RBI सख्त कदम रुपया : भारतीय मुद्रा रुपया ने डॉलर के मुकाबले 12 साल की सबसे बड़ी एक दिन की तेजी दर्ज की है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के कड़े उपायों और सट्टेबाजी पर लगाई गई सख्ती के कारण रुपया गुरुवार को 1.8 प्रतिशत उछलकर 93.10 पर बंद हुआ। आज सोमवार को भी इसमें 0.3 प्रतिशत की और मजबूती देखी गई और यह 92.83 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। यह उछाल सितंबर 2013 के बाद सबसे बड़ी एक दिन की बढ़त है, जिसने बाजार में नई उम्मीद जगा दी है।
क्या हुआ ठीक घटना?
पिछले कुछ हफ्तों में रुपया लगातार कमजोर हो रहा था। अमेरिका-ईरान तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों में तेजी आई, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ा। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली और घरेलू कारणों से रुपया 95.21 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था।

लेकिन RBI ने तुरंत एक्शन लिया। मार्च के अंत में RBI ने बैंकों की नेट ओपन पोजीशन (विदेशी मुद्रा एक्सपोजर) को 100 मिलियन डॉलर तक सीमित कर दिया। साथ ही ऑफशोर नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड्स (NDF) पर सख्त रोक लगाई, जो सट्टेबाजों द्वारा रुपया कमजोर करने के लिए इस्तेमाल होता था। इन कदमों से बैंकों को 30 बिलियन डॉलर से ज्यादा के आर्बिट्रेज ट्रेड अनवाइंड करने पड़े। नतीजा? डॉलर की भारी बिकवाली हुई और रुपया जोरदार रिबाउंड कर गया।
RBI सख्त कदम रुपया RBI के सख्त उपायों का असर
RBI के इन कदमों ने बाजार में डॉलर की मांग को तुरंत घटा दिया। ब्लूमबर्ग और रॉयटर्स की रिपोर्ट्स के अनुसार, बैंकों ने 4 से 10 बिलियन डॉलर तक के ट्रेड पहले ही अनवाइंड कर दिए हैं। 10 अप्रैल की डेडलाइन से पहले और भी पोजीशन क्लोज होने की उम्मीद है, जिससे रुपया 91.50 से 92 के दायरे में पहुंच सकता है।
- CR Forex के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित पबारी ने कहा, “10 अप्रैल तक बैंक
- अपनी डॉलर पोजीशन समाप्त करेंगे, जिससे रुपया और मजबूत होगा।”
- यह पहली बार नहीं है जब RBI ने ऐसे असाधारण कदम उठाए।
- 2013 में भी इसी तरह की सख्ती से रुपया संभला था।
पिछले एक साल में रुपया कितना कमजोर हुआ?
- पिछले 12 महीनों में रुपया करीब 8.2 प्रतिशत कमजोर हुआ है। एशिया की अन्य मुद्राओं की
- तुलना में भी यह काफी दबाव में रहा। ईरान युद्ध से तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं
- जो भारत जैसे ऊर्जा आयातक देश के लिए चुनौती है। अगर युद्ध लंबा चला तो तेल
- कीमतें एक तिमाही तक ऊंची रह सकती हैं, जिससे रुपया दोबारा 96 तक कमजोर हो सकता है।
- मुथूट फिनकॉर्प की मुख्य अर्थशास्त्री अपूर्व जावडेकर का कहना है, “ईरान युद्ध अगर बढ़ा
- तो RBI को और हस्तक्षेप करना पड़ेगा, वरना रुपया फिर दबाव में आ जाएगा।”
बाजार और अर्थव्यवस्था पर असर
रुपये की इस तेजी से निर्यातकों को थोड़ी राहत मिली है, लेकिन आयातकों और विदेशी कर्ज चुकाने वालों को फायदा हुआ है। स्टॉक मार्केट में भी सकारात्मक संकेत दिखे। हालांकि, एशियाई मुद्राएं (थाईलैंड, दक्षिण कोरिया आदि) भी तेल आयात के कारण दबाव में हैं।
RBI की अगली मौद्रिक नीति बैठक आज से शुरू हो रही है। बुधवार को गवर्नर संजय मल्होत्रा के बयान पर पूरी बाजार की नजर टिकी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि RBI रुपये को स्थिर रखने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल भी कर रहा है, जिससे भंडार में कुछ गिरावट आई है।
आगे क्या होगा? विशेषज्ञों की राय
- अल्पकालिक रूप से रुपया 91.50-93 के दायरे में रह सकता है।
- लेकिन वैश्विक अनिश्चितता (तेल कीमतें, अमेरिका-ईरान तनाव, FII फ्लो) बनी हुई है।
- अगर RBI सख्ती जारी रखता है और तेल कीमतें नियंत्रण में रहीं तो रुपया और मजबूत हो सकता है।
- लंबे समय में आर्थिक सुधार, निर्यात बढ़ोतरी और FDI प्रवाह रुपये को मजबूती दे सकते हैं।
निवेशकों के लिए सलाह
- विदेशी मुद्रा में निवेश करने वाले सतर्क रहें।
- रुपये की अस्थिरता बढ़ी हुई है, इसलिए हेजिंग (बीमा) का विकल्प इस्तेमाल करें।
- RBI की पॉलिसी और ग्लोबल इवेंट्स पर नजर रखें।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि RBI भारतीय अर्थव्यवस्था की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने को तैयार है। पिछले कुछ दिनों की इस तेजी ने न सिर्फ बाजार को स्थिर किया है बल्कि निवेशकों का विश्वास भी बढ़ाया है।