बिहार बोर्ड परीक्षा : बिहार में बीएसईबी इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 के पहले दिन ही हंगामा मच गया। 2 फरवरी 2026 को नवादा और पटना जैसे जिलों में छात्राओं को देर से पहुंचने पर एंट्री नहीं मिली, जिसके बाद कुछ ने ऊंची दीवार फांदकर जबरदस्ती परीक्षा केंद्र में घुसने की कोशिश की। वहीं पटना में सिर्फ दो मिनट की देरी पर गेट बंद होने से कई छात्राएं बाहर रोने लगीं। यह घटनाएं बिहार बोर्ड की सख्त प्रवेश नीति – परीक्षा से 30 मिनट पहले केंद्र पहुंचने का नियम – का नतीजा हैं। आइए जानते हैं पूरी घटना, कारण, परिणाम और बोर्ड परीक्षाओं में ऐसी सख्ती के पीछे की वजह।
नवादा में दीवार फांदने की चौंकाने वाली घटना
नवादा जिले में बोर्ड परीक्षा के लिए 36 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे, जहां कुल 33,046 परीक्षार्थी शामिल हो रहे हैं। कन्हाई नगर स्थित कन्हाई इंटर विद्यालय परीक्षा केंद्र पर कुछ छात्राएं निर्धारित समय (सुबह 9:30 बजे परीक्षा शुरू, 9 बजे तक पहुंचना अनिवार्य) के बाद पहुंचीं। गेट बंद होने पर उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया।

इसके बाद छात्राओं ने ऊंची दीवार फांदकर अंदर घुसने की कोशिश की। वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं, जहां छात्राएं दीवार पर चढ़ती और कूदती दिख रही हैं। कुछ अभिभावक भी मदद करते नजर आए। इस घटना में 16 छात्र-छात्राएं (9 गांधी इंटर स्कूल, 6 कन्या इंटर स्कूल, 1 केएलएस स्कूल से) पकड़ी गईं। पुलिस ने उन्हें नगर थाने ले जाकर एफआईआर दर्ज की। आरोप जबरन प्रवेश की कोशिश का है। बाद में नोटिस देकर छोड़ दिया गया, लेकिन बोर्ड नियमों के तहत दो साल तक परीक्षा से वंचित होने का खतरा है।
- बीएसईबी ने पहले ही चेतावनी जारी की थी कि गेट बंद होने के बाद दीवार फांदना या जबरन
- घुसना क्रिमिनल ट्रेसपास माना जाएगा। ऐसे में दो साल की परीक्षा बैन और एफआईआर होगी।
- सेंटर सुपरिंटेंडेंट पर भी सस्पेंशन और लीगल एक्शन का प्रावधान है।
पटना में सिर्फ दो मिनट की देरी पर रो पड़ीं छात्राएं!
- पटना में स्थिति और भावुक थी। कई छात्राओं को दो मिनट की देरी पर गेट से रोक दिया गया।
- वे बाहर दरवाजा खुलवाने की गुहार लगाती रहीं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
- कुछ लड़कियां गेट के बाहर फूट-फूटकर रोने लगीं। यह दृश्य छात्राओं
- के मानसिक दबाव और भविष्य की चिंता को दिखाता है।
- बिहार बोर्ड ने सभी केंद्रों पर सख्त निर्देश दिए थे – 30 मिनट पहले पहुंचना अनिवार्य
- ताकि नकल और अव्यवस्था रोकी जा सके। लेकिन ग्रामीण इलाकों में परिवहन की
- समस्या, ट्रैफिक और अन्य कारणों से देरी आम है।
बिहार बोर्ड परीक्षाओं में सख्ती के पीछे कारण
#बिहार में बोर्ड परीक्षाएं हमेशा विवादों में रहती हैं। पिछले सालों में नकल, पेपर लीक और अव्यवस्था की घटनाएं सामने आईं। इसलिए बीएसईबी ने इस बार नकल-मुक्त परीक्षा के लिए कड़े कदम उठाए:
- 30 मिनट पहले पहुंचना अनिवार्य।
- गेट बंद होने के बाद कोई एंट्री नहीं।
- अवैध प्रवेश पर दो साल बैन + एफआईआर।
- सेंटर पर CCTV, फ्लाइंग स्क्वॉड और पुलिस तैनात।
यह सख्ती नकल रोकने के लिए है, लेकिन छात्रों पर दबाव बढ़ा रही है। विशेषकर लड़कियों के लिए, जहां सुरक्षा और समय प्रबंधन की चुनौतियां ज्यादा हैं।
अन्य जिलों में भी हंगामा
- नवादा और पटना के अलावा बेगूसराय, रोहतास आदि जिलों में भी देरी से पहुंचने पर हंगामा हुआ।
- कुछ छात्र घायल भी हुए। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि जिनकी परीक्षा छूटी, उन्हें दोबारा मौका मिल सकता है
- लेकिन नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी।
समय पर पहुंचना जरूरी, लेकिन लचीलापन भी चाहिए!
ये घटनाएं छात्रों की मेहनत और परीक्षा व्यवस्था के बीच टकराव दिखाती हैं। एक तरफ नकल रोकना जरूरी है, दूसरी तरफ छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और पहुंच की समस्या पर ध्यान देना चाहिए। अभिभावकों और छात्रों को सलाह है – परीक्षा से पहले ही तैयारी और समय प्रबंधन पर फोकस करें। बोर्ड को भी ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधा या थोड़ा लचीलापन देने पर विचार करना चाहिए।