चांदी में रिकॉर्ड गिरावट : (Silver) के बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिली। पिछले कुछ दिनों में चांदी का भाव रिकॉर्ड हाई स्तर 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम को पार करने के बाद अचानक भारी गिरावट आई। 30 जनवरी को इंटरनेशनल मार्केट में COMEX सिल्वर का भाव 31 प्रतिशत और गोल्ड 11 प्रतिशत नीचे लुढ़क गया। यह पिछले एक दशक में चांदी की सबसे बड़ी एक दिवसीय गिरावट थी। अब चांदी का भाव अपने ऑल-टाइम हाई से 35 प्रतिशत नीचे आ चुका है।
चांदी की गिरावट के मुख्य कारण
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह गिरावट अभी खत्म नहीं हुई है। Peace 360 के चीफ ग्लोबल स्ट्रेटेजिस्ट अमित गोयल ने कहा, “मुझे लग रहा है कि मौजूदा कीमत से अभी 30 प्रतिशत और चांदी का भाव गिरेगा। जून 2026 तक चांदी का भाव एमसीएक्स पर 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच सकता है।”

- मार्जिन मनी में बढ़ोतरी: शिकागो मर्सेंटाइल एक्सचेंज (CME) ने गोल्ड के लिए मार्जिन 6% से बढ़ाकर 8% और सिल्वर के लिए 11% से बढ़ाकर 15% कर दिया। इससे लीवरेज्ड पोजीशंस वाले ट्रेडर्स पर मार्जिन कॉल आया और फोर्स्ड सेलिंग हुई।
- प्रॉफिट बुकिंग: बड़े इंस्टीट्यूशनल निवेशकों ने रिकॉर्ड हाई पर प्रॉफिट बुक किया, जिससे बिकवाली का दबाव बढ़ा।
- ज्वेलरी डिमांड में कमी: भारत में सोने-चांदी की तेजी से ज्वेलरी बिजनेस को झटका लगा। डिमांड प्रभावित हुई।
- बजट 2026 की उम्मीद: बाजार यूनियन बजट में इंपोर्ट ड्यूटी कटौती की उम्मीद कर रहा है
- जो कीमतों पर दबाव डाल सकता है।
- ग्लोबल मार्केट: इंटरनेशनल और घरेलू बाजार दोनों में नकारात्मक रुख।
- फेड की पॉलिसी और डॉलर की मजबूती ने भी प्रभाव डाला।
आज का चांदी का भाव (31 जनवरी 2026)
- प्रति ग्राम: लगभग ₹350 (कुछ शहरों में ₹379 तक)
- प्रति किलोग्राम: ₹3,50,000 (MCX पर मार्च कॉन्ट्रैक्ट में भारी गिरावट, पहले दिन से ₹1 लाख+ नीचे)
- ऑल-टाइम हाई से गिरावट: ₹1.28 लाख प्रति किलो तक सस्ती हुई चांदी।
- गुडरिटर्न्स, बैंकबाजार और अन्य स्रोतों के अनुसार, चांदी का भाव 1 जनवरी 2026
- पर ₹2,38,000 प्रति किलो था, जो जनवरी के अंत तक ₹3,60,000+ पहुंचा
- लेकिन अब भारी क्रैश के बाद नीचे आया।
निवेशकों के लिए क्या मतलब?
- चांदी में यह गिरावट निवेशकों के लिए बड़ा झटका है, खासकर उन लोगों के लिए जो हाल के हाई पर खरीदे थे।
- लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह खरीदने का मौका भी हो सकता है
- क्योंकि लॉन्ग टर्म में इंडस्ट्रियल डिमांड (सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स, EV) मजबूत है।
- हालांकि, शॉर्ट टर्म में और गिरावट की संभावना है।