पीएम शहबाज़ शरीफ : 11 दिसंबर 2025 को इंटरनेशनल माउंटेन डे पर पाकिस्तान के पीएम शहबाज़ शरीफ ने पहाड़ों और ग्लेशियरों की सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया। ग्लेशियरों का जलवायु परिवर्तन से खतरा, इंडस नदी बेसिन पर असर। थीम माउंटेन ग्लेशियरों की जल, भोजन और आजीविका में भूमिका। पर्यावरण संरक्षण
11 दिसंबर 2025 को विश्व स्तर पर मनाए जा रहे इंटरनेशनल माउंटेन डे के अवसर पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने एक महत्वपूर्ण संदेश जारी किया। इस दिन की थीम “माउंटेन ग्लेशियरों की जल, भोजन और आजीविका में महत्वपूर्ण भूमिका” है, जो पाकिस्तान जैसे देश के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है। पीएम शहबाज़ ने वैश्विक समुदाय के साथ एकजुटता दिखाते हुए पहाड़ों और ग्लेशियरों की सुरक्षा के लिए सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया।
इंटरनेशनल माउंटेन डे का महत्व और पाकिस्तान का योगदान

हर साल 11 दिसंबर को मनाया जाने वाला इंटरनेशनल माउंटेन डे पहाड़ों की पारिस्थितिकीय, सांस्कृतिक और आर्थिक भूमिका को हाइलाइट करता है। इस वर्ष की थीम ग्लेशियरों पर केंद्रित है, जो जल संसाधनों, कृषि उत्पादन और आजीविका के लिए जीवन रेखा हैं। पाकिस्तान ने इस दिन को वैश्विक समुदाय के साथ एकजुट होकर मनाया, जो देश की पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को दर्शाता है। पीएम शहबाज़ ने अपने संदेश में कहा, “ये ग्लेशियर पाकिस्तान की जल प्रणाली की रीढ़ हैं।” यह बयान न सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता फैलाता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर देता है। पाकिस्तान, जो दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वतों का घर है, वैश्विक जलवायु संकट से सबसे अधिक प्रभावित देशों में शुमार है।
पाकिस्तान के ग्लेशियर: प्रकृति का अनमोल तोहफा और खतरे की घंटी
पाकिस्तान को प्रकृति ने अपार संपदा दी है। यहां 7,000 से अधिक ग्लेशियर मौजूद हैं, जिनमें सियाचिन, बाल्टोरो, बियाफो और बतुरा जैसे दुनिया के सबसे बड़े और आश्चर्यजनक ग्लेशियर शामिल हैं। ये ग्लेशियर इंडस नदी बेसिन को पोषित करते हैं, जो देश की कृषि, जलविद्युत उत्पादन और पेयजल आपूर्ति का मुख्य स्रोत है। उत्तरी उच्चभूमि से लेकर तटीय मैदानों तक लाखों लोगों की आजीविका इन्हीं पर निर्भर है। लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण ये ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। ग्लेशियर झील विस्फोट बाढ़ (GLOF), पर्यावरणीय क्षरण और ग्लोबल वार्मिंग ने जल सुरक्षा, खाद्य उत्पादन, जैव विविधता और आजीविका को खतरे में डाल दिया है।
#पाकिस्तान में ग्लेशियरों की संख्या दुनिया में दूसरी सबसे अधिक है, लेकिन इनकी सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है। हाल के वर्षों में GLOF घटनाओं ने उत्तरी क्षेत्रों में तबाही मचाई है, जिससे बाढ़ और भूस्खलन बढ़े हैं। पीएम शहबाज़ ने इन चुनौतियों को रेखांकित करते हुए कहा कि सामूहिक संकल्प के बिना इन प्राकृतिक संसाधनों को बचाना असंभव है। यह संदेश न सिर्फ सरकार की प्रतिबद्धता दिखाता है, बल्कि नागरिकों को भी जिम्मेदार बनाता है।
