CJP संस्थापक हाल ही में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके एक बार फिर चर्चा में हैं। परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक के खिलाफ हुए आंदोलन के बाद उनके परिवार ने पहली बार उन कठिन दिनों का जिक्र किया, जब पार्टी के गठन के तुरंत बाद उन्हें सुरक्षा कारणों से अपना घर छोड़कर रिश्तेदारों के यहां छिपकर रहना पड़ा।
अभिजीत दीपके की मां ने एक मीडिया इंटरव्यू में बताया कि पार्टी लॉन्च होने के बाद परिवार को लगातार धमकी भरे फोन आने लगे थे। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि स्वयं अभिजीत ने अपने माता-पिता को तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी।

पार्टी बनने के बाद शुरू हुई मुश्किलें!
रिपोर्ट के अनुसार, जब CJP की शुरुआत हुई, उस समय अभिजीत दीपके अमेरिका के बोस्टन में थे। पार्टी के गठन के बाद उन्हें धमकी भरे कॉल मिलने लगे। कॉल करने वालों ने कथित तौर पर कहा कि यदि अभिजीत विदेश में हैं तो उनके माता-पिता को निशाना बनाया जाएगा।
- इसी खतरे को देखते हुए अभिजीत ने तुरंत अपने माता-पिता से संपर्क किया और
- उन्हें सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए कहा। इसके बाद उनका परिवार महाराष्ट्र
- के कोंकण क्षेत्र में रिश्तेदारों के यहां लगभग दो सप्ताह तक रहा।
मां ने सुनाई उस फोन कॉल की कहानी
- अभिजीत दीपके की मां ने बताया कि बेटे का फोन आते ही उन्होंने बिना देर किए घर छोड़ दिया।
- उन्होंने कहा कि परिवार की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता थी।
- जब अभिजीत जून के पहले सप्ताह में बोस्टन से भारत लौटे, तब परिवार उन्हें लेने पहुंचा।
- इस दौरान पूरे परिवार ने राहत की सांस ली।
परिवार को पहले नहीं थी जानकारी
- दिलचस्प बात यह है कि अभिजीत दीपके ने अपने माता-पिता को पहले से यह नहीं बताया था
- कि वह नई राजनीतिक पार्टी शुरू करने जा रहे हैं। परिवार को इसकी जानकारी
- टीवी इंटरव्यू और समाचार चैनलों के माध्यम से मिली।
- उनकी मां के अनुसार, उन्हें बेटे की इस पहल के बारे में मीडिया के जरिए पता चला
- और बाद में समझ आया कि वह युवाओं के मुद्दों को लेकर बड़ा आंदोलन शुरू कर चुके हैं।
CJP संस्थापक छात्रों के समर्थन में जारी रहा आंदोलन
अभिजीत दीपके के नेतृत्व में CJP ने परीक्षा प्रणाली में सुधार, छात्रों के अधिकारों की रक्षा और पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन चलाया। आंदोलन के दौरान कई मांगें सरकार के सामने रखी गईं, जिनमें शिक्षा व्यवस्था में सुधार, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई रोकना और दर्ज मामलों पर पुनर्विचार जैसी बातें शामिल थीं।
- हालांकि संगठन ने यह भी कहा कि यदि छात्रों को परेशान किया गया या किए गए
- वादों को पूरा नहीं किया गया तो भविष्य में फिर से शांतिपूर्ण आंदोलन किया जा सकता है।
स्वास्थ्य को लेकर भी आई खबर
- आंदोलन के दौरान अभिजीत दीपके की तबीयत भी खराब हुई और उन्हें
- टाइफाइड होने की जानकारी सामने आई। इसके बावजूद उन्होंने स्पष्ट किया
- कि छात्रों के हितों से जुड़े मुद्दों पर उनकी आवाज और आंदोलन जारी रहेगा।
युवाओं के बीच बढ़ी लोकप्रियता
अभिजीत दीपके का नाम पिछले कुछ समय में देशभर के युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ है। उनकी शिक्षा, नेतृत्व क्षमता और छात्रों से जुड़े मुद्दों को उठाने की शैली ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया। कई युवाओं ने उनके आंदोलन को शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
अभिजीत दीपके के माता-पिता द्वारा साझा की गई यह कहानी बताती है कि किसी बड़े सामाजिक या राजनीतिक आंदोलन के पीछे केवल नेता ही नहीं, बल्कि उनका पूरा परिवार भी कई कठिन परिस्थितियों का सामना करता है। धमकियों, डर और असुरक्षा के बीच भी परिवार ने संयम बनाए रखा और आज वही अनुभव सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बन गया है।