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अरुणाचल प्रदेश के CM पेमा खांडू का परिवार अब CBI के रडार पर! 1270 करोड़ के ठेकों में भाई-भतीजावाद का आरोप, सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच के आदेश दिए!

On: April 6, 2026 9:30 AM
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अरुणाचल प्रदेश के CM : प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू और उनके परिवार से जुड़े 1270 करोड़ रुपये के सरकारी ठेकों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने CBI (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) को निर्देश दिया कि 1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2025 तक राज्य में दिए गए सभी सार्वजनिक कार्यों, ठेकों और कार्य आदेशों की जांच करे। खासतौर पर उन कंपनियों पर फोकस रहेगी जो मुख्यमंत्री के परिजनों से जुड़ी बताई जा रही हैं।

जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने CBI को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि दो सप्ताह के अंदर प्रारंभिक जांच (Preliminary Enquiry – PE) शुरू की जाए और 16 सप्ताह में अदालत में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जाए। विस्तृत आदेश का इंतजार है, लेकिन यह फैसला अरुणाचल प्रदेश की राजनीति और प्रशासन पर गहरा असर डाल सकता है।

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री से जुड़ा दृश्य
अरुणाचल प्रदेश के CM अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री की भूमिका और कार्यों पर एक नजर

मामला क्या है? 1270 करोड़ के ठेकों का आरोप

जनहित याचिका (PIL) में आरोप लगाया गया है कि पिछले 10 वर्षों में अरुणाचल प्रदेश सरकार ने करीब 1270 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके और कार्य आदेश मुख्यमंत्री पेमा खांडू के परिवार से जुड़ी चार कंपनियों को दिए गए। इनमें से कई ठेके ब्रांड ईगल्स नामक कंपनी को दिए गए, जिसकी मालिकानी पेमा खांडू के पिता दोरजी खांडू की दूसरी पत्नी रिंचिन ड्रेमा के पास बताई जाती है।

  • याचिका में हितों के टकराव (Conflict of Interest) का मुद्दा उठाया गया है।
  • याचिकाकर्ताओं का कहना है कि परिवार के सदस्यों की कंपनियों को बिना उचित प्रक्रिया
  • के बड़े पैमाने पर ठेके दिए गए, जो भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
  • पेमा खांडू के अलावा उनके भतीजे त्सेरिंग ताशी को भी मामले में पक्षकार बनाया गया है।
  • पेमा खांडू के पिता दोरजी खांडू 2007 से 2011 तक अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके थे
  • और 2011 में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई थी।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और आदेश

  • 2 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश सरकार से 2015 से 2025 तक दिए गए सभी ठेकों का विस्तृत हलफनामा मांगा था।
  • 17 फरवरी 2026 को अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
  • आज 6 अप्रैल को कोर्ट ने CBI को जांच सौंपने का आदेश दिया।

याचिका सेव मोन रीजन फेडरेशन और वॉलंटरी अरुणाचल सेना नामक दो NGOs की ओर से दायर की गई थी। इनकी तरफ से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी। राज्य सरकार की ओर से कहा गया था कि यह याचिका ‘प्रायोजित मुकदमा’ (Sponsored Litigation) है, लेकिन कोर्ट ने गंभीरता से सुनवाई की और CBI जांच का आदेश दिया।

अरुणाचल प्रदेश में भ्रष्टाचार के आरोप

  • अरुणाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी और सीमावर्ती राज्य में सड़क, पुल, बिजली
  • पानी और अन्य विकास कार्यों के ठेके अक्सर विवादों में रहते हैं। याचिका में दावा किया
  • गया कि कई ठेके बिना टेंडर या नाममात्र की प्रक्रिया से परिवार की कंपनियों को दिए गए।
  • कुल 1245 करोड़ रुपये टेंडर के जरिए और 25 करोड़ रुपये वर्क ऑर्डर के रूप में दिए गए।

यह मामला न केवल भ्रष्टाचार बल्कि पारदर्शिता और अच्छे शासन (Good Governance) के सवाल को भी उठाता है। अरुणाचल प्रदेश में विकास कार्यों की जरूरत बहुत ज्यादा है, लेकिन अगर ठेके पक्षपातपूर्ण तरीके से दिए जाते हैं तो आम जनता को फायदा नहीं पहुंचता।

अरुणाचल प्रदेश के CM पेमा खांडू सरकार की स्थिति

  • पेमा खांडू 2016 से अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और भाजपा के नेता हैं।
  • उन्होंने राज्य में विकास कार्यों को तेज करने का दावा किया है।
  • हालांकि इस मामले में अभी तक उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया
  • सामने नहीं आई है। राज्य सरकार पहले कोर्ट में याचिका को खारिज करने की कोशिश कर चुकी है।
  • CBI जांच शुरू होने के बाद स्थिति साफ हो सकेगी कि आरोप कितने सही हैं
  • या ये राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का नतीजा हैं।

विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषण

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश केंद्र और राज्य सरकार दोनों के लिए महत्वपूर्ण संदेश है। CBI जैसी केंद्रीय एजेंसी की जांच से मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित हो सकेगी। अरुणाचल प्रदेश जैसे संवेदनशील राज्य में भ्रष्टाचार के आरोप विकास कार्यों को प्रभावित कर सकते हैं और केंद्र-राज्य संबंधों पर भी असर डाल सकते हैं।

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ठेकों की पारदर्शी प्रक्रिया (E-Tendering, Competitive Bidding) को और मजबूत करने की जरूरत है ताकि ऐसे विवाद भविष्य में न हों।

आगे क्या होगा?

  • CBI को दो सप्ताह में प्रारंभिक जांच शुरू करनी होगी।
  • 16 सप्ताह बाद स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश होगी।
  • अगर प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी पाई गई तो केस FIR में बदल सकता है और आगे की जांच चलेगी।

यह मामला अरुणाचल प्रदेश की राजनीति को हिला सकता है। विपक्षी दल पहले से ही भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे थे, अब CBI जांच के बाद स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी।

नागरिकों और विकास के नजरिए से अरुणाचल प्रदेश में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। अगर ठेके सही तरीके से दिए जाते हैं तो विकास तेज हो सकता है। आम जनता को उम्मीद है कि CBI जांच निष्पक्ष रहेगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी, साथ ही निर्दोषों को क्लीन चिट भी मिलेगी।

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