किरदार निभाने में उन्हें डर लगा था
- लेकिन फिल्म ने उनकी आस्था बढ़ा दी। फिल्म की IMDb रेटिंग 8.6 है, जो इसकी क्वालिटी दिखाती है।
डायरेक्टर अंकित सखिया का मैसेज
- अंकित सखिया ने इंटरव्यू में कहा, “फिल्म में डिवाइन एनर्जी जुड़ी थी, जो लोगों से कनेक्ट हुई।
- लोग हील हो रहे थे, इसलिए हिंदी में लाया।” उन्होंने बड़े बजट वाली फिल्मों जैसे धुरंधर से तुलना करते हुए
- कहा कि सफलता स्टोरी और इमोशंस से आती है, न कि बजट से।
यह फिल्म मेंटल हेल्थ, आध्यात्मिक हीलिंग और छोटे बजट में बड़े सपनों की मिसाल है। अगर आप पॉजिटिव, इंस्पायरिंग और भावनात्मक फिल्में पसंद करते हैं, तो लालो कृष्णा सदा सहायते जरूर देखें। यह साबित करती है कि सच्ची कहानी और ईमानदारी से बनी फिल्में बड़े-बड़े सितारों को भी पीछे छोड़ सकती हैं।
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