अमित शाह के कार्यक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर IAS-IPS अधिकारियों और धार्मिक पहचान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पश्चिम बंगाल दौरे से जुड़े कार्यक्रमों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। महुआ मोइत्रा का दावा है कि कुछ मुस्लिम IAS और IPS अधिकारियों को अमित शाह की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों से दूर रखा गया। उन्होंने इस मामले को लेकर IAS और IPS एसोसिएशनों से भी सवाल किया है।

महुआ मोइत्रा ने क्या आरोप लगाया?
TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने 1 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए यह दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमित शाह की मौजूदगी वाले कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के कुछ मुस्लिम अधिकारियों को शामिल होने से रोका गया।
- महुआ मोइत्रा ने अपने पोस्ट में सिलीगुड़ी के पुलिस कमिश्नर वकार रज़ा, राज्य
- के STF के DG जावेद शमीम और IAS अधिकारी खलील अहमद का नाम लिया।
- उनके अनुसार, वकार रज़ा को स्वागत करने वाली लाइन से हटा दिया गया
- जावेद शमीम को कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया और खलील अहमद को एक बैठक से बाहर जाने के लिए कहा गया।
हालांकि, ये बातें फिलहाल महुआ मोइत्रा के आरोप और दावे के रूप में सामने आई हैं। उपलब्ध रिपोर्ट में इन आरोपों की स्वतंत्र सरकारी पुष्टि का उल्लेख नहीं है। इसलिए इस मामले को आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
अमित शाह का पश्चिम बंगाल दौरा क्यों था अहम?
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 21 और 22 अगस्त 2026 को पश्चिम बंगाल के दौरे पर थे।
- इस दौरान उन्होंने राज्य और केंद्रीय सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की थी।
- बैठक में मुख्य रूप से देश की पूर्वी सीमा और सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा पर चर्चा हुई।
- सिलीगुड़ी कॉरिडोर को आम तौर पर ‘चिकन नेक’ के नाम से भी जाना जाता है।
- यह भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील
- भू-भाग है। ऐसे में इस क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर केंद्र और राज्य की सुरक्षा
- एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय को महत्वपूर्ण माना जाता है।
बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
- रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ, जनसांख्यिकीय बदलाव और सुरक्षा से जुड़े
- कई मुद्दों पर चर्चा हुई। केंद्रीय और राज्य स्तर के कई वरिष्ठ अधिकारी इस बैठक में मौजूद थे।
- इसमें गृह मंत्रालय के साथ सेना, BSF, SSB, RPF तथा पश्चिम बंगाल प्रशासन
- और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी का उल्लेख किया गया है।
बैठक में मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) के तहत सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा से संबंधित समूह ने अपनी प्रगति और सुझावों पर प्रस्तुति भी दी थी। बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की स्थिति और सीमा से जुड़े सुरक्षा मामलों की भी समीक्षा की गई।
सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर क्यों है इतना जोर?
सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के रणनीतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है। यह क्षेत्र नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं के नजदीक स्थित है। इसके जरिए पूर्वोत्तर भारत और देश के अन्य हिस्सों के बीच सड़क और रेल संपर्क बना रहता है।
इसी कारण केंद्र सरकार की ओर से इस क्षेत्र की सुरक्षा को मजबूत करने और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर लगातार जोर दिया जाता है। अमित शाह की बैठक भी इसी सुरक्षा रणनीति का हिस्सा बताई गई थी।
महुआ मोइत्रा ने IAS-IPS एसोसिएशन से पूछा सवाल
- महुआ मोइत्रा ने अपने आरोपों के साथ IAS Association और IPS Association को
- भी सवालों के घेरे में लिया। उन्होंने पूछा कि अगर किसी अधिकारी के साथ उसकी धार्मिक
- पहचान के आधार पर भेदभाव किया गया है तो संबंधित अधिकारी
- संगठनों की ओर से इसका विरोध क्यों नहीं किया गया।
- इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।
- विपक्षी दल इसे प्रशासनिक व्यवस्था में समानता और निष्पक्षता से जोड़ रहे हैं
- जबकि इस आरोप पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है।
अमित शाह के कार्यक्रम क्या है पूरे विवाद का अगला पड़ाव?
- फिलहाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि महुआ मोइत्रा के आरोपों की
- स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इस विवाद पर अंतिम निष्कर्ष निकालने
- से पहले संबंधित अधिकारियों, सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार करना जरूरी होगा।
अगर आरोपों की पुष्टि होती है तो यह मामला प्रशासनिक निष्पक्षता, अधिकारियों के अधिकार और सरकारी कार्यक्रमों में समान व्यवहार को लेकर गंभीर बहस खड़ी कर सकता है। वहीं, यदि आरोपों का कोई दूसरा प्रशासनिक कारण सामने आता है तो विवाद की तस्वीर अलग हो सकती है।
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