झारखंड चाईबासा एनकाउंटर : झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में सारंडा जंगल के घने इलाके में नक्सल विरोधी अभियान ने नया इतिहास रच दिया है। चाईबासा के किरीबुरु थाना क्षेत्र में गुरुवार सुबह से शुरू हुई मुठभेड़ अब 36 घंटे से जारी है। सुरक्षाबलों ने अब तक 21 नक्सलियों को मार गिराया है, जिसमें 2.35 करोड़ रुपये के इनामी खूंखार नक्सली अनल दा (पतिराम मांझी उर्फ अनल दा तूफान दा) भी शामिल हैं। यह ऑपरेशन माओवादी संगठन की कमर तोड़ने वाला माना जा रहा है। आइए जानते हैं पूरी घटना मारे गए नक्सलियों के नाम, बरामद हथियार और पुलिस की कार्रवाई का विस्तार।
मुठभेड़ कब और कहां शुरू हुई?
22 जनवरी 2026 को सुबह करीब 6 बजे सारंडा जंगल के कुमड़ी और होंजोदिरी गांव के बीच बीहड़ इलाके में सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन और झारखंड पुलिस के ज्वाइंट ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों से भिड़ंत हुई। गुप्त सूचना के आधार पर चलाए गए सर्च अभियान में अनल दा की 25 सदस्यीय टोली को घेर लिया गया। नक्सलियों की ओर से पहले फायरिंग हुई, जिसके जवाब में सुरक्षाबलों ने भारी कार्रवाई की।

- गुरुवार: 15 नक्सलियों की मौत की पुष्टि
- शुक्रवार: 6 और शव बरामद
- कुल: 21 नक्सली मारे गए
मुठभेड़ इतनी भीषण थी कि पूरा इलाका खलबली मच गई। हेलीकॉप्टर और ड्रोन की मदद से सर्च ऑपरेशन जारी है।
प्रमुख नक्सली जो मारे गए!
- इस एनकाउंटर में सबसे बड़ा झटका अनल दा को लगा। वह सीपीआई (माओइस्ट)
- के सेंट्रल कमेटी सदस्य और मिलिट्री कमीशन के प्रमुख थे। उनके सिर पर:
- झारखंड सरकार: 1 करोड़ रुपये
- ओडिशा सरकार: 1.2 करोड़ रुपये
- एनआईए: 15 लाख रुपये कुल इनाम: 2.35 करोड़ रुपये
- अन्य मारे गए नक्सलियों में सैक कमांडर अनमोल उर्फ सुशांत (25 लाख + ओडिशा
- में 65 लाख का इनाम) और एक दर्जन से ज्यादा शामिल हैं। मारे गए में कई महिला नक्सली भी हैं।
- 11 से ज्यादा की पहचान हो चुकी है।
बरामद हथियार और विस्फोटक
- सर्च अभियान में भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद हुए हैं।
- हालांकि सटीक संख्या अभी जारी नहीं की गई, लेकिन पुलिस का कहना है
- कि यह माओवादियों के हथियारों का बड़ा जखीरा था।
पुलिस और अधिकारियों के बयान
आईजी अभियान माइकल राज एस ने कहा: “यह ऑपरेशन माओवादी संगठन की कमर तोड़ने वाला है। सर्च जारी है, और हथियार-विस्फोटक बरामद हो रहे हैं।” उन्होंने बताया कि सुरक्षाबलों ने बिना किसी नुकसान के कार्रवाई की।
#सारंडा जंगल कोल्हान क्षेत्र में माओवादियों का गढ़ रहा है, जहां अनल दा जैसे बड़े नेता कई हमलों में शामिल थे। केंद्र सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2026 तक भारत को नक्सलवाद मुक्त करना है, और यह एनकाउंटर उसी दिशा में बड़ा कदम है।
सारंडा जंगल का महत्व और नक्सल समस्या
- सारंडा भारत के सबसे घने जंगलों में से एक है, जहां नक्सली लंबे समय से छिपे रहते हैं।
- यहां की चुनौतीपूर्ण भौगोलिक स्थिति के कारण ऑपरेशन मुश्किल होता है
- लेकिन हेलीकॉप्टर और ड्रोन के इस्तेमाल से सफलता मिल रही है।
- हाल के महीनों में झारखंड में कई बड़े एनकाउंटर हुए हैं, लेकिन यह सबसे बड़ा है।
चाईबासा एनकाउंटर में 21 नक्सलियों का सफाया सुरक्षाबलों की बहादुरी और रणनीति का नतीजा है। अनल दा जैसे टॉप लीडर की मौत से माओवादी संगठन को भारी झटका लगा है। अगर सर्च जारी रहा, तो और नक्सली सामने आ सकते हैं। यह घटना नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में नया अध्याय है। जवान शहीद न हों, यही कामना है।