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रोहिणी आचार्य का सुनील सिंह पर बड़ा हमला RJD में बढ़ी अंदरूनी कलह की चर्चा!

On: June 8, 2026 10:12 AM
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रोहिणी आचार्य : बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार चर्चा का केंद्र बनी हैं लालू प्रसाद यादव की बेटी और RJD नेता रोहिणी आचार्य। उन्होंने पार्टी के विधान परिषद (MLC) उम्मीदवार सुनील सिंह को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। रोहिणी आचार्य ने सुनील सिंह पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें पार्टी के लिए नुकसानदायक बताया और कई गंभीर आरोप भी लगाए। इससे RJD के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है।

रोहिणी आचार्य ने RJD उम्मीदवार सुनील सिंह पर बयान देकर बिहार राजनीति में नई बहस छेड़ी
रोहिणी आचार्य RJD की नेता रोहिणी आचार्य के बयान से बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

क्या है पूरा मामला?

बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर RJD ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है। इस सूची में सुनील सिंह को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर विरोध के स्वर सुनाई देने लगे। सबसे बड़ा विरोध खुद रोहिणी आचार्य की ओर से आया। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ऐसे व्यक्ति को टिकट दिया गया है जो पार्टी के हितों के खिलाफ काम करता रहा है।

रोहिणी आचार्य ने आरोप लगाया कि सुनील सिंह की कार्यशैली और व्यवहार हमेशा विवादों में रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी को पहले भी ऐसे फैसलों का नुकसान उठाना पड़ा है और अब फिर वही गलती दोहराई जा रही है।

बहन के लिए कही गई बातों पर भड़कीं रोहिणी

रोहिणी आचार्य ने अपने बयान में यह भी कहा कि जो व्यक्ति उनकी बहन के बारे में अनुचित

  • और अपमानजनक बातें करता रहा हो, उसे पार्टी द्वारा सम्मानित किया जाना समझ से परे है।
  • इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने खुलकर नाराजगी जताई। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस शुरू हो गई।
  • राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत नाराजगी तक सीमित नहीं है
  • बल्कि यह RJD के भीतर मौजूद गुटबाजी और असंतोष को भी उजागर करता है।

रोहिणी आचार्य RJD में अंदरूनी मतभेद आए सामने

  • रोहिणी आचार्य के बयान के बाद विपक्षी दलों को भी RJD पर निशाना साधने का मौका मिल गया है।
  • राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जब किसी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े परिवार के सदस्य ही
  • उम्मीदवार चयन पर सवाल उठाने लगें, तो यह संगठन के भीतर असंतोष का संकेत माना जाता है।
  • RJD लंबे समय से बिहार की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों में शामिल रही है। लेकिन समय-समय
  • पर पार्टी के अंदर नेताओं के बीच मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं।
  • इस ताजा विवाद ने एक बार फिर उन चर्चाओं को हवा दे दी है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

  • रोहिणी आचार्य के बयान के बाद सोशल मीडिया पर समर्थकों और विरोधियों के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
  • कुछ लोगों ने रोहिणी के बयान का समर्थन किया और कहा कि पार्टी में अनुशासन और पारदर्शिता जरूरी है।
  • वहीं कुछ लोगों का मानना है कि इस तरह के बयान सार्वजनिक रूप से देने के बजाय पार्टी मंच पर उठाए जाने चाहिए थे।
  • राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि चुनावी समय में इस तरह के विवाद पार्टी की छवि को प्रभावित कर सकते हैं।
  • खासकर तब, जब विपक्ष पहले से ही RJD पर परिवारवाद और आंतरिक संघर्ष के आरोप लगाता रहा हो।

बिहार MLC चुनाव पर क्या पड़ेगा असर?

बिहार विधान परिषद चुनाव में RJD की रणनीति काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐसे समय में पार्टी के भीतर सार्वजनिक रूप से मतभेद सामने आना चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि अभी तक पार्टी नेतृत्व की ओर से इस विवाद पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि यह विवाद जल्द नहीं सुलझा, तो इसका असर पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी पड़ सकता है। वहीं विपक्ष इस मुद्दे को आगामी राजनीतिक अभियानों में जरूर उठाने की कोशिश करेगा।

रोहिणी आचार्य की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता!

  • पिछले कुछ वर्षों में रोहिणी आचार्य बिहार की राजनीति में लगातार सक्रिय दिखाई दी हैं।
  • सोशल मीडिया के माध्यम से वह राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रखती रही हैं।
  • यही वजह है कि उनके किसी भी बयान को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

सुनील सिंह को लेकर दिया गया उनका ताजा बयान भी इसी कारण चर्चा का विषय बन गया है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि पार्टी के भीतर उम्मीदवार चयन को लेकर सभी नेता एकमत नहीं हैं।

RJD के MLC उम्मीदवार सुनील सिंह को लेकर रोहिणी आचार्य का तीखा हमला बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ चुका है। उनके बयान ने न केवल पार्टी के अंदरूनी मतभेदों को उजागर किया है, बल्कि आगामी चुनावों से पहले RJD के लिए नई चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। अब सभी की नजरें पार्टी नेतृत्व पर टिकी हैं कि वह इस विवाद को किस तरह संभालता है और इसका चुनावी राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।

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