बद्रीनाथ धाम कपाट : उत्तराखंड के चारधाम यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बद्रीनाथ धाम हर साल लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनता है। भगवान विष्णु के इस पावन धाम को “भू-वैकुंठ” भी कहा जाता है। शीतकाल में भारी बर्फबारी के कारण मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं और बसंत ऋतु में फिर से खुलते हैं। हाल ही में बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तारीख 2026 का ऐलान कर दिया गया है। आइए जानते हैं पूरी जानकारी – कब खुलेंगे कपाट, शुभ मुहूर्त, प्रक्रिया, महत्व और यात्रा से जुड़े रोचक तथ्य।
बद्रीनाथ धाम कपाट खुलने की तारीख 2026 – आधिकारिक घोषणा
23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी के पावन पर्व पर टिहरी जिले के नरेंद्र नगर स्थित राजदरबार में पारंपरिक तरीके से कपाट खुलने की तिथि घोषित की गई। महाराजा मनु जयेंद्र शाह और राजपुरोहित आचार्य कृष्ण प्रसाद उनियाल ने पंचांग, ग्रह-नक्षत्र और शुभ योगों का गहन अध्ययन करने के बाद फैसला लिया कि बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल 2026 को खुलेंगे।
शुभ मुहूर्त: सुबह 6 बजकर 15 मिनट (ब्रह्म मुहूर्त) में वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और विशेष अनुष्ठानों के साथ सिंहद्वार खोला जाएगा। इस दिन “जय बद्री विशाल” के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठेगा।

- (नोट: कुछ स्रोतों में 24 अप्रैल का उल्लेख है, लेकिन आधिकारिक राजदरबार घोषणा
- और अधिकांश समाचार स्रोत 23 अप्रैल की पुष्टि करते हैं। यात्रा प्लानिंग से पहले
- आधिकारिक वेबसाइट या बद्रीनाथ मंदिर समिति से कन्फर्म करें।)
कपाट खुलने की पारंपरिक प्रक्रिया!
बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलना एक भव्य धार्मिक आयोजन है। मुख्य बिंदु:
- पूर्व तैयारी: कपाट खुलने से पहले गाडू घड़ा पूजन होता है। तिल के तेल से भरा कलश मंदिर पहुंचाया जाता है।
- उद्घाटन अनुष्ठान: ब्रह्म मुहूर्त में गणेश पूजा, शंख ध्वनि और वैदिक मंत्रों के बीच मुख्य द्वार के ताले खोले जाते हैं। डिमरी समाज और मुख्य रावल की विशेष भूमिका होती है।
- पहला दर्शन: कपाट खुलते ही अखंड दीप (जो शीतकाल में भी जलता रहता है)
- के दर्शन होते हैं। फिर महाभिषेक, विशेष श्रृंगार और आरती की जाती है।
- पहला दिन: पहले दिन सीमित समय के लिए दर्शन होते हैं, फिर नियमित पूजा-अर्चना शुरू हो जाती है।
बद्रीनाथ धाम का महत्व और इतिहास
- #बद्रीनाथ धाम चारधाम यात्रा का अंतिम पड़ाव है। भगवान विष्णु यहां बद्री विशाल रूप में विराजमान हैं।
- मान्यता है कि आदि शंकराचार्य ने इस मंदिर की पुनर्स्थापना की थी।
- शीतकाल में मूर्ति को पांडुकेश्वर या जोशीमठ के नरसिंह मंदिर में ले जाया जाता है, जहां पूजा जारी रहती है।
कपाट खुलने का दिन चारधाम यात्रा की शुरुआत माना जाता है। इस दिन दर्शन से मोक्ष की प्राप्ति और विशेष पुण्य मिलता है। हजारों श्रद्धालु इस शुभ पल के साक्षी बनने के लिए दूर-दूर से आते हैं।
यात्रा टिप्स और तैयारी – 2026 के लिए
- बेस्ट टाइम: अप्रैल-मई में मौसम सुहावना रहता है, लेकिन बर्फबारी की संभावना चेक करें।
- रजिस्ट्रेशन: चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो सकता है। बद्रीनाथ मंदिर समिति की वेबसाइट पर अपडेट रहें।
- यात्रा मार्ग: हरिद्वार/ऋषिकेश से बस, टैक्सी या हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध। पांडुकेश्वर से पैदल या घोड़े से जाना पड़ता है।
- सावधानियां: ऊंचाई ज्यादा होने से एल्टीट्यूड सिकनेस से बचें। गर्म कपड़े, दवाइयां और पानी साथ रखें।
- कपाट बंद होने की तारीख: आमतौर पर दीपावली या भाई दूज के आसपास
- (2026 में नवंबर में संभावित)। सटीक तिथि विजयादशमी पर घोषित होगी।
बद्रीनाथ धाम कपाट खुलने की तारीख 23 अप्रैल 2026 भक्तों के लिए एक नई आध्यात्मिक शुरुआत है। बसंत पंचमी पर घोषित यह तिथि शुभ योगों पर आधारित है और लाखों लोगों की आस्था को जोड़ती है। अगर आप चारधाम यात्रा 2026 प्लान कर रहे हैं, तो जल्दी तैयारी शुरू कर दें। भगवान बद्री विशाल के दर्शन से जीवन धन्य हो जाता है।