Donald Trump Chagos Islands : हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन हिंद महासागर में स्थित चागोस द्वीपसमूह (Chagos Islands) को खरीदने की संभावना पर विचार कर रहा है। इस खबर ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति, सुरक्षा और कूटनीति के क्षेत्र में नई बहस छेड़ दी है।
चागोस द्वीपसमूह लंबे समय से ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच विवाद का विषय रहा है। इन द्वीपों में स्थित डिएगो गार्सिया (Diego Garcia) सैन्य अड्डा अमेरिका और ब्रिटेन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यही कारण है कि इस क्षेत्र को लेकर दुनिया की बड़ी शक्तियों की नजर बनी हुई है।

Donald Trump Chagos Islands क्या है चागोस द्वीपसमूह?
चागोस द्वीपसमूह हिंद महासागर में स्थित लगभग 60 छोटे द्वीपों का समूह है। यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व के बीच स्थित है। यहां मौजूद डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डा अमेरिका की कई सैन्य और निगरानी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है।
- 1960 और 1970 के दशक में यहां रहने वाले हजारों चागोस निवासियों को विस्थापित किया गया था
- ताकि सैन्य अड्डे का विस्तार किया जा सके। यह मुद्दा आज भी मानवाधिकार
- और अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़ी बहसों का हिस्सा बना हुआ है।
ट्रंप क्यों चाहते हैं चागोस द्वीप?
- मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन को चिंता है कि यदि ब्रिटेन चागोस द्वीपों की संप्रभुता
- मॉरीशस को सौंप देता है, तो भविष्य में अमेरिका के लिए डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे की सुरक्षा और संचालन प्रभावित हो सकता है।
- ट्रंप पहले भी ब्रिटेन द्वारा चागोस द्वीप मॉरीशस को सौंपने की योजना की आलोचना कर चुके हैं।
- उनका मानना है कि यह कदम अमेरिका और उसके सहयोगियों की सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि अमेरिका सीधे मॉरीशस से बातचीत कर चागोस द्वीप खरीदने का विकल्प तलाश सकता है, हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं दिया गया है। मॉरीशस सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि उसे अमेरिका की ओर से ऐसा कोई औपचारिक प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है।
डिएगो गार्सिया का रणनीतिक महत्व
- डिएगो गार्सिया को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों में से एक माना जाता है।
- यह अमेरिकी और ब्रिटिश सेनाओं को हिंद महासागर, मध्य पूर्व और
- एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तेजी से सैन्य कार्रवाई करने की क्षमता प्रदान करता है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, चीन के बढ़ते प्रभाव और मध्य पूर्व
- की परिस्थितियों को देखते हुए अमेरिका इस अड्डे को किसी भी कीमत पर सुरक्षित रखना चाहता है।
- यही वजह है कि ट्रंप प्रशासन इस क्षेत्र के भविष्य को लेकर गंभीर दिखाई दे रहा है।
ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच विवाद
- मॉरीशस कई वर्षों से दावा करता रहा है कि चागोस द्वीप मूल रूप से उसका हिस्सा हैं
- और ब्रिटेन ने उपनिवेशवाद के दौरान इन्हें अलग कर लिया था। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय
- (ICJ) और संयुक्त राष्ट्र के कई मंचों पर भी इस मुद्दे पर चर्चा हो चुकी है।
- 2025 में ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच एक समझौता हुआ था जिसके तहत चागोस द्वीपों
- की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने की योजना बनाई गई थी, जबकि डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डा लंबे
- समय तक ब्रिटेन और अमेरिका के नियंत्रण में रहता। हालांकि 2026 में इस समझौते की प्रक्रिया को रोक दिया गया।
चागोस द्वीपों को लेकर ट्रंप प्रशासन की कथित योजना अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा विषय बन गई है। हालांकि अभी तक अमेरिका द्वारा कोई आधिकारिक खरीद प्रस्ताव नहीं दिया गया है, लेकिन इस खबर ने दुनिया का ध्यान हिंद महासागर के इस छोटे लेकिन बेहद महत्वपूर्ण द्वीपसमूह की ओर आकर्षित कर दिया है।