ममता बनर्जी हार : पश्चिम बंगाल की राजनीति में 5 मई 2026 का दिन ऐतिहासिक बन गया। आजादी के बाद पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) राज्य में सरकार बनाने जा रही है। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) 15 साल के शासन के बाद सत्ता से बाहर हो गई। TMC का वोट शेयर 2021 के 48% से घटकर 40.8% रह गया — यानी करीब 7% का भारी नुकसान। ममता बनर्जी खुद अपने गढ़ भवानीपुर से 15,105 वोटों से हार गईं।
मतगणना के दिन जब अभिषेक बनर्जी भवानीपुर के स्कूल में पहुंचे तो लोगों ने “चोर-चोर” के नारे लगाए। यह नारेबाजी सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे TMC शासन के खिलाफ जनाक्रोश का प्रतीक थी।

TMC हार के मुख्य कारण: शासन में गुस्सा और भ्रष्टाचार
विशेषज्ञों के अनुसार TMC की हार का सबसे बड़ा कारण शासन की नाकामी और भ्रष्टाचार रहा। पूर्व अर्थशास्त्री अभिरूप सरकार कहते हैं कि जबरन वसूली (extortion), अपराध और भय का माहौल उद्योग-व्यवसाय को बुरी तरह प्रभावित कर रहा था। मध्यम वर्ग ने TMC का साथ छोड़ दिया।
आरजी कर अस्पताल कांड (डॉक्टर रेप-मर्डर), शिक्षा-स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली, युवाओं में बेरोजगारी और रोजमर्रा की समस्याओं ने आम जनता को TMC से मोहभंग कर दिया। कानून का राज पूरी तरह गायब हो गया था। लोग बदलाव चाहते थे और BJP ने इसे “पलटानो दरकार, चाई भाजपा सरकार” के नारे के साथ भुनाया।
ममता बनर्जी हार मुस्लिम वोट बैंक का बिखराव – TMC की सबसे बड़ी कमजोरी
- TMC का सबसे मजबूत आधार मुस्लिम वोट इस बार बंट गया। ISF (नवसाद सिद्दीकी)
- और AJUP (हुमायूं कबीर) जैसे छोटे दलों ने कई सीटों पर TMC के वोट काटे।
- मुस्लिम वोटरों में भी असंतोष था क्योंकि अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की
- नीति के बावजूद विकास और सुरक्षा के वादे पूरे नहीं हुए।
- इस विभाजन ने TMC को कई सीटों पर नुकसान पहुंचाया। वहीं, TMC की
- अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की छवि ने हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण किया, जिसका BJP ने पूरा फायदा उठाया।
- दोनों समुदायों में TMC के खिलाफ गुस्सा था — हिंदू शासन की नाकामी से और मुस्लिम वादों की धोखेबाजी से।
2011 vs 2026: इतिहास खुद को दोहराता है!
- 2011 में ममता बनर्जी ने 34 साल के वामपंथी शासन का अंत किया था।
- 2026 में उसी तरह 15 साल के TMC राज का अंत हो गया। BJP ने दूसरे चरण की 142 सीटों में 2021 की 18 से बढ़कर 66 सीटें जीत लीं। यह BJP के लिए 2014 लोकसभा जीत के बाद सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
अब सवाल यह है कि BJP बंगाल का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा? शुभेंदु अधिकारी का नाम सबसे आगे चल रहा है।
बंगाल के भविष्य पर असर
- यह बदलाव बंगाल के विकास, कानून-व्यवस्था, उद्योग निवेश और युवा रोजगार पर बड़ा प्रभाव डालेगा।
- TMC के 15 साल में राज्य की छवि “चाटुकारिता और भय” की बन गई थी।
- नई सरकार कितना बदलाव ला पाती है, यह देखना बाकी है।
ममता बनर्जी की हार व्यक्तिगत नहीं, बल्कि शासन की नाकामी, वादाखिलाफी और वोट बैंक की राजनीति की हार है। BJP की जीत विकास, अच्छे शासन और हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों के असंतोष का नतीजा है। बंगाल अब नए युग की शुरुआत कर रहा है।
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