NSA अजीत डोभाल : भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बीच एक नई उम्मीद की किरण नजर आ रही है। हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले तीन महीनों में दो गुप्त बैठकें हो चुकी हैं। ये मुलाकातें रिटायर्ड जनरलों और राजनयिकों के स्तर पर हुई हैं। ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद यह पहली बड़ी पहल मानी जा रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल का कार्यालय भी इस प्रक्रिया से अवगत है।
गुप्त बैठकें कहां और क्यों हुईं?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये बैठकें कतर और एशिया के एक अन्य देश की राजधानी में आयोजित की गईं। हालांकि ये औपचारिक नहीं थीं, लेकिन दोनों पक्षों के बीच बैक-चैनल डिप्लोमेसी की शुरुआत जरूर मानी जा रही है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस्लामाबाद और रावलपिंडी के साथ गुप्त संवाद का रास्ता खुला रखना जरूरी है।

मुख्य उद्देश्य स्पष्ट है – भविष्य में किसी भी संभावित आतंकी हमले की स्थिति में तनाव को नियंत्रित करना। फिलहाल दोनों देशों के बीच सिर्फ DGMO स्तर की साप्ताहिक हॉटलाइन ही एकमात्र संपर्क साधन है।
आतंकवाद और बातचीत – भारत की नीति साफ
- भारत सरकार की स्थिर नीति रही है कि आतंकवाद और बातचीत साथ नहीं चल सकते।
- बैक-चैनल संवाद को इस नीति का उल्लंघन नहीं माना जा रहा है।
- इसे संकट प्रबंधन की व्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है
- ताकि जरूरत पड़ने पर भारत सीधे पाकिस्तान के नेतृत्व से बात कर सके।
- पाकिस्तान की तरफ से भी ऐसी बातचीत की इच्छा जताई गई है। NSA अजीत डोभाल
- के कार्यालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय को इसकी जानकारी दी गई है।
पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति और भारत की चिंता
#पाकिस्तान फिलहाल अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की स्थिति मजबूत है और उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन प्राप्त है। ऐसे में अगर कोई नया आतंकी हमला होता है तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान पर दबाव बनाना भारत के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसलिए भारत को बैक-चैनल तैयार रखने की जरूरत महसूस हो रही है।
NSA अजीत डोभाल गुप्त वार्ता का इतिहास
- भारत-पाकिस्तान के बीच गुप्त बातचीत नई नहीं है। 2015-2018 के बीच NSA अजीत डोभाल
- ने बैंकॉक में अपने पाकिस्तानी समकक्षों से कई बैठकें की थीं। हाल ही में अप्रैल 2025 में
- लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद आसिम मलिक को पाकिस्तान का नया NSA बनाया गया।
- वे ISI प्रमुख और NSA दोनों पद संभाल रहे हैं, जिससे पाकिस्तान में सैन्य नियंत्रण और मजबूत हुआ है।
क्या संबंध सुधरने की उम्मीद है?
विश्लेषकों का मानना है कि ये बैठकें कोई बड़ा ब्रेकथ्रू नहीं हैं, लेकिन तनाव कम करने और गलतफहमी दूर करने की दिशा में सकारात्मक कदम हैं। भारत हमेशा से आतंकवाद मुक्त माहौल में ही पूर्ण वार्ता की बात करता रहा है।
- ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों के बीच आधिकारिक संपर्क शून्य रहा है।
- ऐसे में ये गुप्त प्रयास भविष्य के लिए बैकअप प्लान तैयार करने जैसे लगते हैं।
- हालांकि, अंतिम फैसला दोनों देशों की नीतियों और जमीनी हकीकत पर निर्भर करेगा।
भारत-पाकिस्तान संबंधों में सुधार की कोई गारंटी नहीं है, लेकिन बैक-चैनल डिप्लोमेसी हमेशा उपयोगी साबित हुई है। NSA अजीत डोभाल की सक्रियता और रिटायर्ड अधिकारियों के प्रयास इस बात को दर्शाते हैं कि भारत सुरक्षा के साथ-साथ संवाद के रास्ते भी खुला रखना चाहता है।
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