पीएम शहबाज़ शरीफ के प्रमुख बयान: सामूहिक कार्रवाई का आह्वान
पीएम के संदेश में कई महत्वपूर्ण बिंदु हैं जो पहाड़ों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय संस्थानों, पर्यावरण एजेंसियों और पर्यटन संगठनों की सराहना की, जो पर्वत संरक्षण पर जागरूकता फैला रहे हैं। प्रमुख बिंदु:
- जलवायु लचीलापन निर्माण: ग्लेशियरों को बचाने के लिए जलवायु अनुकूलन उपाय अपनाने की जरूरत।
- जिम्मेदार भूमि उपयोग: अवैध खनन और अतिक्रमण रोकना।
- सस्टेनेबल टूरिज्म: पर्यटन को पर्यावरण-अनुकूल बनाना, ताकि स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो।
- स्थानीय समुदायों की भागीदारी: पहाड़ी समुदाय सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षक हैं, उन्हें संरक्षण प्रयासों का केंद्र बनाना चाहिए।
- यूथ का योगदान: युवाओं को पर्यावरण संरक्षण के दूत बनाने का आह्वान।
#पीएम ने जोर दिया कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए पहाड़ों और ग्लेशियरों को संरक्षित करने के लिए संयुक्त प्रयास जरूरी हैं। यह आह्वान पाकिस्तान की पर्यावरण नीति को मजबूत करता है, जो ग्लोबल ग्रीन न्यू डील जैसे अंतरराष्ट्रीय प्रयासों से जुड़ता है।
चुनौतियां और समाधान: पाकिस्तान में ग्लेशियर संरक्षण की राह
पाकिस्तान के ग्लेशियरों का पिघलना वैश्विक संकट का हिस्सा है। 2022 की बाढ़ जैसी घटनाएं GLOF का परिणाम थीं, जिसने देश को अरबों डॉलर का नुकसान पहुंचाया। जैव विविधता पर असर पड़ रहा है, और खाद्य सुरक्षा खतरे में है। समाधान के रूप में:
- जागरूकता अभियान: स्कूलों और समुदायों में शिक्षा।
- तकनीकी हस्तक्षेप: सैटेलाइट मॉनिटरिंग और जलवायु मॉडलिंग।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग: UN और अन्य देशों से फंडिंग और तकनीक साझा करना।
- नीतिगत कदम: ग्रीन पाकिस्तान प्रोग्राम को मजबूत करना।
ये उपाय न सिर्फ पर्यावरण बचाएंगे, बल्कि स्थानीय आजीविका को भी बढ़ावा देंगे।
साइड-बाय-साइड ग्लेशियर फैक्ट्स स्नैपशॉट:
| ग्लेशियर नाम | स्थान | महत्व |
|---|---|---|
| सियाचिन | कराकोरम रेंज | दुनिया का सबसे ऊंचा ग्लेशियर |
| बाल्टोरो | हिमालय | सबसे लंबा ग्लेशियर (62 किमी) |
| बियाफो | हिंदूकुश | जल स्रोत और जैव विविधता हॉटस्पॉट |
| बतुरा | कराकोरम | हाइड्रोपावर के लिए महत्वपूर्ण |
पर्यावरण संरक्षण में हर नागरिक की भूमिका
पीएम शहबाज़ शरीफ का यह आह्वान पहाड़ों और ग्लेशियरों की सुरक्षा के लिए एक मील का पत्थर है। इंटरनेशनल माउंटेन डे 2025 पर जारी यह संदेश हमें याद दिलाता है कि सामूहिक कार्रवाई से ही हम अपनी प्राकृतिक विरासत को बचा सकते हैं। पाकिस्तान जैसे देशों के लिए यह न सिर्फ चुनौती, बल्कि अवसर भी है – सस्टेनेबल विकास की दिशा में। क्या आप पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रहे हैं? कमेंट्स में अपनी राय शेयर करें। लेटेस्ट पर्यावरण न्यूज के लिए हमें फॉलो करें!