QR कोड क्या है : आज के डिजिटल युग में QR कोड हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है। दुकानों में पेमेंट से लेकर विजिटिंग कार्ड, मेन्यू, टिकट और प्रोडक्ट जानकारी तक हर जगह QR कोड नजर आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि QR कोड का पूरा नाम क्या है और इसे किसने और कब बनाया था? आइए जानते हैं QR कोड के बारे में विस्तार से – इसका इतिहास, आविष्कार, काम करने का तरीका और कुछ दिलचस्प फैक्ट्स।
QR कोड का फुल फॉर्म क्या है?
#QR कोड का पूरा नाम Quick Response Code है। हिंदी में इसे त्वरित प्रतिक्रिया कोड कहा जाता है। यह नाम इसलिए रखा गया क्योंकि यह कोड बहुत तेजी से स्कैन होता है और तुरंत जानकारी देता है। QR कोड एक तरह का द्वि-आयामी बारकोड (2D Matrix Barcode) है, जिसमें काले-सफेद वर्गों का पैटर्न होता है।

QR कोड का इतिहास – कब और किसने बनाया?
#QR कोड का आविष्कार 1994 में जापान में हुआ था। दुनिया का पहला QR कोड ठीक 31 साल पहले (1994 में) तैयार किया गया। हैरानी की बात यह है कि इसे किसी फिनटेक, बैंक या टेक कंपनी ने नहीं बनाया, बल्कि कार कंपनी ने बनाया था।
टोयोटा की सहायक कंपनी Denso Wave ने इसे विकसित किया। इस प्रोजेक्ट के प्रमुख इंजीनियर मासाहिरो हारा (Masahiro Hara) थे। उस समय कार पार्ट्स को ट्रैक करने के लिए पारंपरिक 1D बारकोड इस्तेमाल होते थे, लेकिन उनमें डेटा की मात्रा बहुत कम होती थी और स्कैन करने में दिशा का ध्यान रखना पड़ता था।
मासाहिरो हारा ने एक ऐसा कोड बनाया जो:
- किसी भी दिशा (360 डिग्री) से स्कैन हो सके
- ज्यादा जानकारी स्टोर कर सके (संख्याएं, अक्षर, कांजी कैरेक्टर तक)
- तेजी से पढ़ा जा सके
यह QR कोड गो (Go) बोर्ड गेम से प्रेरित था, जहां काले-सफेद पत्थरों का पैटर्न इस्तेमाल होता है। तीन कोनों में बड़े वर्ग (position detection markers) कोड की दिशा तय करने में मदद करते हैं।
QR कोड का विकास और भारत में लोकप्रियता
- शुरुआत में QR कोड सिर्फ जापान की टोयोटा कंपनी में इस्तेमाल होता था।
- 2000 में इसे ISO मानक मिलने के बाद यह दुनिया भर में फैलना शुरू हुआ।
- लेकिन असली क्रांति तब आई जब स्मार्टफोन और कैमरा आम हो गए।
भारत में QR कोड की लोकप्रियता 2016 की नोटबंदी के बाद तेजी से बढ़ी। UPI (Unified Payments Interface) जैसे प्लेटफॉर्म – PhonePe, Google Pay, Paytm – ने QR कोड को पेमेंट का मुख्य माध्यम बना दिया। आज भारत में हर छोटी-बड़ी दुकान पर QR कोड दिखता है। लोग 5-10 रुपये से लेकर हजारों रुपये की पेमेंट सिर्फ एक स्कैन से कर लेते हैं।
कोविड-19 महामारी के दौरान QR कोड और भी जरूरी हो गया – होटल मेन्यू, टिकट बुकिंग, चेक-इन, कॉन्टैक्टलेस पेमेंट सबमें इसका इस्तेमाल बढ़ा।
QR कोड कैसे काम करता है?
QR कोड में छोटे-छोटे वर्ग (पिक्सल) होते हैं। ये काले-सफेद पैटर्न में व्यवस्थित रहते हैं। स्कैन करने पर:
- फोन का कैमरा पैटर्न पढ़ता है
- तीन बड़े वर्ग दिशा तय करते हैं
- एरर करेक्शन फीचर की वजह से थोड़ा खराब होने पर भी काम करता है
- स्टोर की गई जानकारी (URL, टेक्स्ट, वाई-फाई डिटेल्स, संपर्क आदि) तुरंत दिख जाती है
एक QR कोड में हजारों अक्षर या सैकड़ों बाइट्स डेटा स्टोर हो सकता है – पारंपरिक बारकोड से कहीं ज्यादा।
QR कोड के रोचक तथ्य
- फ्री में उपलब्ध – Denso Wave ने QR कोड का पेटेंट होने के बावजूद इसे फ्री
- में इस्तेमाल करने की अनुमति दी, ताकि यह दुनिया भर में फैले।
- मैड काऊ डिजीज में पहला बड़ा इस्तेमाल – जापान में बीफ ट्रैकिंग के लिए QR कोड का इस्तेमाल शुरू हुआ।
- भारत में रिकॉर्ड – हर साल अरबों QR स्कैन होते हैं, खासकर UPI के कारण।
- क्रिएटिव यूज – अब लोग कलरफुल QR कोड, लोगो के साथ QR कोड और 3D QR कोड भी बना रहे हैं।
- सुरक्षा – QR कोड में मैलवेयर छिपाया जा सकता है, इसलिए अनजान QR स्कैन करने से बचें।
QR कोड एक साधारण दिखने वाला काला-सफेद पैटर्न है, लेकिन इसने दुनिया को बदल दिया। एक कार कंपनी के इंजीनियर की सोच ने आज डिजिटल पेमेंट, जानकारी शेयरिंग और कॉन्टैक्टलेस दुनिया को आसान बना दिया। अगली बार जब आप QR स्कैन करें, तो याद रखिएगा – यह सिर्फ एक कोड नहीं, बल्कि 1994 की एक क्रांतिकारी सोच है।