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कांग्रेस कटाक्ष धनखड़ पता है धनखड़ के साथ क्या हुआ था? CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग खारिज होने पर कांग्रेस का तीखा कटाक्ष

On: April 7, 2026 4:00 AM
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कांग्रेस कटाक्ष धनखड़ : राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर पुरानी यादें ताजा हो गई हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए महाभियोग प्रस्ताव को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने 6 अप्रैल 2026 को अस्वीकार कर दिया। इस फैसले के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर कटाक्ष करते हुए पूछा— “हम जानते हैं कि राज्यसभा के पिछले सभापति के साथ क्या हुआ था जिन्होंने विपक्षी सांसदों की याचिका को स्वीकार कर लिया था।”

यह इशारा साफ तौर पर पूर्व उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के पूर्व सभापति जगदीप धनखड़ की ओर था।

कांग्रेस कटाक्ष धनखड़ बयान और राजनीतिक विवाद
कांग्रेस कटाक्ष धनखड़ से जुड़ा बयान और राजनीतिक प्रतिक्रिया।

जगदीप धनखड़ ने क्या किया था?

जगदीप धनखड़ ने जुलाई 2025 में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अचानक उपराष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति पद से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे से ठीक पहले उन्होंने विपक्ष द्वारा लाए गए एक महाभियोग नोटिस को स्वीकार किया था। यह नोटिस इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ था।

विपक्षी सदस्यों ने न्यायाधीश यशवंत वर्मा पर गंभीर आरोप लगाए थे और उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की थी। धनखड़ ने उस नोटिस को स्वीकार कर संसदीय प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का संकेत दिया था। लेकिन इसके कुछ घंटों बाद ही उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया।

कांग्रेस और विपक्ष अब इसी घटना को याद दिलाकर कह रहा है कि जो सभापति विपक्ष की याचिका स्वीकार करता है, उसके साथ क्या होता है। जयराम रमेश का पोस्ट इस संदर्भ में काफी चर्चित हो रहा है।

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग नोटिस क्या था?

12 मार्च 2026 को विपक्ष के 193 सांसदों (लोकसभा में 130 और राज्यसभा में 63) ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग नोटिस दिया था। विपक्ष ने उन पर “कार्यपालिका के इशारे पर काम करने”, “भेदभावपूर्ण आचरण” और “स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)” प्रक्रिया के जरिए बड़े पैमाने पर मतदाताओं को वोटर लिस्ट से बाहर करने का आरोप लगाया था।

हालांकि, दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों ने नोटिस पर विस्तृत विचार-विमर्श के बाद इसे खारिज कर दिया। उन्होंने न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 की धारा 3 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि प्रस्ताव में पर्याप्त आधार नहीं है।

लोकसभा सचिवालय और राज्यसभा सचिवालय ने अलग-अलग बुलेटिन जारी कर इसकी जानकारी दी।

कांग्रेस कटाक्ष धनखड़ संवैधानिक प्रावधान क्या कहते हैं?

  • मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 324(5) और मुख्य चुनाव आयुक्त
  • (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 के तहत तय है।
  • इसे सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह ही महाभियोग के जरिए हटाया जा सकता है।
  • इसके लिए लोकसभा में कम से कम 100 और राज्यसभा में 50 सदस्यों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं।
  • विपक्ष ने हस्ताक्षर की संख्या पूरी कर ली थी, लेकिन पीठासीन अधिकारियों
  • ने इसे पर्याप्त आधार न मानते हुए खारिज कर दिया।

धनखड़ प्रकरण: राजनीतिक बहस का नया मोड़

  • जगदीप धनखड़ का इस्तीफा उस समय काफी चर्चा में रहा था। कई लोग इसे
  • महाभियोग नोटिस स्वीकार करने से जोड़कर देख रहे थे।
  • हालांकि, धनखड़ ने औपचारिक रूप से स्वास्थ्य कारण ही बताया था।
  • अब कांग्रेस इस घटना को याद दिलाकर वर्तमान राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन
  • और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।
  • विपक्ष का कहना है कि सत्तापक्ष संस्थाओं को बचाने के लिए दबाव बना रहा है
  • जबकि सरकार इसे संसदीय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा बता रही है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीठासीन अधिकारी को महाभियोग नोटिस स्वीकार करने या खारिज करने में व्यापक विवेकाधिकार होता है। उन्हें सभी पहलुओं का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन करना पड़ता है। अगर नोटिस में आरोप निराधार या राजनीतिक रूप से प्रेरित लगते हैं तो उन्हें खारिज किया जा सकता है।

इस घटना ने एक बार फिर संसद की गरिमा, विपक्ष की भूमिका और संवैधानिक पदों की स्वतंत्रता पर बहस छेड़ दी है।

CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव खारिज होने के बाद कांग्रेस का जगदीप धनखड़ वाले कटाक्ष ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। चाहे यह सिर्फ राजनीतिक तीर हो या वाकई कोई सबक, लेकिन यह साफ दिखाता है कि संसदीय प्रक्रियाएं कितनी संवेदनशील और विवादास्पद हो सकती हैं।

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