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चैत्र नवरात्रि 2026 Day 5 मां स्कंदमाता पूजा विधि, मंत्र, कथा और भोग!

On: March 23, 2026 5:31 AM
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चैत्र नवरात्रि 2026 : चैत्र नवरात्रि का पांचवां दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता को समर्पित होता है। वर्ष 2026 में यह पावन दिन 23 मार्च को मनाया जा रहा है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

मां स्कंदमाता का महत्व

मां स्कंदमाता, भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं और मातृत्व, करुणा और शक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं। उनका स्वरूप अत्यंत दिव्य होता है—वे सिंह पर विराजमान रहती हैं और अपनी गोद में बाल स्कंद को धारण करती हैं।

चैत्र नवरात्रि 2026 मां स्कंदमाता पूजा विधि और मंत्र
चैत्र नवरात्रि 2026 के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा करते हुए भक्त

धार्मिक मान्यता है कि मां स्कंदमाता की पूजा करने से

  • संतान सुख की प्राप्ति होती है
  • मानसिक शांति मिलती है
  • भय और नकारात्मकता दूर होती है
  • घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है

मां स्कंदमाता पूजा विधि

नवरात्रि के पांचवें दिन पूजा करते समय विशेष नियमों का पालन करना चाहिए:

  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें
  • साफ या सफेद वस्त्र धारण करें
  • पूजा स्थान को साफ करके मां की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें
  • रोली, अक्षत, चंदन और कमल के फूल अर्पित करें
  • घी का दीपक जलाएं और धूप दिखाएं
  • मां के मंत्रों का जाप करें
  • आरती करें और प्रसाद वितरित करें

इस दिन शाम के समय भी पुनः पूजा करना शुभ माना जाता है।

मां स्कंदमाता के मंत्र

पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करने से विशेष लाभ मिलता है:

मूल मंत्र:
ॐ देवी स्कंदमातायै नमः

ध्यान मंत्र:
सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी॥

स्तुति मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु स्कंदमाता रूपेण संस्थिता…

इन मंत्रों का 108 बार जाप करने से मन की शुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

मां स्कंदमाता को क्या भोग लगाएं!

मां स्कंदमाता को सात्विक और मीठे भोग अत्यंत प्रिय हैं। इस दिन विशेष रूप से ये भोग लगाएं:

  • केला (सबसे प्रिय)
  • खीर
  • हलवा
  • पंचामृत
  • मौसमी फल

ध्यान रखें कि भोग में लहसुन और प्याज का उपयोग न करें।

मां स्कंदमाता की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, तारकासुर नामक राक्षस को वरदान मिला था कि उसका वध केवल भगवान शिव के पुत्र द्वारा ही संभव है। इस कारण वह अत्याचार करने लगा।

तब मां पार्वती ने स्कंदमाता का रूप धारण किया और भगवान कार्तिकेय को युद्ध के लिए तैयार किया। बाद में कार्तिकेय ने तारकासुर का वध किया और देवताओं को उसके आतंक से मुक्त कराया।

इस कथा से यह शिक्षा मिलती है कि मां की कृपा से हर कठिनाई का अंत संभव है।

पूजा करने के लाभ

मां स्कंदमाता की आराधना से भक्तों को अनेक लाभ प्राप्त होते हैं:

  • संतान प्राप्ति के योग बनते हैं
  • ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि होती है
  • जीवन की बाधाएं दूर होती हैं
  • घर में सुख-शांति आती है

चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। यदि आप सच्चे मन और श्रद्धा से पूजा करते हैं, मंत्रों का जाप करते हैं और कथा का पाठ करते हैं, तो मां की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।

इस दिन भक्ति भाव से की गई पूजा आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है और हर मनोकामना पूर्ण कर सकती है।

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