UK US military news : मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक बड़ा भू-राजनीतिक फैसला सामने आया है। यूनाइटेड किंगडम (UK) ने अमेरिका (US) को अपने सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी है, ताकि ईरान के खिलाफ स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज़ क्षेत्र में कार्रवाई की जा सके। यह फैसला वैश्विक राजनीति, तेल बाजार और सुरक्षा संतुलन पर गहरा असर डाल सकता है।
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज़ में जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई की योजना बनाई। इस दौरान UK ने अपने सैन्य ठिकानों—जैसे RAF Fairford और Diego Garcia—को अमेरिकी सेना के उपयोग के लिए मंजूरी दे दी।
यह कदम “collective self-defence” यानी सामूहिक सुरक्षा के तहत उठाया गया है, जिसका उद्देश्य समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज़ क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज़ दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से दुनिया का लगभग 20% तेल ट्रांसपोर्ट होता है।
यदि इस मार्ग में बाधा आती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। यही कारण है कि अमेरिका और उसके सहयोगी इस क्षेत्र को सुरक्षित रखना चाहते हैं।
ट्रंप का दबाव और UK का फैसला
- अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने NATO देशों, खासकर UK पर दबाव बनाया था
- कि वे ईरान के खिलाफ कार्रवाई में सहयोग करें। उन्होंने कुछ देशों को “कमजोर” तक कहा था।
- शुरुआत में UK इस मामले में हिचकिचा रहा था, लेकिन बाद में स्थिति बिगड़ने और
- सहयोगी देशों पर हमलों के बाद उसने अपना रुख बदल लिया और
- अमेरिका को अपने बेस इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी।
ईरान की प्रतिक्रिया!
ईरान ने UK के इस फैसले को “आक्रामक कार्रवाई में भागीदारी” बताया है और चेतावनी दी है कि वह आत्मरक्षा का अधिकार इस्तेमाल करेगा।
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि इस फैसले से ब्रिटेन के नागरिकों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
इस तनाव का सीधा असर वैश्विक बाजार पर दिख रहा है।
- तेल की कीमतों में तेजी
- ऊर्जा संकट की आशंका
- महंगाई बढ़ने का खतरा
UK सरकार ने भी संभावित आर्थिक संकट को देखते हुए आपात योजनाएं तैयार करना शुरू कर दिया है।
युद्ध का बढ़ता खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला क्षेत्रीय संघर्ष को बड़े युद्ध में बदल सकता है।
- अमेरिका पहले ही ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमला कर चुका है
- ईरान लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है
- खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधि तेज हो गई है
यह स्थिति तीसरे विश्व युद्ध जैसी आशंकाओं को भी जन्म दे रही है, हालांकि अभी सभी देश तनाव कम करने की अपील कर रहे हैं।
UK के अंदर विरोध
UK के अंदर भी इस फैसले का विरोध हो रहा है।
- जनता का एक बड़ा हिस्सा युद्ध में शामिल होने के खिलाफ है
- विपक्षी दल सरकार से जवाब मांग रहे हैं
- राजनीतिक तनाव भी बढ़ गया है
यह दिखाता है कि यह फैसला केवल अंतरराष्ट्रीय ही नहीं बल्कि घरेलू स्तर पर भी संवेदनशील है।
UK द्वारा अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों के उपयोग की अनुमति देना एक बड़ा रणनीतिक कदम है, जो मध्य पूर्व की स्थिति को और गंभीर बना सकता है। स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज़ की सुरक्षा जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है, वहीं यह निर्णय युद्ध के खतरे को भी बढ़ा रहा है।
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