अरविंद केजरीवाल ED : दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति (शराब घोटाला) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल को नोटिस जारी कर दिया है। बुधवार को हुई सुनवाई में केजरीवाल की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ, जिसके बाद जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत ने नया नोटिस भेजने का आदेश दिया और अगली सुनवाई 29 अप्रैल को तय की।
यह याचिका निचली अदालत के उस फैसले के खिलाफ है जिसमें केजरीवाल को ED के समन की कथित अवहेलना के आरोप से बरी कर दिया गया था। आइए जानते हैं इस मामले की पूरी डिटेल्स।

क्या है पूरा मामला?
दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति 2021-22 से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने अरविंद केजरीवाल को कई बार समन जारी किए थे। एजेंसी का आरोप है कि केजरीवाल ने इन समनों का जानबूझकर पालन नहीं किया और जांच में शामिल नहीं हुए। निचली अदालत (राउज एवेन्यू कोर्ट) ने 22 जनवरी 2026 को केजरीवाल को इन आरोपों से बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि ED यह साबित नहीं कर पाई कि समन की अवहेलना जानबूझकर की गई थी।
- ED इस फैसले से सहमत नहीं है। एजेंसी ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर कर कहा
- कि निचली अदालत ने गंभीर गलती की है। ED के वकील जोहेब हुसैन ने कोर्ट में दलील
- दी कि केजरीवाल ने समन स्वीकार किया था लेकिन जवाब नहीं दिया। जब किसी दस्तावेज
- पर विवाद न हो तो उसे साबित करने की जरूरत नहीं होती। कई सुप्रीम कोर्ट
- और हाईकोर्ट के फैसले इस बात का हवाला देते हैं।
बुधवार की सुनवाई में केजरीवाल पक्ष की अनुपस्थिति पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सख्त रुख अपनाया। अदालत ने कहा, “प्रतिवादी को अग्रिम सूचना के बावजूद उपस्थित होने का विकल्प नहीं चुना। नया नोटिस जारी करें। मामले को 29 अप्रैल को सूचीबद्ध करें और ट्रायल कोर्ट रिकॉर्ड मंगवाएं।”
अरविंद केजरीवाल ED का क्या आरोप है?
- ED की याचिका में दावा किया गया है कि केजरीवाल ने बेबुनियाद आपत्तियां उठाकर
- जांच से बचने की कोशिश की। एजेंसी का कहना है कि शराब नीति बनाने में अन्य आरोपियों
- के साथ केजरीवाल के संपर्क थे। इस नीति के बदले में AAP को कथित रिश्वत मिली
- और कुछ लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
केजरीवाल फिलहाल इस मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट से मिली अंतरिम जमानत पर बाहर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने PMLA (धन शोधन रोकथाम अधिनियम) के तहत ‘गिरफ्तारी की जरूरत’ वाले मुद्दे को बड़ी पीठ के पास भेज दिया है।
CBI मामले में भी मिली राहत, लेकिन अपील लंबित
- उत्पाद शुल्क नीति मामले में CBI ने भी केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य
- को 27 फरवरी 2026 को बरी कर दिया था। CBI कोर्ट ने कहा कि उसका केस पूरी
- तरह निराधार साबित हुआ। हालांकि, CBI की इस फैसले के खिलाफ याचिका भी दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है।
- ED की मौजूदा याचिका सिर्फ समन अवहेलना वाले दो मामलों से जुड़ी है
- लेकिन इससे केजरीवाल की कानूनी लड़ाई और जटिल हो गई है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और प्रभाव
- AAP समर्थक इस पूरे मामले को राजनीतिक साजिश बता रहे हैं।
- वहीं, विपक्षी दलों का कहना है कि कानून अपनी राह पर है और कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।
- केजरीवाल की अंतरिम जमानत अभी बरकरार है, लेकिन हाईकोर्ट का यह नोटिस उनकी मुश्किलें बढ़ा सकता है।
दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला न सिर्फ केजरीवाल बल्कि शराब घोटाले से जुड़े पूरे मामले पर नजर रखने वालों के लिए महत्वपूर्ण है। अगली सुनवाई 29 अप्रैल को होगी, जब ट्रायल कोर्ट रिकॉर्ड के आधार पर आगे की दलीलें सुनाई जाएंगी।
अरविंद केजरीवाल के खिलाफ ED की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट का नोटिस एक बार फिर साबित करता है कि शराब नीति घोटाला अभी खत्म नहीं हुआ है। चाहे समन अवहेलना हो या मुख्य मनी लॉन्ड्रिंग केस, कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता और नेता इस मामले में केजरीवाल का साथ दे रहे हैं, लेकिन कोर्ट का अंतिम फैसला ही तय करेगा कि क्या होता है आगे।
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