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रिलायंस जामनगर रिफाइनरी 2026 बेबुनियाद और गलत रिलायंस इंडस्ट्रीज ने रूसी क्रूड ऑयल की खेप जामनगर आने की खबरों का खंडन किया!

On: January 6, 2026 6:18 AM
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रिलायंस जामनगर रिफाइनरी 2026 : रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने 6 जनवरी 2026 को ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट का कड़ा खंडन किया, जिसमें दावा किया गया था कि तीन जहाजों में लदे रूसी क्रूड ऑयल (लगभग 2.2 मिलियन बैरल यूराल्स ग्रेड) जामनगर रिफाइनरी की ओर जा रहे हैं। कंपनी ने इसे “बिल्कुल झूठा” (blatantly untrue) करार देते हुए कहा कि पिछले तीन हफ्तों में जामनगर रिफाइनरी को कोई रूसी ऑयल कार्गो नहीं मिला है और जनवरी 2026 में भी कोई डिलीवरी की उम्मीद नहीं है।

रिलायंस का आधिकारिक बयान क्या है?

कंपनी ने यह भी कहा कि ऐसे गलत रिपोर्ट्स उनकी इमेज को नुकसान पहुंचा रहे हैं और पत्रकारों ने उनकी खरीदारी न करने की बात को नजरअंदाज कर दिया।

रिलायंस जामनगर रिफाइनरी 2026
रिलायंस जामनगर रिफाइनरी 2026

ब्लूमबर्ग रिपोर्ट में क्या दावा किया गया था?

2 जनवरी 2026 को ब्लूमबर्ग ने Kpler (शिप ट्रैकिंग फर्म) के डेटा के आधार पर रिपोर्ट किया कि कम से कम तीन टैंकर रूसी यूराल्स क्रूड से लदे हुए हैं और उनका सिग्नल जामनगर रिफाइनरी को अगला डेस्टिनेशन दिखा रहा है। ये जहाज जनवरी के शुरुआत में पहुंचने वाले थे। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जहाजों का फाइनल डेस्टिनेशन बदल सकता है, क्योंकि ये सिर्फ सिग्नल पर आधारित है, खरीदारी की पुष्टि नहीं।

बैकग्राउंड: रिलायंस और रूसी ऑयल का संबंध

  • जामनगर रिफाइनरी दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स है
  • जिसकी क्षमता 1.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन है। 2022-2024 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद सस्ते
  • रूसी ऑयल की वजह से भारत बड़ा खरीदार बना था। रिलायंस भी बड़ा इंपोर्टर था
  • जनवरी-नवंबर 2025 तक रूसी ऑयल जामनगर के इंपोर्ट्स का करीब 40% था।

हालांकि, अमेरिकी सैंक्शंस (Rosneft और Lukoil पर) के बाद रिलायंस ने सावधानी बरती। नवंबर 2025 में कंपनी ने घोषणा की कि एक्सपोर्ट-फोकस्ड यूनिट में रूसी क्रूड का इस्तेमाल बंद कर रही है। अब यह खंडन उस दिशा में आगे का कदम लगता है।

इस खबर का असर

  • शेयर मार्केट: रिलायंस शेयर पर तत्काल कोई बड़ा असर नहीं, लेकिन जियोपॉलिटिकल टेंशन और ऑयल प्राइस से जुड़ी खबरें निवेशकों की नजर में रहती हैं।
  • ग्लोबल संदर्भ: पश्चिमी देश रूसी ऑयल पर G7 प्राइस कैप और सैंक्शंस लागू कर रहे हैं।
  • भारत जैसे देश डिस्काउंटेड रूसी ऑयल लेते रहे हैं, लेकिन अब सावधानी बढ़ रही है।
  • रिलायंस का यह स्पष्ट खंडन कंपनी की कंप्लायंस और इंटरनेशनल रेगुलेशंस
  • फॉलो करने की इमेज को मजबूत करता है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज की यह ताजा प्रतिक्रिया दिखाती है कि कंपनी संवेदनशील मुद्दों पर कितनी सतर्क है। आगे ऑयल इंपोर्ट पॉलिसी और जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट्स पर नजर रखें।

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